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सोमवार, 4 मार्च 2019

🙏 ज्ञान मंथन 🙏

🙏✍🙏    *ज्ञान मंथन*    🙏✍🙏
💞💕💞💕💞💕💞💕💞💕💞💕
 *📖 हमारे चार वेद है।*
1] ऋग्वेद
2] सामवेद
3] अथर्ववेद
4] यजुर्वेद
*************************************
*📜 कुल 6 शास्त्र है।*
1] वेदांग
2] सांख्य
3] निरूक्त
4] व्याकरण
5] योग
6] छंद
*************************************
*⛲ हमारी 7 नदियां।*
1] गंगा
2] यमुना
3] गोदावरी
4] सरस्वती
5] नर्मदा
6] सिंधु
7] कावेरी
*************************************
*📚 हमारे 18 पुराण।*
1] मत्स्य पुराण
2] मार्कण्डेय पुराण
3] भविष्य पुराण
4] भगवत पुराण
5] ब्रह्मांड पुराण
6] ब्रह्मवैवर्त पुराण
7] ब्रह्म पुराण
8] वामन पुराण
9] वराह पुराण
10] विष्णु पुराण
11] वायु पुराण
12] अग्नि पुराण
13] नारद पुराण
14] पद्म पुराण
15] लिंग पुराण
16] गरुड़ पुराण
17] कूर्म पुराण
18] स्कंद पुराण
*************************************
*🍚 पंचामृत।*
1] दूध
2] दहीं
3] घी
4] मधु
5] शक्कर
***********************
*🌌 पंचतत्व।*
1] पृथ्वी
2] जल
3] तेज
4] वायु
5] आकाश
***********************
*☘ तीन गुण।*
1] सत्व्
2] रज्
3] तम्
**********************
*🌀 तीन दोष।*
1] वात्
2] पित्त्
3] कफ
***********************
*🌁 तीन लोक।*
1] आकाश लोक
2] मृत्यु लोक
3] पाताल लोक
***********************
*🌊 सात महासागर।*
1] क्षीरसागर
2] दधिसागर
3] घृतसागर
4] मथानसागर
5] मधुसागर
6] मदिरासागर
7] लवणसागर
***********************
*🌅 सात द्वीप।*
1] जम्बू द्वीप
2] पलक्ष द्वीप
3] कुश द्वीप
4] पुष्कर द्वीप
5] शंकर द्वीप
6] कांच द्वीप
7] शालमाली द्वीप
***********************
*🗿 तीन देव।*
 1] ब्रह्मा
 2] विष्णु
 3] महेश
***********************
*🐋🐄🐍 तीन जीव।*
1] जलचर
2] नभचर
3] थलचर
***********************
*👴👨👦👳 चार वर्ण।*
1] ब्राह्मण
2] क्षत्रिय
3] वैश्य
4] शूद्र
***********************
*🚩 चार फल (पुरुषार्थ)।*
1] धर्म
2] अर्थ
3] काम
4] मोक्ष
***********************
*👺 चार शत्रु।*
1] काम
2] क्रोध
3] मोह
4] लोभ
***********************
*🏡 चार आश्रम।*
1] ब्रह्मचर्य
2] गृहस्थ
3] वानप्रस्थ
4] संन्यास
***********************
*💎 अष्टधातु।*
1] सोना
2] चांदी
3] तांबु
4] लोह
5] सीसु
6] कांस्य
7] पित्तल
8] रांगु
***********************
*👥 पंचदेव।*
1] ब्रह्मा
2] विष्णु
3] महेश
4] गणेश
5] सूर्य
***********************
*👁 चौदह रत्न।*
1] अमृत
2] एैरावत हाथी
3] कल्पवृक्ष
4] कौस्तुभ मणी
5] उच्चै:श्रवा अश्व
6] पांचजन्य शंख
7] चंद्रमा
8] धनुष
9] कामधेनु गाय
10] धनवंतरी
11] रंभा अप्सरा
12] लक्ष्मी माताजी
13] वारुणी
14] विष
***********************
*🌹🙏🏻  नवधा भक्ति।*
1] श्रवण
2] कीर्तन
3] स्मरण
4] पादसेवन
5] अर्चना
6] वंदना
7] मित्र
8] दास्य
9] आत्मनिवेदन
*********************
*🌍 चौदह भुवन।*
1] तल
2] अतल
3] वितल
4] सुतल
5] रसातल
6] पाताल
7] भुवलोक
8] भुलोक
9] स्वर्ग
10] मृत्युलोक
11] यमलोक
12] वरुणलोक
13] ब्रह्मलोक और
14] सतलोक

