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गुरुवार, 31 मई 2012

िबसँढ़


िबसँढ़

पिछला चािर सालक रौदी भेने गामक सु रिखये बेदरगं भऽ गेल। जे गाम हिरयर-
हिरयर गाछ-िबरीछ, अžसँ लहलहाइत खेत, पािनसँ भरल इनार-पोखिर, सैकड़ो रगकं
िचड़ै-चुनमुनी, हजारो रगकं कीट-पतगसँ ं लऽ कऽ गाए महीस आ बकरीसँ भरल रहैत
छल ओ मरनासž भऽ गेल। सुन-मसान जेकँ। बीरान। सबहक मनमे एĸेटा िवचार
अबैत जे आब ई गाम नै रहत। जँ रहबो करत तँ खाली मािटयेटा। िकएक तँ जिह
गाममे खाइक लेल अž निह उपजत, पीबैक लेल पािन निह रहत, तिह गामक लोक
की हवा पीिब कऽ रहत? जिह मातृभूिमक मिहमा अदौसँ सभ गबै त अएलाह ओ भूिम
चािरये सालक रौदीमे पेटकान लािध देलक। मुदा तैयो लोकक टूटैत आशाक वृषमे
नव-नव फुलक कोढ़ी टुİसाक सगं जुर िनकिल रहल अिछ। िकएक तँ आिखर
जनकक राज िमिथला िछयै की ने। जिह राĔयमे बारह-बख्क रौदीक फल सीता सन
भेटल तिह राजमे,  हो न हो,  जँ कहॴ ओहने फल फेर भेटए। एक िदिश रौदीक
सघन मृĜयुवाण चलैत तँ दोसर िदिशसँ आशाक ĆĔविलत वाण सेहो ओकर मुकाबला
करैत। जेकर हसेिरयो नमहर। एहनो िİथितमे दुनू परानी डोमनक मनमे जीबैक
ओहने आशा बनल रहल,  जेहने सुĥयİत समएमे। काĠहपर कोदािर नेने आगू-आगू
डोमन आ माथपर िसगही ं माछ आ िबसँढ़सँ भरल पिथया नेने पाछु-पाछु सुिगया,
बड़की पोखिरसँ आगनं , िजनगीक गप-सĢप करैत अबैत। चािनक पसीना दिहना हाथसँ
पोिछ, मुİकुराइत सुिगया बाजिल- ‘जकरा खाइ-पीबैक ओिरयान करैक लूिर बुझल छैक
ओ कथीक िचĠता करत?’’, पėीक बात सुिन डोमन पाछू घुिर सुिगयाक चेहरा देिख
िबनु िकछु बजनिह,  नजिर िन्चँ केने आगू डेग बढ़बए लगल। िकएक तँ खाइक
ओते िचĠता मनमे निह, जते पािन पीबैक।
.......................................
