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गुरुवार, 31 मई 2012

पीरारक फड़


पीरारक फड़

गोल-गोल हिरयर-हिरयर भुआ जे कँ सोहरी लगल डािरमे जेहने हिरयर पात तेहने
फड़, वएह िथक पीरारक फड़। पँचेटा पुरान गाछ गाममे, बड़का-बड़का आम, जामुन
सीसो गाछक जĠम ओ पँचो पीरारक गाछ देखने। सए बरखक किरया बाबा कहैत
जे जिहयासँ मोन अिछ ओ पँचो गाछ ओिहना बुिझ पड़ैत अिछ। एते ठनका खसल,
िबहािड़ आएल मु दा ओइ पँचो गाछक ुइयँ भ्न निह भेलै। दस गजसँ नमहर निह,
ने मेघडĦमर जेकँ बहुत पसरल आ ने िछिड़आएल। छोट-छीन बरखाकँ रोिक पािनक
बुžकँ मािटक मुँ ह निह देखै दैत घनगर पात सजा कऽ सजल। सहतक कोथी जेकँ
चोखगर कँट,  डािर ुपी पहुदारकँ सजौने। छड़गर-छड़गर डािरमे चौरगर-चौरगर
पात जेना इĠƖकमल वा तगड़ फूलक होइत। तिहना फूलो।
पँचो पीरारक गाछ सइयो िबहािड़, हजारो बरखा, नमहरसँ छोट धिर सइयो बेर
पाथरक चोट खे लक, बािढ़ रौदीकँ हँसैत-हँसैत सहलक। जिहना गामक उþरबिरया
बाधमे एĸे आिड़पर पितआनी लगा पँचो गाछ ठाढ़। देखबोमे पँचो एĸे रग।ं ने
नमहर ने छोट डािर, जे एक-दोसरसँ हक-िहİसा लेल झगड़ैत। पँचोमे अटूट Ćेम।
जखन पँचो फूलसँ सजैत तखन बुिझ पड़ैत जे एक-दोसरक जुआनीक रगं देिख
हृदयसँ िखलिखला-िखलिखला हँसैत होअए। एतेक नमहर िजनगीमे ने िकयो जिड़कँ
तािम-कोिड़ पािन देलक आ ने ठािरकँ छकिड़-छुकिड़ गाछकँ सुĠदर बनौलक। सोलहो
आना देखभाल भगवाने क उपर। तँ पँचो गाछ İवािभमानसँ भरल जे ककरो एहसान
ुपी कज् िजनगीमे निह लेलॱ। सिदखन पँचो हँसैत-इठलाइत मĠद हवामे झुमैत।
पिहने पँचो गाछक फूल फुला कऽ फड़ बिन झिड़ जाइत। बादमे फड़
पूण् िजनगीक सुख भोिग अितम ं अवİथामे पकलापर पवन ुपी Ġयोतहारीकँ पठा
िचड़ै-चुनमुनीकँ बजा अपन शरीर दान करैत, यएह पँचो गाछक िजनगी भिरक धम्
रहल।
ओिह गाछसँ हिटये कऽ लोक सभ खेतक जोत-कोर कऽ उपजबैत। जे ओिह
गाछपर सुगवा सँप रहैत छैक। सुगवा सँप लोककँ देखैमे अिबते ने छैक ओ हिरयर-
लþी जेकँ रहैत छैक। जकरा कटलासँ İवग्-नरकक Ņार अनेरे खुिज जाइत छै क।
बीचमे कतौ कोनो ुकावट निह होइत छैक।
उþरवािर बाधक रखबािर रतना करैत छल। दू साल पिहने दुनू परानी मिर
गेल। दू सालसँ ्यो बाधक रखबािर करैले तैयारे ने होइत। डर होइत जे पीरारक
गाछपर सुगवा सँप रहैत छैक तँ के अपन जान गमौत, दू-चािर सेर अž सालमे हेतै