*(यह धार्मिक बातें अपने बच्चों को बताइये , दूसरों को भेजीए )*

🙏🙏🙏🍁🌷🍁🙏🙏🙏

मंगलवार, 26 दिसंबर 2017


||  जे छल सपना  || 

सुन - सुन  उगना  , 
कंठ सुखल मोर  जलक बिना  | 
सुन - सुन  उगना  ||  
                    कंठ  सुखल -----
नञि  अच्छी घर कतौ  !
नञि अंगना 
नञि  अछि  पोखैर कतौ 
नञि  झरना  | 
सुन - सुन  उगना  ||
                   कंठ  सुखल -----
अतबे  सुनैत  जे 
चलल   उगना  
झट दय  जटा  सँ 
लेलक  झरना  | 
सुन - सुन  उगना  ||
                   कंठ  सुखल -----
निर्मल  जल सरि  के  
केलनि  वर्णा  |
 कह - कह  कतय सँ 
लय   लें  उगना  || 
सुन - सुन  उगना  ||
             कंठ  सुखल -- 
अतबे  सुनैत  फँसी  गेल  उगना 
"रमण " दिगम्बर  जे 
छल सपना | 
सुन - सुन  उगना  ||
                   कंठ  सुखल -----





गुरुवार, 31 अगस्त 2017

*प्रणाम का महत्व* !!

🙏 *प्रणाम का महत्व* 🙏

महाभारत का युद्ध चल रहा था -
एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणा कर देते हैं कि -

"मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा"

उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई -

भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|

तब -

श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -

श्री कृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -

शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -

द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने -
"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!

"वत्स, तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो, क्या तुमको श्री कृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?

तब द्रोपदी ने कहा कि -

"हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दूसरे से प्रणाम किया -

भीष्म ने कहा -

"मेरे एक वचन को मेरे ही दूसरे वचन से काट देने का काम श्री कृष्ण ही कर सकते है"

शिविर से वापस लौटते समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि -

*"तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है "* -

*" अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती "* -
......तात्पर्य्......

वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्याए हैं उनका भी मूल कारण यही है कि -

*"जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "*

*" यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो "*

बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई "अस्त्र-शस्त्र" नहीं भेद सकता -

"निवेदन  सभी इस संस्कृति को सुनिश्चित कर नियमबद्ध करें तो घर स्वर्ग बन जाय।"

*क्योंकि*:-

*प्रणाम प्रेम है।*
*प्रणाम अनुशासन है।*
प्रणाम शीतलता है।            
प्रणाम आदर सिखाता है।
*प्रणाम से सुविचार आते है।*
प्रणाम झुकना सिखाता है।
प्रणाम क्रोध मिटाता है।
प्रणाम आँसू धो देता है।
*प्रणाम अहंकार मिटाता है।*
*प्रणाम हमारी संस्कृति है।*

शनिवार, 8 जुलाई 2017

हनुमंत - पचीसी

|| हनुमंत - पचीसी || 
ग्रह गोचर सं परेसान त  अहि हनुमंत - पचीसी  के ११ बार पाठ जरूर करि --- 

