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रविवार, 3 फ़रवरी 2013

videhak dalaan par bh rahal kapaar fora fori

  • एक समय छल जखन विदेह पर नव गजलकार लोकनिक पथार लागि गेल छल। लाग' लागल छल जे आब मैथिली गजलक दिन सेहो घूरतै। पहिने सरल वार्णिक बहर आ तदुपरांत अरबीओ बहरमे बहुत रास गजल सभ परसय जाए लागल। सोआद लेनाय शुरुए केने छलहुं आ की ..... किछुए मासक उपरांत सभ किछु छिडिया गेल। बहुत रास गोटे नीक स्तर तक पहुँचलाक उपरान्तो एहि बाटसँ कात भ' गेला। कारण इहो भ' सकैछ जे ओ सभ अपन-अपन काजमे बेशी व्यस्त भ' गेल हेताह/हेतीह। मुदा दुर्भाग्यवश कारण ई नहि अछि। किएक त' ओ सभ आन-आन मंच पर आन-आन विधा या भाषामे खूब रास रचना सभ परसि रहल छथि।

    त' की ओ सभ गजल विधासँ अकछ भ' गेल छथि? आ की एहि विधामे आब नै ... बहुत भ' गेल, आब दोसरो विधा सभमे नाउ कएल जाए? आ की सरल वार्णिक बहरसँ अरबी बहर तक के बाटमे कतहु अटकल छथि, ठमकल छथि? हुनका लोकनि के गजल के मुख्य धारासँ जोड़बाक लेल की कोनो प्रयासक बेगरता नै अछि? की कोनो पहल कएल जा रहल अछि वा कएल गेल अछि? 

    हुनका लोकनिक विकल्पमे नव गजलकार सभके एहि विधामे आनल जा सकैछ। मुदा हुनका लोकनि के "नव"सँ पुरान हेबामे जे ऊर्जा खपाएल गेल (चाहे ककरो) तकर की हिसाब? आ नव गज...और आगे देखें
    पसंद ·  ·  · 18 जनवरी को 04:32 अपराह्न बजे

    • 18 व्यक्तियों को यह पसंद है.
    • Bal Mukund Pathak एकदम साँच कहलौँ ,गंभीर समस्या अछि ,हिसाब हेबाक चाही ।जहाँ तक हमर बात अछि परीक्षा मेँ व्यस्त छी आ मोन सेहो खराब अछि
    • पंकज चौधरी Bal Mukund Pathak ji>> पहिने परिक्षा पर धेयान दियौ से आग्रह। माँ भगवतीसँ अपनेक अत्यातिशीघ्र स्वास्थ्यलाभक कामना करैत छी।
    • Amit Mishra नीक प्रश्न उठाओल गेल अछि ।एकर उतर एहन गजलकार दैथि जे मैथिली गजलकेँ बसरने जा रहल छथि ।जहाँ धरि हमर गप अछि तँ विनु भावेकेँ सही सब सदिखन उपस्थित छी आ रहब ।
    • मिहिर झा प्रश्‍न सटीक....उत्तर नदारत.................
    • पंकज चौधरी Mihir Jha ji>> मुदा उत्तर ताकय टा पड़त मिहिर बाबू, नै त' एतेक हरानसँ सजाएल/बनाएल गेल ई खोंता छिड़िया जाएत।
    • Ashish Anchinhar @all----ओना हम कोनो वा किनको मार्गदर्शक नै छी मुदा जे केओ हमरा मानैत छथि ( ??????) तँ हम निश्चित रूपें मार्गदर्शकक दोष मानैत छी।