की निह।  गामक िजनगी 19
साल भिर पिहने िपचकुन नोकरी करैले मोरगं गेल। रौिदयाह समए भेने
िकसानोक दशा नीक निह। जन-बोिनहारक चचų की। सँझक-सँझ चुिŎ निह
पजरैत। गरीब-गुरबा गाए-बकरी बेिच-बेिच मोरंग,  िसलीगुड़ी,  आसाम नोकरी करए
गेल। िपचकुनमा सेहो रखवारीवाली नवकी किनयासँ पनरह ुपैआ कजŭ लऽ गेल
रहए। अखन धिर गाममे िपचकुनमाकँ बकलेले-ढहलेेले बुझैत छल। जते गोटेक
मेिड़या नोकरी करए गेल छल ओिहमे सँ िकछु गोटे िवराटनगर,  िकछु गोटे रंगैली,
िकछु गोटे िसलीगुड़ी आ िकछु गोटे आसाम गेल। िपचकुनमाकँ बकलेल बुिझ सभ
छोिड़ अपन-अपन गर लगबै गेल। असकरे िपचकुनमा इटहरी चौकसँ थोड़े आगू जा
एकटा गाछक िन्चँमे बैिस चूड़ा आ घुघनी खाए लगल। खाइते छल आिक दू गोटेकँ
उþर मुँहे जाइत देिख चूड़ा-घुघनीकँ गमछाक खॲचिड़ बना खाइते सगे ं िबदा भेल।
खेबो करै आ गĢपो-सĢप करै।
जाइत-जाइत धनकुटासँ कोस भिर पाछुए पहुँचल। जिह दुनू गोड़ेक सगं रहै ओ
दुनू िकसान। एक गोटे मगतं राम िपचकुनकँ नोकरी रिख लेलक। मरद-मौगी िमला
पचासोटा जन मगतराम ं खटबैत। सखुआक तीन महला घर बनौने। िकछु खेत
पहाड़ोपर रहै। जइमे मड़ु आ, सामी-कौनी उपजैत। नेबो सनतोला सभक गाछ सेहो
रहैक। पहाड़क उपरमे रौद देिख िपचकुन उजड़ा पहाड़ बुझै। छोट-छोट गाछसँ लऽ
कऽ पैघ-पैघ गाछक जगल। ं छोट-छोट पहाड़सँ लऽ कऽ नमहर-नमहर पहाड़ देिख
िपचकुन मने-मन सोचए जे दोसर दुिनयँमे चिल एलॱ। मुदा राİताक ठेकान रहने
भरोस रहै जे तीन िदनमे अपन गाम चिल जाएब। बड़का-बड़का बखारी, नारक टाल
देिख िपचकुन मने-मन खुशी होइत जे मािलक खूब धिनक अिछ। किहयो नोकरीसँ
हटाओत निह। जब गाम जाइक मन हएत छुņी लऽ कऽ चिल जाएब आ फेरो चिल
आएब। रİतो तँ देखले अिछ।
साल भिर नोकरी केलाक बाद िपचकुनकँ गाम अबैक मन भेलै। जिहयासँ
िपचकुन नोकरी कऽ रहल एĸो पाइ घर निह पठौलक। पठिबते कोना? ने डाकघरक
ञान रहै आ ने ककरो अबैत-जाइत देखै। एकटा थाुनसँ िपचकुनकँ लाट-घाट भऽ
गेलै। अठारह-उžैस बरखक ओ थाुन। मगते ं रामक जन। ओकर नाम धिनया।
िपचकुनक सगं अबैले धिनया राजी भऽ गेिल। साल भिरक बाद िपचकुन गाम आओत
तँ माए लेल ऊनी İवीटर, चĿिर आ अपनाे लेल फुलपंट भिर बँिहक İवीटर चĿिर
सेहो कीिन लेलक। समाज सभ लेल सनतोला िकनलक। कपड़ा, सनातोलाक मोटरी
