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गुरुवार, 31 मई 2012

दूटा पाइ


दूटा पाइ

हलहोिरमे फेकुओ िदĪलीक रैलीमे जाइक िवचार केलक। परसू सौझुका गाड़ी सभ
पकड़त। िदĪलीक लƂडूक बात फेकुआकँ बुझल। तँ खाइक मन रहै। अबसर
भेटल छलै। िकएक तँ ने गाड़ीमे िटकट लागत आ ने सगबेक ं कमी। माÿ चािर
िदनक खेनाइ टा अपन खच्। गाड़ीमे लोक बेसी खाइतो निह अिछ िकएक तँ पेशाब-
पैखानाक समİया रहै छै। फेकुआ माएकँ कहलक- ‘‘माए,  परसू िदĪली जेबउ।
बटखरचाक ओिरयान कऽ िदहँ?’’
माए बाजिल- ‘‘की सभ लेबही?’’
फेकुआ कहलक- ‘‘दू सेर चूड़ा लऽ कऽ डाॅ्टर सहाएब नागं Ɩ जी चलैले
कहलिखनहँ। हमरो दू सेर चूड़ा कूिट िदहँ।’’
फेकुआक बातक िवĂास माएकँ निह भेलै। मने-मन सोचलक जे दू सेर चूड़ा तँ
एक िदनमे लोक खाइत अिछ। चािर िदन कोना पुरतै? फेर मनमे एलै जे दू सेर
चूड़ो आ चािर-दुना आठटा रोिटयो पका कऽ दऽ देबै। कहुना भेलै तँ रोटी िसŀ अž
भेलै।
गाड़ी अबैसँ पिहनिह जुलूसक सगं फेकुआ İटेशन पहुँचल। िजनगीक पिहल िदन
फेकुआ गाड़ीमे चढ़त। Ģलेटफाम्पर भीड़ देिख फेकुआक मन घबड़ेबो करै आ उĜसाहो
जगै जे एþे लोक चढ़त से हेतै आ हमरा बुþे की निह चिढ़ हएत। िनरमली-सकरीक
बीच छोटी लाइन। गािड़यो छोटिकये। मुदा सकरीसँ िदĪलीक लेल गािड़यो बड़की आ
लाइनो बड़की। गाड़ीमे चिढ़ फेकुआ सकरी पहुँचल। िदĪलीक गाड़ी लगले रहै। हँइ-
हँइ कऽ िनरमलीक गाड़ीसँ उतिर िदĪलीवाली गाड़ीमे सभ चढ़ल। गाड़ी खुजल।
ओना सकरीसँ िदĪली जाइक लेल चौबीस घटा ं लगैत। मुदा आइ से निह भेल।
चालीस घटामे ं पहुँचल। मुदा चालीस घटा ं कोना बीतल से फेकुआ बुझबे ने के लक।
हलहोिरयेमे पहुँिच गेल। ने एĸो बेर खेलक आ ने पािन पीलक। मुदा तैयो भु ख
बुिझये ने पड़ए। गाड़ीसँ उतड़ै काल फेकुआ िखड़की देने Ģलेटफाम् िदिश तकलक,
जेरक-जेर िसपाही घुमैत। मुदा फेकुआक नजिर कतौ निह अँटिक, मोटका िसपाहीपर
अँटकल। ओकर मनही पेटपर नजिर गेलै। तइ परसँ छअ आगुरं चाकर ललका
बेĪट। जे बेर-बेर िन्चँ ससरैत। चािन परसँ पसीनाक टघार। दस िकलोक बĠदुक
काĠहमे लटकल। मुदा तखने नागेĠƖ जी सेहो अपन छबो सगीकं सगं हाथसँ सभकँ
उतड़ैक इशारा दैत। धड़फड़ा कऽ फेकुओ उतड़ल।
Ģलेटफाम् टिप जहँ फेकुआ मुसािफर खाना Ćवेश करए लगल आिक मिमऔत
भायपर नजिर गे लै। मिमऔत भाय रतना चिरपिहया गाड़ीक Ƒाइवर। अपना मािलककँ34 जगदीश Ćसाद मěडल
गाड़ी पकड़बैले आएल। भायपर नजिर पिड़तिह फेकुआ गोर लगलक। गोर लािग
लालिकला मैदान िदसक राİता धेलक। पाछूसँ झटिक कऽ आगू बिढ़ रतना फेकुआसँ
घरक कुशल पू छलक। कुशलक जबाब निह दऽ फेकुआ कहलक- ‘‘कािŎ सँझ धिर
लाल िकला मैदानमे रहब तँ ओतै अिबहह। अखैन नै ुकबह।’’
‘‘कनी चाहो पीिब ने ले?’’