डोमनकँ अपन खेत-पथार निह। मुदा दुनू बेकती तेहन मेहनती जे निहयो िकछु
रहने नीक-नहँित गुजर करैत। िगरहİतीक सभ काजक लूिर रिहतहुँ ओ कोनो
िगरहİतसँ बĠहाएल निह, ओना समए-कुसमए अपना काज निह रहने बोइनो कऽ लैत।
अपना खेत निह रहने खेती तँ निहये करैत मुदा दस कŇा मड़ुआ सभ साल बटाइ
रोिप लैत, जािहसँ पँच मन अžो घर लऽ अबैत। मड़ुआ बीआ उपजबैमे बेसी िमहनत
होइत अिछ। सभ िदन बीआ पटबए पड़ैत अिछ। शुुहे रोहिणमे बड़की पोखिरक
िकनछिरमे डोमन बीआ पािड़ लैत। लगमे पािन रहने पटबैयोक सुिवधा। आु बीरार
तँ बीओ नीक उमझैत। पनरहे िदनमे बीआ रोपाउ भऽ जाइत। िमरिगिसयामे पािन
होइतिह अगते मड़ुआ रोिप लैत। मुदा एिह बेर से निञ भेलै। बरखा निह भेने बीआ12 जगदीश Ćसाद मěडल
बीरारेमे बुढ़हा गे ल। एĸो धुर मड़ुआक खेती गाममे निह भेलै। आ ने िकयो अखन
धिर धानक बीरारक खेत जोतलक आ ने बीआ बाओग केलक। रौदीक आगम सबहक
मनमे हुअए लगल। मुदा तैयो ककरो मनमे अĠदेशा निह!  िकएक तँ ढ़ेनुआर नषÿ
सभ पछुआइले अिछ।
जिहना रोहिण-िमरिगिसया फंेक गेल तिहना अƖो। समए सेहो खूब तिब गेलै।
दस बजेसँ पिहनिह सभ बाधसँ आगनं आिब जाएत। िकएक तँ लू लगैक डर सबहक
मनमे। मड़ुआ खेती निह भेने दुनू परानी डोमनक मनमे िचĠता पैसए लगल। बड़की
पोखिरसँ दुनू परानी पुरैिनक पातक बोझ माथपर नेने अगना ं अबैत। बाटमे सुिगया
बाजिल- ‘‘अइ बेर एĸो कनमा मड़ुआ निञ भेल। बटाइयो केने आन साल ओते भऽ
जाइत छल जे सालो भिर जलखै चिल जाइ छलाए। अइ बेर तँ जलखइओ बेसािहये
कऽ चलत।’’
माथ परक पुरैिनक पातक बोझसँ पािन चुबै त। जे डोमनो आ सुिगयोकँ
अधिभĔजु कऽ देने। नाक परक पािन पोछैत डोमन उþर देलक- ‘‘कोनो िक हमरेटा
निञ भेल आिक गामेमे ककरो नै भेलै। अनका होइतै आ अपना नै होइत तखन ने
दुख होइत। मुदा जब ककरो नै भेलै तँ हमरे िकअए दुख हएत। जे दसक गित हेतै
से हमरो हएत। अपना तँ पुरैन-पातक िबƅीक रोजगारो अिछ आ जे करा इहो ने छै?’’
डोमनक उþर सुिन िमरिमरा कऽ सुिगया बाजिल- ‘हँ, से तँ ठीके । मुदा ठनका
ठनकै छै तँ िकयो अपने माथपर ने हाथ दै अए। तखन तँ ई रौदी इसरक डँग छी,
लोकक कोन साध।’’
अखन धिरक समए िकयो रौदी निह बुझलक। सबहक मनमे यएह होइत जे ई
तँ भगवानक लीले िछयिन। जे कोनो साल अगतेसँ पािन हुअए लगैत तँ कोनो साल
अतमे ं होइत। कोनो साल बेिसओ होइत तँ कोनो साल कĦमो। कोनो-कोनो साल
निहये होइत। जिह साल अगते िबहिरया हाल भऽ जाइत ओिह साल समएपर
िगरहİती चलैत मुदा जिह साल पचता पािन होइत तिह साल अधखड़ू खेती भऽ
जाइत। मुदा जखन हिथया नषÿ धिर पािन निह भेल तखन सबहक मनमे अाबए
लगल जे अइ बेर रौदी भऽ गेल। ओिहना जोतल- िबनु जोतल खेतसँ गरदा उड़ै त।
घास-पातक कतौ दरस निह। मुदा तँ िक लोक हािर मािन लेत। कथमिप निह। सभ
िदनसँ गामक लोकमे सीना तािन कऽ जीबैक अĥयास बनल अिछ ओ पीठ कोना
देखाओत? भऽ सकैत अिछ जे इĠƖ भगवानकँ कोनो चीजक दुख भऽ गेल हेतिन।