      मंचक कोनो दोष नै होइ छै कारण मंच निर्जीव होइत छै... ओकरा तँ मार्गदर्शक आ अभिनेता सभ सजीव करैत छै तँए मंचक कोनो दोष नै। हँ मार्गदर्शक दोष छै से हम स्वीकार करैत छी।..
    • पंकज चौधरी गजलकार लोकनिसँ सेहो समुचित प्रतिक्रियाक अपेक्षा। अपन पक्ष रखबाक आग्रह।
    • Ashish Anchinhar कमसँ कम ई बहस हमरा लेल नीक आत्मालोचना करबाक अवसर देलक अछि। धन्यवाद पंकज जीकेँ।.
    • Bal Mukund Pathak मार्गदर्शकक कोनो दोष नै छै आ नै मंचक ।हमरा बुझने विदेह सँ नीक कोनो मंच नै छै
    • Bal Mukund Pathak आ एकटा और बात मार्गदर्शक सिर्फ मार्गदर्शन कऽ सकैत छै और किछु नै ।साहित्य शर्बत नै छै जे घोरि के पिया देल जाए ,आ मूहँ मिठ भऽ जाए ।मार्गदर्शक के दोष देल अनुचित हाएत
    • पंकज चौधरी बहसमे सहभागिता लेल धन्यवाद Bal Mukund Pathak ji मुदा एखन बहुत रास गोटेक प्रतिक्रियाक अपेक्षा अछि। किछु गोटे जागल (ऑनलाइन) छथि, व्यस्त हेता तैं बादमे (फुरसैत भेटलाक उपरान्त) प्रतिक्रया देता, हुनकर बाट जोहि रहल छी। किछु गोटे सूतल हेता, त' जगलाक बादे प्रतिक्रिया देता (स्वाभाविक छै), हुनको लोकनिक जगबाक आश रखने छी। 

      मुदा जँ कियो ने त' जगले छथि आ ने सुतले, बस अनठेने छथि, त' हुनका लोकनिक प्रतिक्रया आर बेशी महत्वपूर्ण अछि ऐ ठाम। किएक त' समाधान एतहिसँ भेटबाक उम्मेद अछि हमरा। हुनका लोकनिसँ विशेष रूपसँ आग्रह जे ओ सभ ऐ बहसमे अपन उपस्थिति सुनिश्चित करैथ।
    • जगदानन्द झा 'मनु' अरबी बहरमे गजल कहनाइ कठीन छैक, तैँ किछु गोटे शांत वा शुस्त भ गेल छथि |मुदा ई चुप्पी बिहाड़िक पहिलुका चुप्पी अछि | सभ गोटे अपन ज्ञानक विकासमे चुप्पे चुप्पे लागल छथि आ एकर उदहरण अछि शान्तिलक्ष्मीजीक आजुक गजल जएकर गिनती श्रेष्ठ गजलमें होएत |
    • Amit Mishra किछु एहने सन हमरो बुझना जाइ यै
    • पंकज चौधरी जगदानंद झा "मनु" जी aa Amit Mishra ji >> भगवती करैथ एहिना होए। मुदा शांतिलक्ष्मी जी अपवादो भ' सकैत छथि। से जँ नै त' फेर आन गजलकार सभ ऐ बहससँ एकात किएक भेल छथि। इहो बूझब आवश्यक जे सत्ते सभ तैयारीमे लागल छथि आ की कारण किछु आर अछि? आ जँ तैयारीएमे लागल छथि त' प्रतीक्षाक अन्तराल किछु नमहर नै बुझना जाइत अछि? अरबी बहर आब विदेहो पर बहुत पुरान भेल आ आब ओहि बिहाड़ि (अहाँ अनुसारे) के एबामे विलम्ब भ' रहल अछि, आ कि नै?
    • जगदानन्द झा 'मनु' आब सभ गजलकारसँ चौका छक्काक उम्मीद आ दरकारो अछि |
    • Bindeshwar Nepali पंकज जी अपनेक कहब जे मैथिली साहित्यमे आएल गजलकारलोकनि हेरागेल ।हमरा लगैत अैछ एहिमे तिनु पक्षके कमजोरी भ सकैय ।
      १.ब्यक्ति स्वयम् 
      २.किछु मन्चक दोस सेहो भ सकैत अैछ 
      ३.सही मार्गदर्शकके अभाब सेहो 