‘‘नै अखैन कुछो नै पीबह।’’
फेकुआ बिढ़ गेल। मुदा रतनाकँ पाछू घुमैक डेगे ने उठै। फेकुए िदिश तकैत।
मने-मन िवचारए लगल जे हो न हो कािŎ भँट निह हुअए। ओþे लोकमे के कþऽ
रहत तेकर कोन ठीक। तहूमे सौझुका बात कहलक। िदĪली िछऐ। कोन ठीक जे
िबजलीक इजोत रहतै की निह। एþे लोकमे तँ िदनोमे अĠहरायले रहत। एĸो िदन
मेजमािनयो ने करौिलऐ। गाममे दीदी सुनत तँ की कहत ? ओ की कोनो िदĪलीकँ
िदĪली बुझैत हएत। ओ तँ गामे जेकँ बुझैत हएत। जिहना गाममे सभकँ सभ िचĠहै
छै तिहना। मुदा ई तँ िदĪली छी। भाड़ाक एक कोठरीमे सोहर गाओल जाइत छैक
आ दोसरमे कžारोहट होइ छै। िविचÿ िİथितमे रतना पिड़ गेल। आइ धिर रतनाक
बुिŀपर एहन भार किहयो निह पड़ल। एकाएक मनमे एलै जे कौŎुका छुņी लऽ कऽ
भोरे फेकुआक भँ ट करब। भँट भेलापर लालिकला, जामा मिİजद देखा देबै।
दोसर िदन भोरे रतना फेकुआक भँट करै िबदा भे ल। लाल िकला मैदान पहुँचते
भँट भऽ गेलै। भँट होइतिह दुनू भाइ गामेक बिसया रोटी खा पािन पीलक। भिर िदन
सगे ं , रैली समाĢत कऽ दुनू गोटे डेरापर आएल। पैघ सेठक Ƒाइवर रतना, तँ डेरो
नीक। सभ सु िवधा। मुदा रतनाक डेरासँ फेकुआक मनमे खूब खुशी निह भेलै । मन
पिड़ गेलै माइक ओ बात जे सिदखन बजैत- ‘‘अनकर पहीिर कऽ साज-बाज छीिन
लेलक तँ बड़ लाज।’’  अपना जएह रहए ओिहसँ सबुर करी। मुदा माइयक बात
फेकुआक मनमे बेसी काल निह अँटकल। िकएक तँ तीन िदनसँ नहाएल निह छल।
जिहसँ देहमे लĔजितये ने बुिझ पड़ै। रतनाकँ कहलक- ‘‘भैया, पिहने हम नहेबह।
िबना नहेने मन खनहन नै हएत। ओना ओिघयो ं लागल अिछ। तँ नहा कऽ खेबह आ
भिर मन सुतबह।’’
फेकुआकँ रतना बाथ ुम देखा देलक। िबजली जरैत। पािन चलैत बाथ ुम
देखा रतना गैस चुिŎ पजािर भानस करए लगल। भिर मन फेकुआ नहाएल। मन
शाĠत भेलै। मनमे उठलै जखन िदĪली आिब गेलहुँ तँ िकछु लैये कऽ जाएब। रतना
लग आिब बैसल। भानसमे देरी देिख रतना कहलकै- ‘‘बौआ देखही, ई िदĪली िछऐ।
ऐठाम लोक सोलह-सोलह घटा ं खटैत अिछ। दरमाहाक सगं ओभरटाइमोक पाइ भेटै
छै। मुदा िजनगी जीबैक लुिर निह रहने सभ चिल जाइ छै। ने गामक कज्सँ मुि्त
होइ छै आ ने अही ठाम चैनसँ रहैत अिछ। भुतल्गु जेकँ सिदखन बुिझ पडै़त छै।
तोरा एिह दुआरे किह दै िछऔ जे तूँ अपन छोट भाए िछयँ।’’
रतनाक बात सुिन कने-काल गुम रिह फेकुआ कहलक- ‘‘भैया, तूँ सभ तरहे पैघ