जािहसँ िबगिड़ कऽ एना केलिन। तँ हुनका बौँसब जुरी अिछ। जखने फेर सुधिर
जेताह तखनेसँ सभ काज सुिढ़या जाएत। यएह सोिच िकयो भुखल दुखलकँ अž
दान तँ िकयो कीत्न-अƠयाम-नवाह तँ िकयो यञ-जप चडी ं , िवįणु तँ िकयो महादेव
पूजा िलगं इĜयािद अनेको रगकं बौँसैक ओिरयान शुु केलक। जिनजाित सभ कमला-
कोशीकँ छागर-पाठी कबुला सेहो करए लगलीह। िकएक तँ जँ हुनकर मिहमा जगतिन
तँ िबनु बरखोक बािढ़ अनतीह। बािढ़ आओत पोखिर-झाखिड़सँ लऽ कऽ चर-चौरी,
डीह-डाबर सभ भरत। रौदी कमत। अधा िछधा उपजो हेबे करत।गामक िजनगी 13
बरखाक मकमकी देिख नेङरा काका महाजनी बž कऽ लेलिन। ओ बुिझ
गेलिखन जे अइ बेरक रौदी अिगला साल िबसाएत। मुदा सोझमितया बौकी काकीक
सभ चाउर सिठ गेलिन। ओना बौकी काकीक लहनो छोट। िसफ् चाउरेक। सेहो
पाविनये-ितहार धिर समटल। हुनकर महाजनी मातृ-नवमी,  िपतृपषसँ शुु होइत।
पाहुन-परकक लेल दुगŭपूजा,  कोजगरा होइत िदवाली परेब,  गोवध्नपूजा,  भरदुितया,
छिठ होइत सामा धिर अबैत-अबैत सĦपž भऽ जाइत छलिन। िकएक तँ सामाकँ सभ
नवका चूड़ा खुआबैत। खुएबे टा निह करैत सगं भारो दैत। ताधिर कोला-कोली धानो
पिक जाइत। मु दा से बात बौकी काकी वुझबे ने केलिखन जे अइ बेर रौदी भऽ
गेल। तँ अपनो खाइ ले िकछु निह रखलिथ। जिहना बोिनहार,  िकसान तिहना
महाजन बौिकयो काकी भऽ गेलीह।
अगहन अबैत-अबैत सभकँ बुिझ पड़ए लगलैक जे अपने की खाएब आ माल-
जालकँ की खु आएब। िकएक तँ काितक धिरक ओिरयान  -अपनो आ मालो-जालक
लेल- तँ अिधकंश लोक पिहनिह सँ कऽ कऽ रखैत। जे नेङरा काका छोिड़ सबहक
सिठ गेलिन। धानोक बीआ सभ कुिट-छँिट कऽ खा गेल। धानक कोन गप जे
हालक दुआरे रिĤबयो-राइ हएब किठन। सबहक भĸ खुजल। भĸ खुिजतिह मनमे
िचĠता समाइ लगल। जेना-जेना समए बीतैत तेना-तेना िचĠतो फौदाइत। एक तँ
ओिहना चुिŎ सभ बž हुअए लगल तइ परसँ सुरसा जेकँ समए मुँह बािब आगूमे
ठाढ़। िचĠतासँ लोक रोगाइ लगल। भोर होइतिह िधया-पूताक बाजा सॱसे गाम बाजए
लगैत। मौगी पुुखकँ करमघņू तँ पुुख मौगीकँ राषसनी कहए लगल। जािहसँ
िधया-पूताक बाजाक सगं दुनू परानीक नाच शुु भऽ जाइत। मुदा एहन समए भेलोपर
दुनू परानी डोमनक मनमे एĸो िमिसया िचĠता निह। िकएक तँ जूरे-शीतलसँ पुरैिनक
पातक कारोबार शुु केलक। कारोबार नमहर। बावन बीघाक बड़की पोखिर। जिहमे
सापर-िपņा पुरैिनक गाछ। बजारो नमहर। िनरमली, घोघरिडहा, झझारपुर ं İटेशनो आ
पुरनो बजार। असकरे सुिगया कते बेचत। पुरैिनक पात कीनिनहार हलुआइसँ लऽ
कऽ मुरही-कचड़ीवाली धिर। तइपर सँ भोज-काजमे सेहो िबकाइत। तँ आठ िदनपर
पार लगौने रहए। भिर िदन डोमन पþा तोिड़-तोिड़ जमा करैत। एक िदनकँ सु िगया
पþा सिरअबैत, गिन-गिन तेसरा िदन भोुके गाड़ीसँ बेचैले जाइत। जे पात उगिड़
जाय ओकरा डोमन सुखा-सुखा रखैत। िकएक तँ सुखेलहो पातक िबƅी होइत।
िनरमलीसँ पात बेिच कऽ सुिगया आिब पितकँ कहलक- ‘‘रौदी भेने अपन चलती
आिब गेल।’’
चलतीक नाम सुिन मुİकी दैत डोमन पुछलक- “से की?’’