        हनुमान   वंदना  
शील  नेह  निधि , विद्या   वारिध
             काल  कुचक्र  कहाँ  छी  
मार्तण्ड   तम रिपु  सूचि  सागर
           शत दल  स्वक्ष  अहाँ छी 
कुण्डल  कणक , सुशोभित काने
         वर कच  कुंचित अनमोल  
अरुण तिलक  भाल  मुख रंजित
            पाँड़डिए   अधर   कपोल 
अतुलित बलअगणित  गुण  गरिमा
         नीति   विज्ञानक    सागर  
कनक   गदा   भुज   बज्र  विराजय 
           आभा   कोटि  प्रभाकर  
लाल लंगोटा , ललित अछि कटी
          उन्नत   उर    अविकारी  
  वर   बिस   भुज  रावणअहिरावण
         सब    पर भयलहुँ  भारी  
दीन    मलीने    पतित  पुकारल
        अपन  जानि  दुख  हेरल  
"रमण " कथा ब्यथा  के बुझित हूँ
           यौ  कपि  किया अवडेरल
-:-
|| दोहा || 
संकट  शोक  निकंदनहि , दुष्ट दलन हनुमान | 
अविलम्बही दुख  दूर करू ,बीच भॅवर में प्राण ||  
|| चौपाइ || 
जन्में   रावणक   चालि    उदंड | 
यतन  कुटिल   मति चल  प्रचंड  || 
बसल जकर चित नित पर नारि   | 
जत शिव पुजल,गेल  जग  हारि  || 
रंग - विरंग   चारु     परकोट   | 
गरिमा   राजमहल   केर   छोट || 
बचन  कठोरे    कहल    भवानी | 
लीखल भाल वृथा  नञि   वाणी  || 
रेखा       लखन     जखन    सिय  पार  |
वर        विपदा      केर    टूटल   पहार ||
तीरे     तरकस     वर   धनुषही  हाथ   | 
रने -       वने      व्याकुल     रघुनाथ  || 
मन मदान्ध   मति गति सूचि राख  | 
नत   सीतेहिअनुचित जूनि   भाष  || 
झामरे -  झुर   नयन  जल - धार  | 
रचल    केहन   विधि  सीय   लिलार || 
मम   जीवनहि    हे   नाथ    अजूर   | 
नञि  विधि   लिखल   मनोरथ  पुर  || 
पवन    पूत   कपि     नाथे    गोहारि  | 
तोरी      बंदि    लंका   पगु      धरि  || 
रचलक    जेहने    ओहन     कपार  | 
 दसमुख    जीवन     भेल      बेकार  || 
रचि     चतुरानन     सभे     अनुकूल  |
भंग  - अंग  ,  भेल   डुमरिक   फूल  || 
गालक    जोरगर    करमक    छोट  | 
विपत्ति   काल  संग  नञि  एकगोट || 
हाथ  -   हाथ    लंका    जरी     गेल  | 
रहि    गेल   वैह  , धरम - पथ  गेल || 
अंजनि    पूत     केशरिक       नंदन  | 
शंकर   सुवन    जगत  दुख   भंजन  || 
अतिमहा     अतिलघु     बहु     रूप  | 
जय    बजरंगी     विकटे    स्वरूप   || 
कोटि     सूर्य    सम    ओज    प्रकश | 
रोम -  रोम      ग्रह   मंगल     वास  || 
तारावलि     जते    तत     बुधि  ज्ञान |
पूँछे  -  भुजंग     ललित     हनुमान || 
महाकाय        बलमहा       महासुख  | 
महाबाहु       नदमहा       कालमुख  || 
एकानन     कपी    गगन      विहारी  | 
यौ     पंचानन       मंगल      कारी  || 
सप्तानान     कपी   बहु  दुख   मोचन | 
दिव्य   दरश   वर   ब्याकुल   लोचन  || 
रूप    एकादस      बिकटे     विशाल  | 
अहाँ    जतय     के     ठोकत    ताल || 
अगिन   बरुण   यम  इन्द्राहि  जतेक | 
अजर - अमर    वर   देलनि  अनेक ||  
सकल    जानि     हषि    सीय    भेल | 
सुदिन    आयल   दुर्दिन    दिन   गेल || 
सपत   गदा   केर   अछि   कपि   राज | 
एहि    निर्वल    केर   करियौ    काज  || 
|| दोहा  ||
जे   जपथि  हनुमंत  पचीसी  
सदय    जोरि  जुग    पाणी  | 
शोक    ताप    संताप   दुख
 दूर   करथि   निज   जानि || 
-;-
रचित -
रेवती रमण झा " रमण "
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मो 09997313751