छह। जखन तोरा लग छी तँ तँही ने हमर नीक-बेजाए बुझबहक।’’ गामक िजनगी 35
फेकुआक बातसँ रतनाकँ अपन िजĦमाक भार बुिझ पड़लै। बाजल- ‘‘देखही
बौआ,  अखन जे कहिलऔ से İटील फै्Əीक İटाफक बात कहिलऔ। मुदा सभ
एहने अिछ सेहो बात निह छै। एहनो लोक अिछ जे अपन मेहनत आ लुिरसँ गरीब
रिहतो अमीर बिन गेल। अपने इलाकाक ढ़ोरबा छी। जेकरा हम तँ ढ़ोरबे कहै िछऐ
मुदा ओ ढोढ़ाइ बाबू बिन गेल। जखन गामसँ आएल तँ बौआ-ढहना कऽ चािर िदनक
बाद ऐठीन आएल। ओकरा शैलूनमे नोकरी लगा देिलऐ। िकछु िदन तँ काज करै मे
लाज होए। िकएक तँ ओ धानुक छी। मुदा िकछुए िदनक पछाित तेहेन हाथ
बैिस गेलै जे नौओ कऽ उžैस करए लगल। अपनो खूब मन लगए लगलै। दरमहो
बिढ़ गेलै। तीन सालक बाद जेना ओकरा ऐठीनसँ मन उचिट गेलै। सोचलक जे
जखन लुिर भऽ गेल अिछ तखन कतौ कमा कऽ खा सकै छी। से निह तँ गामेक
चौकपर दोकान खोलब। अपना जँ दू पाइ कĦमो हएत तइसँ की, समाजक उपकार
तँ हेतै। सएह केलक। ले बलैया, गामक लोक िकयो ठाकुर तँ िकयो नौआ तँ िकयो
हजमा कहए लगलै। घरक जिनजाितकँ नौआइन कहए लगलै। सभसँ दुखद घटना
तखन भेलै जखन कथा-कुटुमैती आ जाितक काजसँ अलग कएल गेलै। मुदा
ओहो कम्-योगी। गामकँ Ćणाम कऽ अपन पिरवारक सगं िदĪली शहर चिल आएल।
वाह रे वनक फूल,  ऐठाम आिब कऽ अपन शैलूनक कारोबार ठाढ़ कऽ लेलक।
छह टा İटाफ रखने अिछ। बिहनीक िबआह इजीिनयरसँ ं केलक। हमहूँ िबआहमे
रिहऐ।’’
फेकुआ बाजल - ‘‘हमरो कोनो लाज-सरम नै हएत। जे काजमे लगा देबह, हम
पाछु नै हटबह।’’
रतना- ‘‘परसू रिव िछऐ। हमरो छुņी रहत। ताबे दू िदन अरामे कर।’’
फेकुआ- ‘‘हमरा ओते सुतल नीक नै लगतह। चिल जेबह बुलैले।’’
रतना- ‘‘रौ बुिड़बक! गाममे लोक िखİसा कहै छै जे फĪलं तेहेन कािबल छै जे
एĸे पाइमे बेिच लेतउ। मुदा अइठीन सभ कािबले छै। तं देखिबही जे अइठीन सभसँ
पैघ कारबार मनु ्खेक खरीद-िबƅीक छैक। देहाती बुिझ कोइ ठिक कऽ बेिच लेतउ।
कहतौ जे हवा-जहाजक नोकरी धड़ा देबउ आ चिल जेमए आन देश।’’
रतनाक बात सुिन फेकुआ षुĤध भऽ गेल। मुदा मनमे एलै जे जेना हम बेदरा
रही तिहना भैया कहैए। मुदा िकछु बाजल निह। दम सािध कऽ रिह गेल।
तीन िदनक उपराĠत फेकुआ कपड़ा िसलाइक दोकानमे काज शुु केलक। दू
हजार ुपैया दरमाहा। िभनसर छअ बजेसँ राित नअ बजे धिरक डयूटी। बीचमे एक