 ‘‘सभ पात बेिचिनहार बेपारी थस लऽ लेलक। सभ गामक पोखिर सुिख गेलै
जािहसँ सबहक कारेबार बž भऽ गेलै। अपने टा पात बजार पहुँचैए। आइ तँ जहँ
गाड़ीसँ उतड़लहुँ आिक दोकानदार सभ सभ-पात छािन लेलक। टीशनेपर छुहुĸा उिड़
गेल।’’
डोमन- ‘‘अहँकँ लूिर निञ छलए जे दाम बढ़ा िदितऐ, एकक दू होइत।’’ 14 जगदीश Ćसाद मěडल
सुिगया- ‘‘अिगला खेपसँ सएह करब। आब तँ बिड़ड़यो जुआइत हएत की ने?’’
डोमन- ‘‘गोटे-गोटे जुआएलहँ। मुदा बीिछ-बीिछ तोड़ए पड़त। तँ पँच िदन आरो
छोिड़ दै िछऐ।’’
तेसर साल चढ़ैत-चढ़ैत गामक एकटा बड़की पोखिर आ पँचटा इनार छोिड़ सभ
सुिख गेल। नमहर आँट-पेटक बड़की पोखिर। िकएक तँ दैतक खुनल छी की ने?
लोकक खुनल थोड़े िछऐ। देव अशं अिछ। तँ ने गामक सभ अपन बेटाकँ उपनयनो
आ िबआहोमे ओही पोखिरमे नहबैए। ततबे निह छिठमे हाथो उठबैए। हमरा इलाकाक
पृĝवीओक बनाबिट अजीब अिछ। बुझू तँ मािटक पहाड़। पँच फुटसँ िन्चँ धिर ने
बाउल अिछ आ ने पािन। शुŀ मािट। जािहसँ ने एĸोटा चापाकल आ ने बोिरगं
गाममे। पािनक दुआरे गामक-गाम लोककँ पराइन लिग गेल। माल-जाल उपिट गेल।
चाहे तँ लोक बेिच लेलक वा खढ़ पािनक दुआरे मिर गेल। अधासँ बेसी गाछो-िबरीछ
सुिख गेल। िचड़ै-चुनमुनी इलाका छोिड़ देलक। जे मूस अगहनमे अƇेजी ं बाजा बजा
सत-सतटा िवआह करैत छल ओ या तँ िबलेमे मिर गेल वा कतऽ पड़ा गेल तेकर
ठेकान निह। हमरो गामक अधासँ बेिसये लोक पड़ा गेल। मुदा तैयो िजबठगर लोक
गाम छोड़ैले तैयार निह। पुुख सभ गाम छोिड़ परदेश खटैले चिल गेल। मुदा बालो-
ब्चा आ जिन-जाितयो गामेमे रहल। पोखिर-इनारकँ सुखैत देिख, पािन पीबैक लेल
बड़िकये पोखिरक कतबािहमे कुप खुिन-खुिन लेलक। अपन-अपन कुप सभकँ।
पािनक कमी निह। तीन सालक जे रौदी परोपņाक लेल वाम भऽ गेल वएह डोमनक
लेल दिहन भऽ गेल। काज तँ आने साल जेकँ मुदा आमदनी दोबर-तेबर भऽ गे लै।
गामक जमीनोक दर घटल। जािहसँ डोमन खेत कीनए लगल। ओना सुिगयाक इ्छा
खेत कीनैक निह। िकएक तँ मनमे होए जे एिहना रौदी रहत आ खेत सभ पड़ता
रहत। तँ अनेरे खेत लऽ कऽ की करब। मु दा मालो-जाल तँ घास-पािनक दुआरे
