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गुरुवार, 31 मई 2012

JIVIKA


ीिवका

िशवरािÿक Ćात। मğय मास। जइ डेढ़ मासक शीतलहरीमे सू य् मरनासž भऽ गेल
छलाह तइमे जीबैक नव शि्त सेहो आिब गेलिन। तँ रौदमे धीरे-धीरे गरमी अबैत।
चािर बजे भोरमे उमाकाĠतक नीन टुटल। िनž टुिटतिह देवाल घड़ीपर नजिर देलक।
चािर बजैत। ओछाइनेपर पड़ल-पड़ल अपन आगूक िजनगी िदिश नजिर देलक। ओना
कािŎये िदनमे दुनू दोİत िवचािर नेने छल। िवचािर नेने छल जे दुनू गोटे टेĦपू कीनए
भोुके गाड़ीसँ दरभगा ं जाएब। बदलैत िजनगीक सकĪप ं उमाकाĠतक मनमे। िकएक
तँ िजनगी मनुįयकँ िकछु करैक लेल भेटैत अिछ। मनमे एलै जे पँच पचपनमे गाड़ी
अिछ तँ पँच बजे घरसँ िनकलब। ओना अधे घंटाक रİता İटेशनक अिछ मुदा िकछु
पिहनिह पहुँचब नीक रहत। ओना कािहयो कोनो गाड़ी अपना समएपर निहये अबैए,
एकाध घटा ं लेट रिहते अिछ मुदा तइसँ हमरा की? हम समएपर जाएब। शुभ काज
सिदखन समएसँ पिहनिह करैक कोिशश करक चाही। एते बात मनमे अिबतिह
उमाकाĠत ओछाइन छोिड़ उिठ गे ल। उिठतिह मनमे एलै जे हमर ने नीन टुिट गेल
मुदा जँ दोस शोभाकाĠतक नीन निह टुटल होए, तखन तँ गड़बड़ होएत। से निह तँ
पर-पैखाना जाइसँ पिहने ओकरो जा कऽ उठा िदऐ। फेर मनमे एलै दतमिन किरते
जाए। िकएक तँ एकटा काज तँ अगुआइल रहत। हाथमे दतमिन लैतिह मनमे एलै जे
िकछु खा-पी कऽ घरसँ िनकलब। राİता-बाटक कोन ठेकान। तहूमे लोहा-लĸड़क
सवारी। कखन नीक रहत कखन बगिद जाएत, तेकर कोन ठे कान। एक बेर एिहना
भेल रहए की ने। दरभगे ं जाइत रही आिक मनीगाछी लोहनाक बीच गाड़ीक
इिजन ं खराब भऽ गेलै। भोुके गाड़ी, तँ सोचने रही जे दरभगे ं पहुँिच िकछु खाएब-
पीब। ले बलैया, दू बजे तक गाड़ी ओतए अटिक गेलै। कखनो गाड़ीक िडĤबामे जा
बैसी तँ कखनो उतिर कऽ इिजन ं लग पहुँिच Ƒाइवरकँ पूिछऐ। ओहू बेचाराक मन
घोर-घोर भेल। हमहूँ आशा-बाटीमे रिह गेलहुँ। से जँ पिहने बुिझितऐ तँ गाड़ी छोिड़
िबदेसर चौकपर चिल जैतहुँ आ बस पकिड़ सबेर सकाल दरभगा ं पहुँिच जैतहुँ। सेहो
नै केलहुँ। तेकर फल भेल जे भूखे-िपयासे खूब टटेलहुँ। तँ िबना िकछु मुँहमे देने
घरसँ नै िनकलब। ई बात मनमे अिबते उमाकाĠत पėीकँ उठबैत कहलक- ‘जाबे हम
दोस शोभाकाĠतक ऐठामसँ अबै छी ताबे अहँ चािरटा रोटी आ अĪलूक भुिजया बना
लेब।’
किह उमाकाĠत शोभाकाĠतक ऐठाम दतमिन करैत िबदा भेल। दँतमे घुİसो िदअए
आ मने-मन िबचारबो करए। मनमे एलै जे काजे एहेन छी जे मनु्खकँ मनु्खो बनबैए
आ जानवरो। दुिनयँक सभ मनु्ख तँ िकछु निह िकछु किरतिह अिछ। मुदा िकयो66 जगदीश Ćसाद मěडल
देव बिन जाइत अिछ तँ िकयो दानव। तँ काजकँ पिरखब सभसँ मूल बात छी।
शोभाकाĠत ऐठाम पहुँिचते उमाकाĠत रİतेपर सँ बोली देलक- ‘दोस छँ रौ, रौ दोस।’
ओछाइनपरसँ उठै त शोभाकाĠत बाजल- ‘हँ। दोस िछऐ रौ,  हमरो नीन टुटले
अिछ। अखन तँ अĠहारे छै।’
उमाकाĠत-  सवा चािर बजै छै । तैयार होइत-होइत पँच बिजये जाएत। कने
पिहले İटेशन जाएब।’