      मुदा ध्यान देबाक योग्य बात यि जे आबो एहिपर किछ परिमार्जन या नव युक्ति निकालल जाए,जाहिस सिकारु गजलकारके एहन कठिनाइके अनुभुति नै होए आ ओ सहजे अपन मार्ग सुनिश्चित क सकैथ । एकर अलाबा ओहि पथभ्रस्ट गजलकारसभस हमर सादर अनुरोध जे अपना भाषाक बिकास आ मैथलिक पहिचान हेतु मैथिलिमे गजल जरुर लिखी । मन सच्चा रहत त पक्के कठौतिमे गंगा भेटत । 
      जय मिथला... जय मैथिल....
    • Chandan Jha पंकज जी अहाँ एकटा संवेदनशील विषय (खास कऽ गजलप्रेमीक दृष्टिकोणसँ) उठौलहुँ । हमरा बुझने बेसी लोक व्यस्ताक चलतेँ एकात छथि । कम समयमे जे-जतबा आ जेहने किछु फुराइत छन्हि से विविध भाषा आ विविध विधामे लिखैत छथि । एहिमे कोनो आपत्तिजनक बात नहि छैक । तखन मैथिली गजल सेहो लिखैथ आ एकर विकासक लेल काज करथि से तऽ सभ गजलप्रेमीकेँ आस रहबे करतनि कोनो मैथिली साहित्यकारसँ । दोसर बात जँ अहाँकेँ एहन प्रतीत भेल अछि जे पहिने एकटा टीम सन लगैत छल गजलकारक टोली मुदा आब से नहि देखाइत अछि तऽ एहन हमरो लगैत अछि आ आरो बहुत गोटेँ के लगैत हेतन्हि सेहो सत्य । फेर, ई टीम एना छिन्न-भिन्न किएक लगैत अछि तकर उत्तर हमरो लग एखन नहि अछि आ हमरा सभकेँ एहि विषयपर चिंतन करबाक चाही । 
      एहिठाम अहीँ जकाँ हमरो मोनमे किछु शंका जगैत अछि जे जँ कदाचित केयो गजलप्रेमी वा गजलकार मैथिली गजलक एहि विकास धारासँ अपनाकेँ जानि-बुझि कऽ विमुख कऽ रखने छथि तऽ ओकर जड़िमे कोन बात छैक ? ओ एही टोलीक कोनो व्यक्तिक व्यवहारसँ आहत तऽ नहि छथि ? ओ कोनो पूर्वाग्रहक शिकार तऽ नहि छथि ? ओ षडयंत्रक फेरमे तऽ नहि परलाह ? हुनका जानि-बूझिकेँ तऽ नहि धकियाओल गेल ? संगहि एहू बातक पड़ताल करू जे हमर सभक मोन कतेक साफ अछि ? हमर सभक आपसी व्यवहार कतेक उचित अछि ? हमर सभक भाषा कतेक मर्यादित अछि ? आदि । एहि प्रश्न सभक उत्तर तकैत हमरा सभकेँ पहिने अपने आचार-व्यवहारमे सुधार अनबाक प्रयास करबाक चाही जाहिसँ जँ केयो हमरा सभक बीच आबथि तऽ सहर्ष संगे रहथि । जँ केयो संवेदनशील व्यक्ति छथि तखने ओ लेखक छथि भलेँहि ओ नमहर विद्वान होथि कि छोट, हुनकर रचना स्तरीय होनि कि नहि । तेँ हरेक लेखकक संवेदनशीलताक सम्मान करबाक चाही हमरा सभकेँ । कोनो संवेदनशील व्यक्ति पर कोनो विचार थोपल नहि जा सकैत अछि आ से तहिन हम सभ सेहो कोनो व्यक्तिकेँ गजल लिखबाक लेल या फेर हमरे-अहाँक मर्जीसँ लिखथि ताहि लेल बाध्य तऽ नहिए कऽ सकैत छी ....जनिते छियैक जे आब गुलामीक जमाना बीति गेलैक । तखन निश्चिते जँ हमरा सबमे किछु ने किछु कमी अछि आ जँ तकर पता लगाय आवश्यक सुधार कऽ लेब तऽ फेर अपन सभक टोली हुलसगर भऽ जायत से हमरा विश्वास अछि । बाद बाँकि बाबाक कृपा ।