निहये लेब नीक हएत। डोमनक मनमे आशा रहए जे जिहना लुिŎयो किनयँ बेटा
जनमा कऽ िगरथाइन बिन जाइत, तिहना तँ पािन भेने परितयो खेत हएत की ने।
योगी-तपİवीक भूिम िमिथला अदौसँ रहल। जे अपन देह जीव-जĠतुक कĪयाणक
लेल गला लेलिन। ओ िक एिह बातकँ निह जनैत छलिथन। जनै त छलिथन। तँ ने
गाममे अŇारह गěडा माने ७२ टा पोखिर, सþाइस गěडा माने १०८ टा इनारक सगं -
सगं चौरीमे सैकड़ो कोचािढ़-िबरइ खुिन पािनक बखारी बनौने छलाह। सोलहो आना
बरखे भरोसे निह, अपनो जोगार केने छलाह।
तीन साल तँ दुनू परानी डोमन चैनसँ िबतौलक। मुदा चािरम साल अबैत-अबैत
बेचैन हुअए लगल। गामक सभ पोखिर-इनार तँ पिहनिह सुिख गेल छल। लऽ दऽ
कऽ बड़की पोखिर टा बँचल। तहूमे सुखैत-सुखैत माÿ कňा पँचेमे पािन बचल।
सुखल िदिश पुरैिनयो उपिट गेल। बीचमे जे पािन, ओहीमे पुरैिनक गाछ रहए, मुदा
जँघ भिरसँ उपरे गािद। पैसब महा-मोसिकल। पाएर दइते सरसरा कऽ जँघ भिर
गिड़ जाइत। के जान गमबए पैसत। िनराशाक जगलमे ं डोमन बौआ गेल। मनमे
हुअए लगलै जे जिहना गामक लोक चिल गेल तिहना हमहूँ चिल जाएब। जािन कऽगामक िजनगी 15
परानो गमाएब नीक निह। िजनगी बचत, समए-साल बदलतै तँ फेर घुिर कऽ आएब
निह तँ कतौ मिर जाएब। जिहना गामक सभ कुछ िबलिट गेल,  समाजक लोक
िबलिट गेल, तिहना हमहूँ िबलिट जाएब।
पितकँ िचिĠतत देिख सुिगया पुछलक- ‘‘िकछु होइए?  एना िकअए मन खसल
अिछ?’’
पिėक Ćķ सुिन डोमन आँ िख उठा कऽ देिख पुनः आँिख िन्चँ कऽ लेलक।
आँिख िन्चँ किरतिह सुिगया दोहरा कऽ पुछलक- ‘‘मन-तन खराब अिछ?’’
नजिर उठा डोमन उþर देलक- ‘‘तन तँ निह खराब अिछ मुदा तनेक दुख देिख
मन सोगाएल अिछ। जइ आशापर अखन धिर खेपलहुँ ओ तँ चिलये गेल। जे
अिगलोक कोनो आशा निह देखै छी। की करब आब?’’
सुिगया- ‘‘अपना केने िकछु ने होइ छै। जे भगवान जनम देलिन,  मुँह चीड़ने
छिथ अहारो तँ वएह ने देताह। तइ लेल एþे िचĠता िकअए करै छी?’’
डोमन- ‘‘गामक सभ कुछ िबलिट गेल। एहेन सुĠदर गाम छल, सेहो उपिट रहल
अिछ। िसफ् मािट टा बँचल अिछ। की मािट खुिन-खुिन खाएब? िबना अž-पािनक
काए िदन ठाढ़ रहब?’’