उमाकाĠत आ शोभाकाĠत एĸे बतारी। दुनूमेे उमेरक िहसाबसँ के छोट के पैघ,
से तँ ने अपने दुनू गोरे बुझए आ ने िकयो टोले-पड़ोसक। िकएक तँ िटपिन दुनूमेसँ
ककरो निह। ब्चेसँ दुनू गोटे, बेसी काल, एक ठाम रहैत तँ समाजोक लोक िबसिर
गेल। अपना दुनू गोटेक माइयो-बाप मिरये गेल, आन मने िकएक राखत। मुदा दुनू
गोटे एिह मौकाक लाभ उठबैत। लाभ ई उठबैत जे दुनू, दुनू गोटेक İÿीसँ हँसी-चौल
करैत। तइले दुनूमेसँ ककरो मलाल निह। मुदा गामक बूढ़ो-बुढ़ानुस आ नविकयो
किनयँ दुनू İÿीगणकँ िनरलज कहैत। तेकर गम दुनूमे सँ ककरो निह। िकएक तँ
सभ İÿीगणकँ होइत जे अिधक सँ अिधक पुुखक सगं गप-सĢप,  हँसी-मजाक
हुअए।
ब्चेसँ दुनू गोटे- उमाकाĠत आ शोभाकाĠत-  एĸे ठाम गुिĪलयो-डडा ं खेलए आ
गामेक İकूलमे पढ़बो करए। ब्चामे दुनू गोरे दुनूकँ नामे धऽ-धऽ बजैत। मुदा
चेƠगर भेलापर,  कनगुिरया ओगरीमे ं ओगरी ं िभरा दोİती लगा लेलक। िमिडल तक
गामेक İकूलमे दुनू गोटे पढ़लक। मुदा हाइ İकूलमे उमाकाĠते टा नाओ िलखेलक।
शोभाकाĠत गरीब,  तँ पढ़ाइ छोिड़ देलक। मुदा उमाकाĠतकँ दू-तीन बीघा खेतो आ
िपतो गामेक İकूलमे नोकरी करै त। ओना शोभाकाĠत उमाकाĠतसँ बेसी चड़फड़ो आ
पढ़ैइयोमे नीक। तँ अपना ्लासक मुिनिटराइयो करैत। मुनीटरक बात िशषको
अिधक मानैत आ चिņयाक बीच धाखो। पढ़ाइ छोड़लाक बाद शोभाकाĠत नोकरी करए
पटना गेल। गामसँ तँ यएह सोिच िनकलल जे जएह काज भेटत सएह करब। मुदा
रİतामे िबचार बदिल गेलै। िवचार ई बदलल जे ने चाहक दोकानमे नोकरी करब आ
ने होटलमे। ने कोठीमे काज करब आ ने तारी-दाुक दोकानमे। अगर जँ नोकरी नै
हएत तँ िर्शे चलाएब वा मिņयेमे काज करब। सरकारी नोकरीक तँ कोनो आशे
निह। िकएक तँ उमेरो नै भेलहँ।
गामसँ शहर शोभाकाĠत पिहले-पिहल पहुँचल। मुदा जे आकष्ण शहर-बजार देिख
लोककँ होइत ओ आकष्ण शोभाकाĠतकँ नै होइत। जिहना सोना-चानीक दोकान िदिश
गरीबक नजिर निह पड़ैत, तिहना। İटेशनसँ उतिर ओ उþर िदशक रİता धेलक।
कोठा-कोठीपर नजिर पड़बे ने करै। िकछु दूर गेलापर एकटा साइिकल िमİÿीक
दोकान देखलक। रİतापर ठाढ़ भऽ दोकान िहयासए लगल। दोकानदारोक नजिर
पड़ल। शोभाकाĠतपर नजिर पिड़तिह दोकानदारक मनमे आएल जे छोटो-छोटो काजमे
अपने बरदा जाइ छी, जािहसँ नमहर काज पछुआ जाइए। से निञ तँ अइ ब्चाकँ
पूिछऐ जे नोकरी रहत। जँ रहत तँ रिख लेब। हाथक इशारासँ सोर पािर िमİÿीगामक िजनगी 67
पुछलक- ‘बाउ, की नाम छी?
‘शोभाकाĠत।’
‘कþऽ घर छी?’
‘मधुबनी िजला।’
‘कþऽ जाएब?’
‘नोकरी करए एलहुँ।’
‘ऐठाम रहब?’
‘हँ। रहब।’
जिहना अितिथ-अĥयागतकँ दुआरपर अिबतिह घरबारी लोटामे पािन आिन आगूमे
दैत, खाइक आƇह करैत, तिहना शोभाकाĠतकँ िमİÿी केलक। आठ आना पाइ दैत,
आगुरक ं इशारासँ मुरही-कचड़ीक दोकान देखबैत कहलक जे ओिह दोकानसँ जलखै
केने आउ। झोरा रिख शोभाकाĠत िबदा भेल। ओना गाड़ीक झमारसँ देहो-हाथ
दुखाइत आ भूखो लागल, मुदा नोकरी पािब देहक दरदो आ भूखो किम गेलै। मुरही-
कचड़ीक दोकानपर बैिसतिह, बगए-बािन देिख दोकानदार पुछलक- ‘बौआ, अहँक घर
कþऽ छी?’