बािĠह, ुपैआकँ फुलपंटक जेबीमे लऽ मोटरीमे सेहो बĠहलक। बटखरचा लेल मुरही
लऽ लेलक। धिनया अपन धएल-धड़ल ुपैआ कपड़ा सभ बािĠह राितयेमे तैयार भऽ
गेिल। जगलं -झारक दुआरे राितमे निह िनकलल। भुुकवा उिगते दुनू गोटे अपन-
अपन मोटरी लऽ चुपचाप िबदा भऽ गेल। जही रİतासँ िपचकुन गेल रहए ओही
रİतासँ िवदा भेल। इटहरी आिब दुनू गोटे बस पकड़लक। बससँ बथनाहा आिब पएरे
िबदा भेल। कोसीमे नाओपर पार भऽ िनरमली तक पएरे आएल। िनरमलीमे गाड़ी
पकिड़ गाम आएल।20 जगदीश Ćसाद मěडल
फुलपंट कमीज, पएरमे चĢपल पिहरने, बाबरी उनटौने काĠहपर मोटरी लेने आगू-
आगू िपचकुन आ पाछू-पाछू धिनया आिब माएकँ गोड़ लगलक। टोल-पड़ोसक लोक
िपचकुनकँ िचĠहबे ने करैत। िपचकुन माएकँ गोड़ लािग ओलतीमे चĢपल रिख माएकँ
घर लऽ जा मोटरी खोिल ुपैआक गƂडी चुपचाप देखौलक। ऊसरमे दूिब जनिम
गेल। ुपैआक गƂडी देिख माएक मोन उिड़ गे लै। हसोिथ-पसोिथ कऽ सभ कपड़ा
समेिट, ुपैया तरमे घॲिसया मोटरी बािĠह धरैनपर रखलक। धिनया ओसारपर बैसिल।
धिनयाक सबं धमे ं माए िपचकुनकँ पूछलक- ‘‘ई किनयँ के छथुन?’’
मुसकी दैत िपचकुन कहलक- ‘‘तोरे पुतोहु। ओतै िबआह कऽ लेलॱ।’’
एĸे-दुइये टोलक जिनजाित आबए लागिल। िपचकुनक माए सभकँ एक-एकटा
सनतोला देलक। एकटा दसटकही जेबीसँ िनकािल िपचकुन माएकँ दैत कहलक-
‘‘माए भूख लागल अिछ। जो दोकानसँ बेसािह सभ कुछ लऽ आन। पिहने भानस
कर। ताबे हम नहा लै छी। तीन िदनक रİताक झमारल छी, ओघीसँ ं देह भिसआइत
अिछ।’’
पुतोहु देिख िपचकुनक माए मुनेसरी सौँसे टोल पुतोहु देखैले हकार देलक।
जाितकँ भोजो गछलक।
सातम िदन िपचकुन दुनू परानी सँझकँ सोमनी दादी ऐठाम गेल, आगनमे ं िबछान
िबछा सोमनी दादी पोता-पोती सभकँ खेलबैत रहिथ। दादीकँ िपचकुन गोड़ लािग
इशारासँ धिनयाकँ सेहो गोड़ लगै लऽ कहलक। धिनओ दादीकँ गोड़ लगलक।
ओछाइिनक कोनपर बैिस िपचकु न आँिखक इशारासँ दादीकँ जँतै लेल कहलक।
धिनया सोमनी दादीकँ जँतए लागिल। िपचकुन सोमनी दादीकँ कहए लगल- ‘‘दादी,
गाममे तँ सभ बकलेले-ढहलेल बुझैत छलाए। साल भिर पिहने मोरगं गेलॱ। कमेबो
केलॱ आ ओतै िबआहो कऽ लेलॱ। आब गामेमे रहब। गाममे अहँ सभसँ पैघ छी दुनू
परानीकँ अिसरबाद िदअ।’’
उþरवािर बाधमे, सभसँ बेसी खे त सोमनी दादीक। जिह बाधमे दू सालसँ रखवार
निह। िपचकुनकँ दादी उþरवािर बाध रखवािर करैले कहलक। सगे ं पँच कŇा खेत