 ‘‘िचĠता छोड़ू। जिहया जे हेबाक हेतै से हेतै। अखन तँ पािनयो अिछये आ
अžो अिछये। जाधिर एिह धरतीपर दाना-पानी िलखल हएत ताधिर भेटबे करत।
जिहया उिठ जाएत तिहया ककरो रोकने रोकेबै। तइ लेल एþे िचĠता िकअए करै
छी।’’
किह सुिगया भानसक ओिरयान करए लागिल। पėीक बात सुिन डोमन मने-मन
सोचए लगल जे हमरा तँ मरैयोक डर होइए मु दा ओकरा कहँ होइ छै। ओ तँ
मरइयो लेल तैयारे अिछ। फेर मनमे उठलै जे जीवन-मृĜयुक बीच सदासँ सघष् ं होइत
आएल अिछ आ होइत रहत। तिहसँ पाछू हटब कायरता छी। जे मनुįय कायर अिछ
ओ कोन िजनगीक आशामे अनेरे दुिनयँकँ अजबारने अिछ। पुनः अपना िदश
तकलक। अपना िदश तिकतिह मनमे एलै जे जीबैक बाट हरा गेल अिछ। तँ एते
िचĠता दबने अिछ। तमाकुल चुना कऽ मुँहमे लेलक। तमाकुल मुँहमे लइते अपन
माए-बापसँ लऽ कऽ पिछला पुरखा िदिश घोड़ा जेकँ नजिर दौड़लै। मुदा कतौ ुकलै
निह। जाइत-जाइत मनुįयक जिड़ धिर पहुँिच गे ल। पुनः घुिम कऽ आिब नजिर माए
लग अटिक गेलै। मन पड़लै माएक सगं िबतौलहा िजनगी। मन पड़लै माइयक ओ
बात जे दस बख्क अवİथामे रौदी िबतौने छल। रौदी मन पिड़तिह बड़की पोखिरक
िबसँढ़ आ अĠहै मँछ आँ िखक सोझमे आिब गे लै। कने काल गुĦम भऽ मन पाड़ए
लगल।  
मन पड़लै, अही पुरैिनक जिड़मे तँ िबसँढ़ो फड़ैत अिछ। अŎुए जेकँ। जिहना
मािटक तरमे अŎुआक िसरो आ अŎुओ रहै छै तिहना पुरैिनक जिड़मे िसरो आ
िबसँढ़ो रहैत अिछ। अनायास मुँहसँ िनकललै- “बाप रे,  बाबन बीघाक पोखिरमे तँ
कते ने कते िबसँढ़ हेतै। ओकरे खुनैमे माछो भेटत। खािध बना-बना िसही ं -मंगुर16 जगदीश Ćसाद मěडल
रहैए। एक पथं दू काज। मनमे खुशी अिबते पėीकँ सोर पािड़ कहलक- ‘‘भगवान
बड़ी टा छिथन। जिहना अरबो-खरबो जीव-जतु कँ ं जĠम देने छिथन तिहना ओकर
अहारोक जोगार केने छिथन।’’
पितक बात सुिन सुिगया अकबका गेल। बुझबे ने केलक। मुँह बािब पित िदिश
देखैत रहलीह। पुनः डोमन कहलक- ‘‘चुिŎ िमझा िदऔ। घुिर कऽ आएब तखन
भानस करब।’’
पितक उĜसाह देिख सुिगया मने-मन सोचए लगली जे मन ने तँ सनिक गेलिनहँ।
अखने मुरदा जे कँ पिनमु छलाह। आ लगले की भऽ गेलिन। दोसर बात परखैक
िखयालसँ चुप-चाप ठाढ़ रहली।
डोमन फेर बाजल- ‘‘की कहलॱ ? पिहने आँच िमझा िदऔ। फटक लगा िछņा
लऽ कऽ सगे ं चलू।’’
सुिगया पुछलक- ‘कþऽ।’
‘‘बड़की पोखिर।’’
‘िकअए?’