शोभाकाĠत- ‘मधुबनी िजला।’
‘गामक नाम कहू।’
‘लालगज।ं ’
‘हमरो घर तँ अहँक बगलेमे अिछ, ुपौली। बीस-प्चीस बख्सँ हम ऐठाम रहै
छी।’
िबना पाइ नेनिह दोकानदार शोभाकाĠतकँ भिर पेट खुआ देलक। खा कऽ
शोभाकाĠत साइिकलक दोकानपर आिब िमİÿीकँ पाइ घुमबैत कहलक- ‘दोकानदार पाइ
निञ लेलक।’ मु दा गिहकीक झमे ल दुआरे िमİÿी आगू िकछु निह पुछलक।
साइिकल ƀयूबक पनचर बनौनाइ,  छोट-छोट भगठीसँ ं शोभाकाĠत अपन िजनगी
शुु केलक। छोट-छोट काज भेने दोकानदारोकँ आगू बढ़ैक अवसर हाथ लगल।
साइिकल, िर्शाक सगं मोटर साइिकल आ टेĦपूक मरĦमत केनाइ सेहो शुु केलक।
शोभाकाĠतोकँ मौका भेटलै। उपारजनक लूिर अबए लगलै। दुिनयँकँ िबसिर
शोभाकाĠत िरĠच-हथौरीमे मगन भऽ गेल।
छह मास बीतैत-बीतैत शोभाकाĠत साइिकल-िर्शाक िमİÿी बिन गेल। सगिह ं
मोटर साइिकल आ टेĦपू चलाएब सेहो सीिख लेलक। मेहनत केने शरीरो फौदा गेलै।
साले भिरमे जवान भऽ गेल।
Ƒाइवरीक लाइसंस शोभाकाĠत बना लेलक। Ƒाइवरीक लाइसंस बनिबतिह
शोभाकाĠतक मनमे ŅĠŅ उĜपž हुअए लगल जे Ƒाइवरी करी आिक अपन दोकान
खोिल िमसितिरआइ करी। मुदा अपन दोकान खोलैक लेल घर भाड़ाक सगं मरĦमत
करैक सामानो िलअए पड़त। फेर मनमे एलै जे एक तँ मेनरोडमे घर नै भेटत दोसर
पाइयो ओते निञए जे सामानो कीनब। तइसँ नीक जे Ƒाइविरये करी। सएह केलक।68 जगदीश Ćसाद मěडल
Ƒाइवरीमे दरमहो नीक आ बाइिलयो आमदनी। महीना िदन तँ अĭयविİथते रहल मुदा
दोसर मास बीतैत-बीतैत असिथर भऽ गेल। दरमाहा जमा करए लगल आ बाइली
आमदनी घर पठबए लगल।
सालभिरक दरमाहासँ शोभाकाĠत टेĦपू कीिन लेलक। टेĦपू कीिन,  अपन सभ
सामान लािद, शोभाकाĠत सोझे गाम चिल आएल।
सेकेěड िडबीजनसँ उमाकाĠत बी.ए. पास केलक। ओना पढ़लो-िलखल लोक कम
मुदा ओहूसँ कम नोकरी। खेती-पथारी आ कारोवार िकयो पढ़ल-िलखल करै निह
चाहैत। जािहसँ गाम-सबहक दशा िदनो-िदन पाछुए मुँहे ससरैत। गामक लोको तेहने
जे पढ़ल-िलखल लोककँ खेती करैत देिख, िदल खोिल कऽ हँसबो करैत आ लाख
तरहक लंछना सेहो लगबैत। जािहसँ गामक पढ़ल-िलखल लोककँ नोकरी करब
मजबूरी भऽ जाइत।
नोकरीक भँजमे उमाकाĠत दौड़-धूप करए लगल। मुदा मनमे संकĪप रखने जे
घूस दऽ कऽ नोकरी निञ करब। चाहे नोकरी हुअए वा निह। दौड़-धूपसँ मन
िवचिलत हुअए लगलै। सकĪप ं डोलए लगलै। मनमे अनेको Ćķ औढ़ं मारए लगलै।
कखनो मनमे होए जे पँच कŇा खेत बेिच कऽ नोकरी पकिड़ लेब। फेिर मनमे होए
जे जखन घूस दऽ कऽ नोकरी लेब तँ घूस लऽ कऽ लोकक काज िकअए ने करबै?
फेर मनमे होए जे तखन िजनगी केहेन हएत? अछैते िजबने मुरदा बनल रहब। लोक
शरीर ितयागक बाद मृĜयु धारण करैत अिछ आ हम जीिबतेमे मरल रहब। फेर मनमे
एलै जे पėी तँ जीवन-सिगनी ं छी तँ एक बेर हुनकोसँ पूिछ िलअिन। मनमे कने
शािĠत एलै। पėीसँ पुछलक- ‘िबना घूस-घासक नोकरी भेटब किठन अिछ, से अहँक
की िवचार?’