बटाइओ करैले कहलक। रोजी देिख िपचकुन गिछ लेलक। िपचकुनकँ खोपड़ी बĠहैले
दादी दू टा बँस, एक बोझ खढ़ आ एक मुŇी सावे गछलक।
दोसर िदन िपचकुन दुनू परानी उþरवािर बाध जा कऽ खोपड़ी बĠहैक जगह
टेबलक। एकटा उचगर परती छल जिहपर बरसातोमे पािन निह अटकै। धिनयाक
नजिर पीरारक गाछपर पड़लै,  गाछ लग जा धिनया गाछमे फड़ तजबीज करए
लागिल। फड़ देिख धिनया साड़ी कऽ फँड़ बािĠह गाछपर चिढ़ गेिल। गाछमे लुबधल
पीरारक फड़ देिख धिनयाक मोन चपचपा गेलै। तीमन करैले दसटा तोिड़ओ लेलक।
जना ककरो मािटमे गड़ल ुपैआक तमघैल भेटलासँ खुशी होइत तिहना धिनयाक मोन
खुशी। िपचकुन कोदािरसँ परतीकँ िछलए-बनबए लगल। मने-मन धिनया एक मनसँ
उपरे फड़ एक-एकटा गाममे िठकलक। खुशीसँ धिनयाक मुहसँ गीत िनकलए लगल।
गीत गुनगुनाइत िपचकुनकँ सोर पािड़ धिनया कहलक- ‘‘तकदीर जािग गेल। देखैगामक िजनगी 21
िछऐ गाछमे कॲकची लागल फड़ छै। कािŎसँ तोिड़ हाट लऽ जाएब। खूब महग
िबकाएत।’’
िपचकुनकँ बुझले ने। धिनयाक बातपर िबİवासे ने करै। िखिसया कऽ िपचकुन
पुछलक- ‘‘अहँ िचĠहै िछऐ जे की िछऐ?  जँ लोक खइतै तँ एिहना लुधकी लगल
रिहतै?’’
पीरार देिख मने-मन धिनया अपन गरीबीकँ खुशहाली िदिश बढ़ैत देखित। गरीबी
मनमे अमीरीक Ĕयोित अबैत देखलक। धिनयासँ रĸा-टोकी निह कऽ िपचकुन बाजल-
‘‘हमरा हाट-बजार करैक लूिर नै अिछ। केना बेचब?’’
धिनया नैहरोमे हाट-बाजार करैत छिल। खेतीक सभ काजक लूिर सेहो रहै।
हँस-बþक पोसबो करै आ हाट जा बेचबो करै। िनभŰक भऽ धिनया कहलक-
‘‘एकटा कड़चीक ल्गी बना कऽ सभ िदन तोड़बो करब आ बेचबो करब। अहँ
सगमे ं रहब।’’
आिसन आिब गे ल। बरखा ठमकल। सबारी समए। अिधक बरखा भेने खेत
सभमे धान उपरा-उपरी। जþे धिर नजिर जाइत तते धिर एकरगं हिरअर धान बुिझ
पड़ैत। बेर टिगते धानक पातपर ओसक बुž चमकए लगैत। जिहना कोनो बाला
हिरयर साड़ी हिरयर आगी ं पिहर माथमे मगटीका ं पिहर देखबामे लगैत तिहना खेत
ुपी बाला देखैमे लगैत। पुरबाक मĠद-मĠद हवा चलए लगल। जेतै बैसू तेþै आलस
आिब जाइत। बाधमे तीन ठाम पािनक बहावक कटािर। जािहसँ उपरका खेतक पािन
िनचला खेत िदिश बहैत। िपचकुन तीनू कटािरकँ दुनू भागसँ बािĠह अिपआरी
बनौलक। अिपआरीक पािन उपिछते अनेुआ माछ कूिद-कूिद अाबए लगल। धिनया