बेिर अधा घटा ं जलखै करैले आ एक घटा ं खाइ बेर छुņी। फेकुआक मनमे उठल जे
Ƃयूटी तँ बीसो घटा ं कऽ सकै छी मुदा सुतैक जे आठ घटा ं छै से कना पुरत। मुदा
फेर मनमे एलै जे जखन दू पाइ कमाए चाहै छी तखन तँ सभ सुख-भोग कमबए
पड़त। दोकानमे आठटा कारीगर। आठो नोकरे। फेकुआ अनारी, तँ दोकानक झाड़-
बहारसँ काज शुु केलक। कपड़ा काटब आ िसलाइ मशीन चलौनाइ सेहो कने-कने
सीखए लगल।36 जगदीश Ćसाद मěडल
दुइये माए-बेटा फेकुआ। दस साल पिहनिह बाप मिर गेल। अपने िदĪली धेलक
आ माए गाममे। मुदा माइयो थेहगिर। पुुखे जेकँ बोिन-बुþा करै त। नोकरी होइतिह
फेकुआकँ माए मन पड़लै। माइये निह गामो मन पड़ल। मन पड़ल गामक İमृित।
माइक ममता जिग मनकँ खोरए लगलै। मनमे उठए लगलै-  परदेिशयाक पिरवारमे
गेटक-गेट कपड़ा.....रािश-रािशक चीज-बौस.. रेिडयो, घड़ी, टी. वी, मोबाइल इĜयािद।
ककरा निह नीक वİतुक सेहĠता होइ छै। मु दा ओहन िसहĠते की जेकरा पुरबैक
ओकाितये ने रहै। दू हजार महीना ुपैआक गरमी फेकुआक मनमे तरे-तर चिढ़ गेल।
कोना निह चढ़ै त?  मुदा आमदिनयेक गरमी चढ़ल,  खच्क पािन परबे ने कएल।
सोचलक जे सभसँ पिहने माएकँ िचŇी िलिख जना िदऐ।
आठ िदनक बाद फेकुआ रतनाकँ कहलक- ‘‘भैया,  हमरा तँ िलखल-पढ़ल नै
होइए। मुदा जखन नोकरी लािग गेल तँ माएकँ जनतब देब जुरी अिछ। िकएक तँ
ओकरा होइत हेतै जे कþऽ बौआइ-ढ़हनाइए। रतनोक मनमे जँ चल। वी. आइ. पी.
बैगसँ पोİट-काड् िनकािल रतना िचŇी िलखैले तैयार भेल। पुछलक- ‘‘बाज की सभ
दीदीकँ िलखबीही?’’
फेकुआ िलखबए लगल-
İथान- िदĪली
ता.- ०५.०६.२००७
माए,
गोर लगै िछऔ
भगवानक दया आ तोरा सबहक असीरवादसँ तेहेन नोकरी भेटल जे किहयो
मनमे नै आएल छल। दू हजार ुपैआ महीनाक तलब। अपना कते खच् हएत।
जे उगड़त से मासे-मास पठा देबउ। बेङबा कĸाकँ किहअिन जे िचमनीपर जा
कऽ ंटाक दाम बुिझ अबैले। पिहने घर बना लेब। अपना चापा-कलो नै छौ,
सेहो गड़ा लेब। घरक आगू जे मिलकाबाक चौमास छै, ओहो कीिन लेब।
तोहर फेकुआ
सात बजे िभनसर। मेघौन समए। कखनो कऽ सुुज देिख पड़ैत आ फेर झपा
जाइत। िझिहर-िझिहर पुरबा हबा चलैत। पान-छअ गोटेक सगं फेकुआक माए
रामसुनिर धन-रोपनी करए िबदा भेिल। िकछुए आगू बढ़लापर डाक-Ģयूनकँ देखलक।
मुदा आन İÿीगण जेकँ रामसुनिर निह जे िदनमे दू बेर मोबाइलसँ तीन पžाक िचŇीे