    • Amit Mishra नीक गप कहलौं चंदन जी
    • Chandan Jha हाँ तखन एकटा सकारात्मक बात कहब जे गजलक संख्या एहिबीचमे भलेँहि कमल हो मुदा, गजलक गुणवत्ता अबस्से बढ़लैक अछि । तेँ संख्याबलसँ बेसी महत्पूर्ण छैक गुणवत्ता ।
    • Rajeev Ranjan Mishra पंकज जी,सबसँ पहिने त' अहाँक धन्यवाद देब जे अहाँ बिलाइरक घेंट में घंटी बन्ह्बाक सन डेग उठेलहुं! जतेक बात अहाँ कहने छी आजुक अहि पोस्ट मे ताहि मेंसँ बेसी भाग गप्प निकलल भले अहाँक मुहें होइक मुदा हमरा हिसाबे ई सभ सवाल सभ गजलकारक/गजल प्रेमिक मोनक अछि आ सभ गोटें अहि सब सवालक उत्तर अपना अपना हिसाबे खोजि रहल रही,छी आ खोजैत रहब ! रहल बात उत्तरकँ त' हमरा हिसाबे जौं हम सभ गोटें निष्पक्ष रूपे विवेचन करी त' आन सभ कारणक बाद सबसँ भारी कारण थीक "इमाम बुखारी/राज ठाकरे बाला फरमान जारी करब" "ककरो मौलिक अधिकारक हनन" आ खुलल शब्द मे जौं कही त' प्रलोभनसँ प्रताड़ना धरिक हथकंडा! अहि बात मे कोनो दोहमत ने जे साहित्यक दृष्टिकोणसँ "विदेह"सँ बढियाँ आ उत्साहवर्धक आर कोनो समूह ने,आशीष भाय आ गजेन्द्र जीसँ बढियाँ मार्गदर्शक भेटब सेहो कठिन आ सबसँ पैघ गप जे यैह एक टा मंच अछि जाहि ठाम त्रुटि बताबय बालाकँ उकठल ने जैत छैक मुदा आभार आ धन्यवाद ज्ञापित कैल जैत छैक एखनो धरि! हमरा हिसाबे तीन-चारि मास पाछू धरि जे एकटा सुन्नर आ सकारात्मक परिवेश छल ताहि मे विघटनक कारण कत्तहुं ने कत्तहुं आत्मसम्मान पर ठेस,भावनाक संगे खेलवाड़,अनर्गल प्रलाप आ "अति +आज्ञा=अवज्ञा" आदि आदि बात अछि!
      आजुक भागमभाग जिनगी मे लोक आत्मसंतोषक लेल बेसी लिखैत छैथ आ पुरुस्कार/सम्मान आ मान दान लेल कम,तहन हाँ अहिसँ परहेजो ने किनको मुदा अपन आत्मसम्मान हेराकँ? कथमपि ने (ई व्यक्तिगत हमर अपन विचार अछि) !जीवकोपार्जनक विवशता आ नाना तरहक व्यस्तताक अछैत अपना रूचि आ ज्ञानक अनुरूपे अपन मोनक भाबकँ परसय छैथ सभ गोटें,स्तर आ विवेचना त' ज्ञानी,गुनी जन आ पाठक वर्गक काज छन्हि।हम सभ गोटें अहि ठाम साहित्य सेवन लेल छी कोनो महत्वाकांक्षा आ षडयंत्रक लेल नै। एकटा गजल प्रेमी आ गजलगोहिक रुपे अपनेक चिंता विचारणीय थिक आ अहि पर गूढ़ मंथन हेबाक चाही,हमरा जे बुझबा में आयल से खुलल मोनसँ कहि गेलहुं,बिना कोनो लुका-छिपी के। हमरा पूर्ण विस्वास अछि जे अहि समुद्र मंथनसँ किछु ने किछु निष्कर्ष अवश्य निकलत जे कि मैथिली साहित्यक,विशेष रुपे गजलक भविष्य लेल अति सुखद बात होयत आ मैथिली गजलकँ एकटा नब शिखर धरि ल जैत ....ओनाहुतो गजल कम मुदा सार्थक आ उच्च कोटिक आबि रहल अछि,आगुक लेल हमर अशेष शुभकामना। 