‘‘एहन-एहन सइओ रौदी कटैक खेनाइ पोखिरमे दाबल अिछ। आनैले चलू।’’
सवाल-जबाव निह कऽ सुिगया आिग पझा,  फटक लगा िछņा लऽ तैयार
भेिल। घरसँ कोदािर िनकािल डोमन िबदा भेल। आगू-आगू डोमन आ पाछु-पाछु
सुिगया। बड़की पोखिरक महारपर पहुँिच डोमन हाथक इशारासँ पėीकँ देखबैत
बाजल- ‘‘जते पोखिरक पेट सुखल अिछ ओिहमे तते खाइक वİतु गड़ाएल अिछ जे
ने खाइक कमी रहत आ ने पीबैक पािनक। जेना-जेना पािन सुखैत जेतै तेना-तेना
कुपकँ गहॴर करैत जाएब। जते पुरैिनक गाछ सुखाएल अिछ ओिहमे घु रछा जेकँ
िबसँढ़ फड़ल हएत।’’
पोखिर धँिस डोमन तीन डेग उþरे-दिछने आ तीन डेग पूबे पिछमे नािप कोदािरसँ
चेĠह देलक। एक धुर। उþरबिरया पूबिरया कोनपर कोदािर मारलक। मािट तते
सĸत जे कोदािर धँसबे ने कएल। दोहरा कऽ फेर जोरसँ कोदािर मारलक। कोदािर
फेर नै धँसल। आगू िदिश देिख िहयाबए लगल जे िकछु दूर आगूक मािट नरम
हएत। खुनैमे असान हएत। मनक खुशी उफिन कऽ आगू खसल- ‘‘अए ढ़ोरबा माए,
हम पुुख निञ छी। देिखयौ हमरा मािट गुदानबे ने करैए। अहँ हमरासँ पिनगर छी,
दू छअ मािर कऽ देिखयौ।’’
सुिगया- ‘‘हमर चूड़ी-साड़ी पहीर िलअ आ हमरा धोती िदअ। तखन कोदािर
पािड़कँ देखा दै छी।’’
मुİकी दैत दुनू आगू मुँहे ससरल। एक ल्गा आगू बढ़लापर मािट नरम बुिझ
पड़लै। कोदािर मािर कऽ देखलक तँ मािट सहगर लगलै। एक धुर नािप डोमन
खुनए लगल। पिहले छअमे एकटा िबसँढ़क लोली जगलै। लोल देिखतिह उछिल कऽ
बाजल- ‘‘हे देिखयौ। यएह छी िबसँढ़।’’
सुिगया- ‘‘लोल देखने निञ बुझब। सौँसे खुिन कऽ देखा िदअ।’’ गामक िजनगी 17
पėीक बात सुिन डोमनकँ हुअए लगल जे हो न हो कहॴ अधेपर सँ ने किट
जाए। से निह तँ लोल पकिड़ डोला कऽ उखािड़ लै छी। मुदा नै उखड़ल। कने
हिट दमसा कऽ दोसर छअ मारलक। छअ मािरतिह एक बीतक देखलाहा आ चािर-
चािर ओगरीक ं दूटा आरो देखलक। तीनूकँ खुिन दुनू परानी िनङहािर-िनङहािर देखए
लगल।
उĔजर-उĔजर। नाम-नाम। लिठआहा बँस जेकँ गोल-गोल,  मोट। हाथी दँत
जेकँ िचĸन, बीत भिरसँ हाथ भिरक। पाव भिरसँ आध सेर धिरक।
सुिगया िदिश नजिर उठा कऽ डोमन देखलक तँ पचास वष्क आगूक िजनगी
बुिझ पड़लै। पित िदिश नजिर उठा कऽ सुिगया देखलक तँ चूड़ीक मधुर İवर आ
चमकैत मंगक िसनदुर देखलक।’’
िछņा भिर िवसँढ़ आ सेर चािरएक िसही ं माछ ने ने दुनू परानी िवदा भेल।

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