मुİकी दैत पėी बाजिल- ‘आइक युगमे नोकरी भेटब िजनगी भेटब छी। तँ हमरो
गहना-जेबर अिछ आ जँ ओिहसँ निञ पूड़ै तऽ थोड़े खेतो बेिच कऽ नोकरी पकिड़
िलअ। देखते िछऐ जे साले भिरमे लोक की सँ की कए लैत अिछ।’
एक तँ ओिहना उमाकाĠतक मन घोर-घोर होइत,  तइपरसँ पėीक बात आरो
मरनासž बना देलक। िजनगीक आशा टूटए लगल। आँिखक रोशनी षीण हुअए
लगल। आशाक Ĕयोित कतौ बुिझये ने पड़ैत। जिहना अĠहारमे सगतिर भूते-Ćेत,
चोरे-डकैत,  सँपे-छुछुनिर बुिझ पड़ैत,  तिहना उमाकाĠतकँ हुअए लगल। डूबैत
िजनगीक आशामे कने िटमिटमाइत इजोत बुिझ पड़लै। इजोत अिबते शि्तक सचार ं
हुअए लगलै। मनमे सकĪपक ं अकुर ं अकुिरत ं हुअए लगलै। जािहसँ दृढ़ताक उदए
सेहो हुअए लगलै। मने-मन िवचार करए लगल। िवचार केलक जे िजनगीक िकछु
लŞय हेबाक चाही। मनुįय तँ चुņी-िपपरी निह होइत जे साधारण ककरो पाएर
पड़लासँ मिर जाएत। मनुįय तँ ƙŌक अशं छी। ओकरामे िवशाल शि्त िछपल छै।
िजनगीमे एिहना हवा-िबहािड़ अबै छै, तिहसँ की मनुįय मनुįयता गमा लेत। मनुįयते तँ
मनुįयक धरोहर सĦपित छी। जेकरा लोक ओिहना कतौ फेिक देत। कथमिप निह।
मने-मन िवचारलक जे हमरा नोकरी नै भेटत। तँ िक हाथपर हाथ दऽ कऽ बपहािरगामक िजनगी 69
काटब। एते कमजोर छी। की हमरामे मनु įयक सभ गुण मिर चुकल अिछ। हमरा
बुते िकछु कएल नै हएत? जुर हएत।
नोकरी िदिशसँ नजिर हटा उमाकाĠत राशनक दोकान चलबैक िवचार केलक।
िवचार एिह दुआरे केलक जे जीबैक लेल अथ्क उपाज्न जुरी होइत। िजनगीक
अिधकंश काज अरथेसँ चलैत। तँ िबना अथų िजनगी िजनगी निह रिह जाइत। हँ ई
बात जुर जे अथ्क उपाज्न आ उपयोगक ढ़गं नीक हेबाक चाही। राशनक
दोकानक जुरत सभ गाममे अिछ,  सरकार आ समाजक बीचक कड़ी सेहो छी।
ओना डीलरीक लाइसंसो बनबैमे पाइयेक खेल चलैत। मुदा तइयो जी-जँित कऽ
उमाकाĠत लाइसंस बनबै िदिश बढ़ल।
डीलरीक लाइसंस बनौलाक उपराĠत उमाकाĠत समान उठबैसँ पिहने िमāीलालसँ
कारोबारक तौर-तरीका बुझैक लेल गेल। िमāीलाल पुरान डीलर। मुदा जिहना गाममे
अपन इĔजत बनौने तिहना सरकािरयो आॅिफसमे । इĔजत बनबैक अपन तरीका। तँ
Ĥलौकक पंतािलसो डीलर िमिल ओकरा यूिनयनक सेƅेƏी बनौने। जिहना सभ डीलर
िमāीलालकँ मानै त तिहना िमāीलालो सभकँ। यएह बुिझ उमाकाĠत भँट करब
आवĮयक बुझलक। िमāीलाल ऐठाम उमाकाĠत पहुँचल तँ देखलक जे चािर-पँचटा
िधया-पुता रिजİटरपर दसखतो करैए आ िनशानो लगबैए। िकएक तँ पिछला मासक
समान बँटबारा भऽ गेल छल। तँ िबना रिजİटर तैयार भेने अिगला समान कोना
उठत?  जुरी काज बुिझ िमāीलाल मगन भऽ अपन काज करैत। उमाकाĠतकँ
देखतिह िमāीलाल रिजİटरक बीचिहमे, जइ पेजमे िनशान आ हİताषर करबैत, पेनो
आ काब्नो रिख मोड़ैत बेटाकँ कहलक- ‘बौआ, चाह बनबौने आबह?’ उमाकाĠत िदिश
होइत पुछलक- ‘िकमहर िकमहर एनाइ भेलै बौआ।’
िनिब्कार भऽ उमाकाĠत बाजल- ‘भैया,  अहँ पुरान डीलर छी। डीलरीक सभ
कुछ जनै िछऐ। बी.ए. केलाक बाद हम दू साल नोकरीक पाछु बौऐलहुँ मुदा कतौ गर
नै धेलक। आब तँ नोकरीक उमेरो लिगचाइले अिछ,  तँ नोकरीक आशा तोिड़
डीलरीक लाइसंस बनेलहुँहँ।’
नोकरीक गर निह लागब सुिन िमāीलाल कहलक- ‘बौआ, जिहना कोनो पिरवारमे
चािर-पँच भँइक भैयारी रहैत अिछ। सभ कुछ सािमले रहै छै। मुदा सभ भाइक
पėीकँ अĢपन-अĢपन सĦपिþ सेहो छै। जिहमे भाइयो सभ चोरा-नुका शािमल भऽ