      सृजनशील आ संवेदनशील छी हम अहाँ सभगोटें ताहि द्वारे रचनाधर्मिता अछि नै त' करबाक लेल त आरो बड्ड काज छैक आजुक समय मे

      खत्म आजुक(हमर विस्वास जे आजुक दिन मैथिली गजलक दशा आ दिशा दुनूकँ नब आयाम देत) प्रस्तुतिक दू टा शेरक संग करब प्रासंगिक बुझना जा रहल अछि,हम अहाँ गजल आ शेरक माध्यमसँ जतेक बात राखी ततेक बढियाँ आ उचित:

      किछु जागलनि किछु जागि रहल छथि एखन
      ई खाप नगरी* त्यागि रहल छथि एखन .....अमित मिश्र .....खाप नगरी ने बनय हमर अहाँक समूह (हमर विचार) से सुनिश्चित करी।

      कमल थलकमल अरहुल चमेली जटाधारी
      लदल फूल सिंघारक झड़ल तेँ कना गेलय ....शांतिलक्ष्मी चौधरी (जौं नाना रूपक फूल सभ झड़य लागत आ रहत त' सभ गोटेंकँ कनैत,किएक त' कमोबेस सबहक सिंचल अछि ई फूलवारी।)

      शुभ राति ...आब त भोर होमय बाला अछि।
    • Amit Mishra राजीव जी नीक गप रखलौं मुदा इहो कहियो जे आत्मसम्मानकेँ के ठेस पहुँचेलकै आ के हिटलर बला फरमान देलकै । ओ शक्श अपने एहि ठाम आबि एकर उतर दैथि ।
    • Ashish Anchinhar पंकज जीसँ आग्रह जे ऐ पोस्टकेँ कापी-पेसस्ट कए अ.आमे पोस्ट करथि जाहिसँ एकर उद्येश्य आर पूरा हेतै.
    • पंकज चौधरी एहि पोस्ट के अनचिन्हार आखर पर अवश्य पोस्ट करब मुदा ताहिसँ पहिने "विदेहक" एहि मंचपर आर बहुतो गोटाक प्रतिक्रियाक अपेक्षा अछि आ अधीरतासँ बाट जोहि रहल छी। Gajendra Thakur Umesh Mandal @ Om Prakash Jha Vinit Utpal @ Avinash Jha "Anshu" @ ............
    • Press Enter to post.
  • आइ लेखक पवन कुमार साहक जन्मदिन छन्हि हुनका शुभकामना
    पसंद ·  ·  · 14 घंटे पहले मोबाइल के द्वारा
  • गजल 

    एखनो कोना कऽ छी नै जनेलहुँ हम 
    छोरि मनकेँ आन नै धन कमेलहुँ हम 

    ...और आगे देखें
    पसंद ·  ·  · 30 जनवरी को 02:48 अपराह्न बजे

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