अिपआिरयो ओगरै आ माछो िबछै। िपचकुन िछņामे लऽ हाटो जा बेचै आ गामोमे घूिम-
घूिम बेचए लगल। दोसर-दोसर माछ बेचिनहार िपचकुनकँ एकटा साइिकल कीन लै
लेल कहलक। माथपर माछक िछņा लऽ घुमने देहो महकै। साइिकलक नाम सुिन
िपचकुनक सुतल मन फुरफुरा कऽ उठल। मुदा साइिकल चढ़ब निह आिब िपचकुन
थतमतमे पिड़ गे ल। मने-मन िपचकुन सोचलक जे जखन साइिकल भऽ जाएत तखन
चढ़ब िसखबो करब आ जाबे सीखल नै हएत ताबे पैछला सीटपर िछņा रािख
गुरकाइये कऽ घूिम-घूिम बेचब। हाटसँ घुमैत काल िपचकुन धिनयाकँ कहलक-
‘‘अधपुराने एकटा साइिकल कीिन लेब।’’
आमदनीक खुशी धिनयाकँ रहबे करै। मुİकुरा कऽ कहलक- ‘‘जखन साइिकले
कीनब तँ अधपुरान िकऐक कीनब? नबके कीिन िलअ।’’
िजितआ पाविन। मड़ुआ रोटी माछक पाविन। एक िदन पिहने िपचकुनकँ माछक
बेना लोक सभ दऽ गेल। सुतली राितमे िपचकुन चहा-चहा कऽ उठै आ घरवाली
धिनयाकँ कहै- ‘‘अिपआरीक सभ माछ बीिछ लेलक।’’ किह सपना बुिझ फेिर सुित
रहै। अĠहरोखे दुनू परानी िपचकुन टौहकी िछņा लऽ अिपआरी लग गेल। अĠहार
रहने माछ देखबे ने करै। एकटा अिपयारी लग िपचकुन बैसल। दोसर लग धनमा।
बीड़ी लगा-लगा िपचकुन पीबैत। फिर्छ होइते एकटा मे िपचकुन आ दोसरमे धिनया22 जगदीश Ćसाद मěडल
माछ िबछए लागिल। माछ हएत की निह तइ दुआरे लोक-सभ अिपआिरये लग पहुचए
लगल। तराजू-बिटखारा निह रहने िपचकुन अĠदाजेसँ बेचए लागल। िछņासँ उपरे
माछ िबक गेलै। बचलाहा माछ दुनू परानी आगनं नेने आएल। अधासँ बेिसये अगनोमे ं
िबकल। पाविनक िदन रहने हाटक भरोसे रहब िपचकुन नीक निह बुिझ धिनयाकँ
कहलक- ‘‘झब दे जलखै बनाउ। अखने माछ बेचए जाएब।’’
हँइ-हँइ कऽ धिनया रोटी पका माछक सžा बनौलक। साइिकलपर िछņा
लािद िपचकुन अगने ं -अगने ं माछ बेचए लगल। बारह बजैत-बजैत सभटा माछ िबक
गेलै।
रउदो तीखर। िपचकुन माछ बेिच पसीखाना पहुँच गेल। पसीखाना ताड़ी
िपआकसँ भरल। दुनू परानी पासी गै िहकी सĦहारैमे तगं -तगं रहै । बैसैक जगह निह
देिख िपचकुन पासी लग जा एक बĦमा ताड़ी लऽ ठाढ़े-ठाढ़ पीिब कंचा दऽ
साइिकलपर चिढ़ िबदा भेल। धिनयाकँ भँज लिग गेलै जे िपचकुन ताड़ी पीबैत
अिछ। दू रेसँ िपचकुनकँ साइिकलपर अबैत देिख धिनया ओसारपर ओछाइन ओछा
सुजनी ओिढ़ कुहरै लागिल। आगनं अिबते िपचकुन धिनयाकँ कुहरैत देखलक।
धिनयाक लगमे जा िपचकुन पुछलक- ‘‘की-इ-इ होइ-इ-इ अए-ए-ए?’’