जाइत अिछ। जेकर फल होइ छै घरमे आिग लागब। तिहना नोकिरयो सभमे भऽ
गेल अिछ। जे कुरसीपर अिछ ओ अपने सार-बिहनोइक जोगारमे रहैए। कहॴ कतौ
िबकिरयो होइ छै । जेकर पिरणाम बिन गेल अिछ जे नाेकरी केिनहारोक बशं बिन गेल
अिछ। देशक िवकास केहेन अिछ से तँ तू पढ़ले-िलखल छह,  सभ कुछ जिनते
छहक। जँ कनी-मनी एक रþी आगूओ बिढ़ रहल अिछ तँ ओिहसँ बेसी ओिह
नोकिरहाराक वशमे ं नोकरी केिनहार बिढ़ रहल अिछ। तँ देखबहक जे डा्टरक बेटा
डा्टरे बनत। इजीिनयरक ं इजीिनयरे। ं कते कहबह। जे जþे अिछ ओ बपौती बुिझ
ओकरा पकड़ने अिछ। तिह बीच तेसरक- जे ओिहसँ अलग अिछ- जे गित हेबाक70 जगदीश Ćसाद मěडल
चाही सएह तोरो भेलह। तहूसँ बेसी जुलुम अिछ जे िकछु गनल-गूथल लोक अिछ जे
नोकिरयो करैत अिछ,  खेतो हिथऔने अिछ आ जे कोनो सरकारी योजना बनै छै
ओकरो हड़पैत अिछ। जइसँ देखबहक जे ककरो सĦपिþ राइ-िछþी होइए आ िकयो
सĦपिþ लेल लĪल अिछ।’
उमाकाĠत- ‘भैया, दुिनयँ-दारीक गप छोड़ू। अपना काजक िवषएमे कहू।’
िमāीलाल- ‘बौआ, अखन तू जुआन-जहान छह। मुदा जे काज कऽ अपना जीबए
चाहै छह ओ गलती भेलह। तोरा सन आदमीकँ डीलरी निञ करक चाही। हम तँ
सभ घाटक पािन पीनाइ सीिख नेने छी। की नीक की अधला, से बुिझते ने िछऐ।
बुझह तँ नढ़ड़ा-हेल हेलैत छी। तँ हमर कारबार ठीक अिछ। मुदा तोरा बुते नै
हेतह?
उमाकाĠत- ‘िकए?’
तिह बीच चाह एलै। दुनू गोटे हाथमे िगलास लेलक। एक घॲट चाह पीिब
िमāीलाल- ‘देखहक, डीलरी दू दुिनयँक सीमा परक काज छी। एक िदिश सþाक
दुिनयँ अिछ आ दोसर िदिश आम लोकक। गड़बड़ दुनू अिछ।’
उमाकाĠत- ‘से की?’
िमāीलाल- ‘पिहने पिĤलकेक बात कहै िछअह। राशनक वİतु चीनी मिटयातेल, तँ
िहसाबेसँ भेटैत अिछ। नामे िछऐ कोटा। जँ मनमािफत भेिटते तँ खुĪला बजार
होइतै। से तँ निञ अिछ। गाममे िकछु एहेन-एहेन रगबाज ं सभ बिन गेल अिछ जे करा
खाइ-पीबैले नै देबहक तँ भिर िदन अपनो आ अनको उसका-उसका र्गड़े करै त
रहतह। र्गड़कँ तँ कोनो सीमा नै होइ छै। जँ कहॴ गोटे िदन लािठये-लठौबिल भऽ
जेतह तखन तँ लेनीक देनी पिड़ जेतह। दू पाइ कमाइले धधा ं करबह आिक कोट-
कचहरीक फेरमे पड़बह। बुिझते छहक जे कोट-कचहरी लोकेक पाइपर ठाढ़ अिछ।
ओइ साला रगबाज ं सभकँ की अिछ। अपने िकछु करतह निह आ अनका काजमे
सिदखन टंगे अड़ौतह। गामक उĜपातसँ लऽ कऽ थाना-पुिलस,  कोट-कचहरीक
दलाली भिर िदन करैत रहतह। आब तॲही कहह जे बरदास हेतह?  नीक लोकक
लेल अइ दुिनयँमे कतौ जगह निह अिछ। ओइ साला सभकँ की छै, भिर िदन ताड़ी-
दाु पीिब ढ़हनाइत रहतह। ने छोट-पैघक िवचार करतह आ ने गािड़ मािरक।
तइपरसँ पचायत ं मुिखयो आ वाडŸ-मेĦबर सभकँ कमीशन चाहबे किरयै। पिĤलको तेहने
अिछ। देखबहक जे कतेक एहेन पिरवार अिछ जेकरा कोटाक वİतुक जुरत नै छै
जेना चीनी। मुदा ओहो कोटासँ चीनी उठा दोकानमे िकछु नफा लऽ कऽ बेिच लेतह।
जखिनिक िकछु पिरवार एहेन अिछ जेकरा कोटाक वİतुसँ खच् नै पूड़ै छैक। अपनो
आँिखसँ देखबहक जे दस-बीस कप चाह आने पीबैत अिछ। की ओकरा सभकँ
फािजल नै देबहक। जखने एक गोटेकँ फािजल देबहक तँ दोसराक िहİसा कटबे
करत। एहेन िİथितमे डीलरे की करत? आिखर ओहो तँ समाजे क लोक छी।’
उमाकाĠत- ‘सभ गोटे तँ कोटा उठिबतो नै हेतै?’ गामक िजनगी 71
िमāीलाल- ‘हँ, सेहो होइए। मुदा ओ तखन होइए जखन कोटाक वİतुक दाम आ
खुĪला बजारक दाममे अĠतर नै रहैत अिछ। मुदा जखन दुनूक दाममे अĠतर रहैत
अिछ तखन जेकरो ने अपना पाइ रहै छै ओहो दोकानदार सभसँ, अधा-अधी नफापर,
पाइ लऽ कऽ समान उठा लै अए आ बेिच लै अए। ततबे नै ओहो चाहतह जे िकछु
फािजले कऽ समान भेटए।’
मुँह िबजकबैत उमाकाĠत- ‘तब तँ बड़ ओझरी अिछ।’
उमाकाĠतक सोचकँ गहराइ िदिश जाइत देिख मुİकी दैत िमāीलाल- ‘बौआ,
एतबेमे छगुĠता लगै छह। ई तँ एक िदसक बात कहिलहह। अहूमे कते ओझरी
छुिटये गेलह। जँ सिरया कऽ सभ बात कहबह तँ सैकड़ो ओझरी आरो अिछ। आब
सुनह आॅिफस,  बंक,  एफ.सी.आइ.क गोदामक सबं धमे। ं दौड़-बरहा जे करै पड़तह
ओकरा छोिड़ दै िछअह। िकएक तँ मोटा-मोटी यएह बुझह जे एक िदनक काजमे
पनरहो िदनसँ बेिसये लगतह। जइमे समएक सगं प्चीस-पचास पौकेटो खच् हेबे
करतह।’
उमाकाĠत- ‘तब तँ बड़ लफड़ा अिछ?’
िमāीलाल- ‘लफड़ा की लफड़ा जेकँ अिछ। जखने Ĥलौक पाएर देबहक आिक
गीध जेकँ चाु भरसँ,  अफसरसँ लऽ कऽ चपरासी धिर,  नॲचए लगतह। िकयो
कहतह जे चाह िपआउ तँ िकयो कहतह पान खुआउ। िकयो कहतह िसगरेट िपआउ
तँ िकयो िमठाइ खुआउ। सुिन-सुिन मन मोहरा जेतह। मुदा की करबहक? भीखमंगोसँ
गेल-गुजरल चािल देखबहक। जेना अपना दरमाहा भेिटते ने होए। मुदा डीलरे की
करत? अगर जँ सभकँ खुशी नै राखत तँ काजे लटपटेतै। काजो तेहेन अिछ जे
एĸे टेबुलसँ निञ होइ छै। जþे टेबुल तते खच्। अखन हमहू अगुताइल छी, तँ
नीक-नहँित निह किह सकबह। देखते छहक जे रिजİटर तैयार करै छी। Ĥलौक
जाएब। मुदा तैयो एक-दूटा बात किह दै िछयह। सबहक तड़ी-घटी ने हम बुझै
िछऐ।’
उमाकाĠत- ‘कनी-कनी सबहक बात किह िदअ?’
िमāीलाल- ‘अगुताइलमे की सभ बात मनो पड़ै छै । मुदा जे मन पड़ैए से किह
दै िछअह। पिहने बंकक सुनह। कोिरयापņीमे दुिनयँलाल डीलर अिछ। बेचारा बड़
मुँह सच। जिहना-जिहना समान िबकाइल रहए तिहना-तिहना पाइ रखने रहए। खुदरा
समानक िबƅी तँ खुदरा पाइ। जखन बंकमे जमा करए गेल अिगला कोटाक लेल, तँ
खुदरा पाइ देिख बंकमे लेबे ने केलकै। कहलकै जे ओते हमरा छुņी अिछ जे भिर
िदन तोरे पाइ गनैत रहब। भिर िदन बेचारा छटपटा कऽ रिह गेल। बंकसँ िनकलबो
ने करए जे पौकेटमार सभ ने कहॴ पाइ उड़ा िदअए। दोसर िदन आिब कऽ हमरा
कहलक। तामस तँ बड़ उठल। िकएक तँ जेना मोटका पाइ सरकारक होए आ
खुदरा नै होए,  तिहना। जखन पाइयेक लेन-देन बंकमे होइ छै तँ गनै ले İटाफ
राखह। मुदा की किरितयै। दोसर िदन गेलॱ। मनेजरकँ कहिलयै। तखन दू Ćितशत
कमीशनपर फिड़आइल। आब तॲही कहह जे ई दू Ćितशत कोन िबलमे चिल गे ल।72 जगदीश Ćसाद मěडल
तिहना दोसर बात लाए, सĢलाइ इĠसपे्टरक। इĠसपे्टर बदली भेलै। नव इĠसपे्टर
बुिझ पनरह-बीस गोटे डीलर ओकरा पाइ नै देलकै। ओना पचास ुपैये Ćित डीलर
Ćित मास इĠसपे ्टरकँ दैत अिछ। सभकँ मनमे भेलै जे नव हािकम छिथ तँ छओ
मास तँ इमानदारी रखबे करताह। ले बलैया, जहँ डीलर दोसर कोटाक सभ समान
उठौलक आिक दोसर िदन भेने िवĂनाथ डीलर ऐठाम पहुँिच गेल। िवĂनाथोकँ कोनो
डर मनमे निह। िकएक तँ समान ओिहना रहए। िवĂनाथकँ इĠसपे्टर चीनी कँटा
करैले कहलक। ओहो तैयार भऽ कँटा करै लगल। पँचो बोरा िमला कऽ चौदह
िकलो चीनी किम गेलै।
िब्चिहमे उमाकाĠत कहलक- ‘चीनी तौिल कऽ निञ नेने रहए?’