िपचकुनक बोली सुिन धिनया आरो जोर-जोरसँ कुहरए लागिल। धिनयाक मुँह
उघािर िपचकुन फेर पुछलक। निकआइत धिनया बाजिल- ‘‘मिर जाएब। बड़का दुख
पकिड़ लेलक। छाती दुखाइत अिछ। जाउ दोकानसँ कड़ू तेल नेने आउ। सगरे देह
मािलस कू, तखने छूटत।’’
लटपटाइते िपचकु न शीशी लऽ दोकानसँ तेल आिन धिनयाकँ मािलस करै लगल।
कर घूिर-घूिर धिनया िपचकुनसँ भिर पोख मािलस करौलक। जखन िपचकुनकँ हाथ
दुखा गेलै तखन धिनया बाजिल- ‘‘कžी कऽ मन हĪलुक लगै अए।’’
मन हĪलुक सुिन िपचकुनक मनमे आशा जगै। पुनः मािलस करै लगै। धीरे-धीरे
िपचकुनोक िनशँ उतड़ै आ धिनयोक तामस कमै। िपचकुन खुशी जे घरवाली बँिच
गेलै आ धिनया खुशी जे ताड़ी पीबैक नीक सजा देिलअिन।
आिसन काितकक आमदनीसँ िपचकुनक िजनगीक नॴव पड़ल, पीरारसँ लऽ कऽ
माछ तकमे नीक कमेलक। जिह िपचकुनक िजनगी गरीबीसँ जज् र छल जे जानवरोसँ
बþर िजनगी जीबैत छल। जिहना मनुख जानवरक िवकिसत ुप छी तिहना िपचकुनो
जानवरक िजनगी टिप मनुखक िजनगीमे Ćवेश केलक। जिहना हमर पूव्ज खोपड़ी
बना रहैत छलाह आ धीरे-धीरे आइ नीक मकानमे रहैत छिथ तिहना िपचकुन मािटक
भीतक देवालक घर बनबैक िवचार केलक। ओना पािनयोक अपना कोनो उपाए निह
अिछ जेकरा लेल आगू साल जोगार करैक िवचार दुनू परानी िमिल केलक। िसफ्
घरे आ पािनयेक िदĸत िपचकुनकँ निह। ने घरमे सुतैक लेल चौकी आ ने भानस
करैले बरतन छलै जे सभ रसे-रसे जोगार करैक िवचार केलक।
सौँसे बाधमे धान फुिट लबल। हिरयर उĔजर लाल कारी शीशसँ बाध चमकए
लगल। दुनू परानी िपचकुन घर-आगनं छोिड़ भिर-भिर िदन बाधेमे रहए लगल। जँगामक िजनगी 23
बाधमे निह रहैत तँ सँढ़-पाड़ाक उपƖव, घसविहनीक उपƖवसँ िगरहİतक मुँहे फĔझित
सुनैत।
सँझू पहरकँ धिनया सोमनी दादी लग जा खेतमे लुबधल धानक Ćशसा ं करैत।
सोमनी दादी हृदएसँ धिनयाकँ अिसरवाद दैत। सामा पाबिन भऽ गेल। गोट-पङरा
खेतक धान सेहो पाकए लगल। बैसारी देिख धिनया िपचकुनकँ कहलक- ‘‘पीरारक
गाछक जिड़कँ तािम-कोिड़ कऽ सिरआ िदऔ जे आगू नीक-नहँित फड़त।’’
धिनयाक बात सु िन िपचकुन बिढ़यँ जेकँ पीरारक गाछक जिड़कँ तािम बकरी
भेरारी िमलल छाउर पँचो गाछमे चािर-चािर पिथया दऽ दू-दू घैल पािन सेहो देलक।
पनरहे िदनक बाद पँचो गाछक रगं बदिल हिरयर-कचोर भऽ गेलै। सभ मूड़ीमे नवका
कलश सेहो भेलै। जिहना मनुख अपन ब्चाकँ सेवा करैत,  तिहना दुनू परानी
िपचकुन पीरारक गाछकँ करए लगल। अपन सेवा देिख पँचो पीरारक गाछ हृदएसँ
दुनू परानी िपचकुनकँ अिसरवाद देमए लगल।

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