िमāीलाल- ‘ई एफ.सी.आइ. गोदामक खेल छी। एफ.सी.आइ. गोदाम तँ Ĥलौके-
Ĥलौके नै अिछ। तँ देखबहक जे डीलर सबहक नĦबर लगल अिछ। सभकँ धड़फड़
करैत देखबहक। िकएक तँ अपन टाएर गाड़ी तँ सभ डीलरक रहै नै छै। अिधक
डीलर भड़ेपर गाड़ी लऽ जाइए। तँ मनमे होइत रहै छै जे जते जĪदी समान हएत
तते कम भाड़ा लगत। तँ िकयो समान तौलबै नै अिछ। जे िकयो प्चीस ुपैइये
बोरा मनेजरकँ दऽ देने रहलै ओकरा तँ नीक समानो आ पुरल बोरो देलक। जे पाइ
निञ देने रहल ओकरा समानो दब आ घटल बोरो देलक। चोरपर चोर अिछ।’
छुĤध होइत उमाकाĠत- ‘हद लीला सभ अिछ।’
िमāीलाल- ‘आब माकųिटगं अफसर एम.ओ.क बात सुनह। अखुनका जे एम.ओ.
अिछ ओ पीआक अिछ। ओना काज करैमे भुते अिछ। रİतो-पेरामे मोटर साइिकल
लगा फाइलपर िलिख दैत अिछ। मुदा ओिहना निह। पिहले एक बोतल पीआ देबहक,
तखन।’
उमाकाĠत- ‘अफसर भऽ कऽ रİता-पेरापर बोतल पीबैए?’
ठहाका मािर हँिस िमāीलाल- ‘बौआ, तूँ गाम-घरक बात बुझै छहक। गाम-घरमे
जे छोट-पइघीक, इĔजत-आबुक िवचार अिछ ओ कþऽ पेबह। मुदा तइओ ओकरामे
दूटा गुण जुर छलैक। पिहल गुण छलैक जे आन कोनो İÿीगण िदिश निह
तिकतह। आ दोसर गुण छलै जे ककरोसँ एĸो पाइ निञ लइतह। मुदा एिहसँ
पिहलुका एम.ओ. जे रहए ओ भारी पाइखौक। सभ काजक रेट बनौने रहए। जे सभ
बुझै। तँ जेकरा जे काज रहै ओ ओइ िहसाबसँ पाइ दऽ दै आ लगले काज करा
िलअए।’
मुİकुराइत उमाकाĠत- ‘तब तँ पĸा नटिकया सभ अिछ।’
िमāीलाल- ‘नटिकया की नटिकया जेकँ अिछ। रगं -िबरगकं चोर सभ पसरल
अिछ। िकयो धनक चोर अिछ तँ िकयो धरमक। िकयो बुइिधक चोर अिछ तँ िकयो
िववेकक। कते कहबह। तेसराक सुनह। अदाजं करीब पचपन छĢपन बख्क उमेर
ओकर रहए। मु दा फीट-फाटमे जुआनक कान कटैत। जेहने हीरोकट कपड़ा पिहरैत
तेहने िहĢपीकट केश रखैत। रगं -िबरगकं तेल आ संट लगबै। सिदखन उपरका जेबीमे
ककही देखबे किरतहक। राितयोमे कैक बेर के श सीटै। चौबीस घटामे ं दू बेर दाढ़ीगामक िजनगी 73
बनबै। ओ एम.ओ. भारी नगरचोप ं जेहने अपने तेहने बहुओ। िदन भिरमे प्चीसो बेर
कपड़ा साड़ी-Ĥलाउज आ जूþा-चĢपल बदलै। केशमे कते रगकं ्लीप लगबै तेकर
ठेकान निह। भिर िदन िर्शापर अइ डेरासँ ओइ डेरा,  अइ बजारसँ ओइ बजार
घुिमते रहैत छिल। सयोगो ं ओकरा नीक भेटलै। एĸे बेर बी.डी.ओ., सी.ओक बदली
भऽ गेलइ। ओकरे दुनू गोटे चाज् दऽ कऽ गेल। ओही बीच िशषा िमÿक भेकेĠसी
भेल। लड़की सभकँ आरषण भेटलै। जिहमे जाित Ćमाणपÿक जुरत पड़ल।’
अपसोच करैत- ‘बौआ की कहबह,  ओइ सालाक डेरा बेĮयालय बिन गेल।
कखनो Ĥलौक आॅिफसमे निञ बैइसै। जखन बैसबो करै तँ आन-आन कागज देखए
मुदा एĸोटा जाित Ćमाणपÿपर हİताषर निञ करए।’
उमाकाĠत- ‘पिरवारक िकयो िकछु ने कहए?’
िमāीलाल- ‘İÿीक िवषएमे तँ किहये देिलयह। जेठकी बेटी बी.ए. मे पढ़ैत रहए।
ओकरो चािल-ढ़ािल बापे-माए जेकँ। कओले जे क एकटा छॱड़ा आिदवासी िƅĀन सगं
चिल गेलै।’
उमाकाĠत- ‘बाप-माएकँ लाज नै भेलै?’
िमāीलाल- ‘लाज तँ तेहेन भेलै जे राता-राती अइठीनसँ भागल।’
उमाकाĠत- ‘अहूँकँ बहुत काज अिछ आ हमरो मन भिर गेल। आिखरीमे एकटा
बात बुझा िदअ।’
िमāीलाल- ‘की?’
उमाकाĠत- ‘अहँ कोना अĢपन Ćितơा समाजो आ आॅिफसोमे बना कऽ रखने
छी?’
िमāीलाल मुİकुराइत बजलाह- ‘समाजमे जकरा ऐठाम सराध,  िबआह,  उपनैन,
मूड़न, भनडारा वा आन कोनो तरहक काज होइ छै तँ ओकरा हम जुर चीिनयो आ
मिņयो तेलक पूित् कइये दैत िछऐ। भलेहॴ अपना लग निहयो रहल तैयो जहँ-तहँसँ
आिन पुराइये दैत िछऐ। जइसँ समाजक सभ खुशी रहैए। आॅिफसक बात तँ पिहने
किह देिलयह।’
उमाकाĠत- ‘हमरा की करक चाही?  िकएक तँ जइ िहसाबे अहँ कहलॱ तइसँ
हĦमर मन भटिक रहल अिछ।’
िमāीलाल- ‘बौआ, जखन लाइसंस बना लेलह तखन कमसँ कम एक खेप समान
उठा कऽ बँिट लाए। जइ सँ समाजोक चािल-ढ़ािल आ आॅिफसोक चािल-ढ़ािल देिख
लेबहक। बेबहािरक ञान भऽ जे तह। ĭयवहािरके ञान असली ञान िछऐ। अखन हम
एते मदित जुर कऽ देबह जे तोरा कतौ अड़चन नै हेतह। मुदा दोसर खेपक भार
हम नै लेबह। िकएक तँ बुिझते छहक जे िबलाइ जे मूससँ दोİती करत तँ खाएत
की? तोरो सीखै क अवसर भेिट जेतह।’
उमाकाĠत- ‘बड़बिढ़या! जिहना अहँ कहलॱ तिहना हम करब।’
िमāीलाल- ‘बाउ,  आब तँ हम बूढ़ भेलहुँ। जिहया हम सोलहे बरखक रही
तिहयेसँ डीलरी करै छी। मुदा पिहलुका आ अखुनकामे अकास-पतालक अतर ं भऽ74 जगदीश Ćसाद मěडल
गेल अिछ। जते धन आ िशषाक Ćसार भेल जा रहल छै ओते घिटया मनु्ख सेहो
बिढ़ रहल अिछ। पिहने इमानदार लोक बेसी छल मुदा आब आगुरपर ं गनए पड़तह।
हम तँ डीलरीमे रिम गेलॱ। सभ घाटक पािन पीनाइ सीिख नेने छी, तँ नीक छी।’
उमाकाĠत- ‘चलैत-चलैत िकछु........।’
िमāीलाल- ‘जिहना आमक गाछ होइ छै जे आमक आँठीसँ जनमै त अिछ। तिहना
तँ मनु्खोक होइ छै। दुिनयँमे जते मनु्ख अिछ, सभ तँ मुुखे भऽ कऽ जĠम लैत
अिछ। मुदा एिहठाम जकरा जेहे न पिरवार, समाज, वातावरण भे टैत छैक ओ ओहन
बनैत अिछ। जिहना आमक छोट-छोट सरही गाछकँ नीक-नीक कलमी आमक गाछक
डािरमे बािĠह कलम लगा नीक-नीक आम बना लैत, तिहना मनु ्खोक होइत। मुदा
नीक पिरवार, नीक समाज अिछये कतेक। अिधकंश तँ गेले-गुजरल अिछ। ने सभकँ
भिर पेट खेनाइ भेटै छै आ ने नीक बात-िवचार। तखन नीक मनुįय बनत कोना?
जाधिर नीक मनु įय निह बनत ताधिर नीक समाज कोना बनत? तखन तँ जएह अिछ
तेिहमे अपनाकँ जते नीक बना जीिब सकी, वएह सतोषक ं बात। तोहूँ अखन सादा
कागज जेकँ साफ छह, तँ हम चाहब जे गĠदा निह हुअ। जेहेन िवचार, हाथ होइत
कम् िनकलतह तेहेन िजनगी हेतह। िकयो शरीरंतकँ मृĜयु बुझैत अिछ आ िकयो
आĜमाक हननकँ। मनुįयमे असीम शि्त िछपल छैक, ओकरा जगबैक अिछ। जे हमहू ँ
सिरया कऽ निहये बुझै िछऐ।’
जिहना ते ज हिथयार हाथमे एलासँ सĸत-सĸत वİतु कटैक हूबा बिन जाइत
तिहना उमाकाĠतोकँ भेल।
ओ िवचार केलक जे आब बैलगाड़ीक युग निञ रहल। मशीनक युग आिब गेल।
तँ हमहूँ अपना हाथसँ इिĠजने चलाएब

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