आ तइ परसँ जे समिदया भेटल ओकरा िदया समाद पठौत। मनमे कोनो हलचल
निह। रामसुनिरक आगूमे आिब हँसैत डाकĢयून कहलक- ‘‘काकी,  फेकुआक िचŇी
एलौहँ।’’ किह झोरासँ िनकािल पोİट काड् देलक। छबो İÿीगण डाकĢयूनकँ चाुगामक िजनगी 37
भागसँ घेिर कऽ ठाढ़ भेिल। हाथमे पोİट-काड् अिबतिह रामसु निरक मन िबहािड़मे
उड़ैत ओिह सुखल पात जेकँ जे सरगोिलया ं उिठ अकासमे उड़ैत, तिहना उिड़ गे ल।
िजनगीक पिहल पÿ। मनमे एलै जे पिहने ककरोसँ पÿ पढ़ा ली। ओना डाकĢयून
लगमे सँ चिल गेल। मुदा तेकर अफसोस निह भेलै। िकएक तँ जाधिर Ģयून लगमे
छल ताधिर पÿ पढ़ेबाक िवचार मनमे आएलो निह छलैक। फेर मनमे एलै जे काज
कामै नै करब। अखन खूँटमे बािĠह कऽ रिख लै छी आ जखन िनचेन हएब तखन
पढ़ा लेब। सएह केलक।
गोसँइ डुबैत रामसुनिर िनचेन भेिल। िनचेन होइतिह िचŇी पढ़बै लऽ Įयाम
ओिहठाम िबदा भे िल। Įयामोक घर लगे। पोİट-काड् हाथमे लऽ Įयाम सĜयनारायण
कथा जेकँ पढ़ए लगल। मुदा दोसरे पँती-  दू हजार ुपैआ मिहना तलब-  मे
रामसुनिर ओझरा गेिल। मने-मन सोचए लागिल जे छौँड़ाकँ घरक सोह एलै। बुिŀयो
फुटैक उमेर भेल जाइ छै। आब किहया चेतन हएत। अिगला साल तक िबआहो
कइये देबै। असकरे राकश जेकँ अगनामे ं रहै छी। लगले िवचार बदिल गेलै।
बुदबुदाए लागिल- कोना लोक कहै छै जे मसोमातक बेटा दुइर भऽ जाइ छै। िवचारमे
डूबल रामसुनिर। तिह बीच Įयाम बाजल- ‘‘सभ बात बुझिलऐ ने काकी?’’
Įयामक पुछबसँ रामसुनिरक भĸ खुजल। बाजिल- ‘‘बौआ,  िचŇी पढ़ल भऽ
गेलह। की सभ छौड़ा िलखने अिछ?’’
काकीक मनक बात निह बुिझ Įयाम खॱझा गेल। मुदा िकछु बाजल निह।
िचŇीकँ िन्चँमे रिख Įयाम ओिहना मुँहजबािनये कहए लगलिन। मुदा पोİट-काड्कँ
िन्चँमे राखल देिख बेचारी रामसुनिरकँ भेलै जे अपने िदिशसँ कहैए। जािहसँ िवĂासे
ने भेलै। मुदा झगड़ो करब उिचत निह बुझलक। िकएक तँ बेटाक पिहल िचŇी छी
तँ अशुभ ĭयवहार नीक निह।
दोसर िदन एकटा पोİटकाड् कीिन रामसुनिर िचŇी पढ़बैयो आ िलखबैयो लेल
सोहन ऐठाम गेिल। दुनू पोİटकाड्-  िलखलहो आ सौदो-  रामसुनिर सोहनकँ दैत
कहलक- ‘‘बौआ, पिहने पिढ़ कऽ सुना दएह। तखन िलिखयो िदहह।’’
पÿ पिढ़ कऽ सोहन सुना देलकिन। समाचार सुिन रामसुनिरक मन खुशीसँ
उĜसािहत भऽ गे लै। बाजिल- ‘‘बौआ आब िचŇी िलिख िदयौ। सोहन िचŇी िलखए
लगल-
परमानपुर
ता. ०३.०७.२००७
फेकू।
असीरवाद।
अखन हम अपने थेहगर छी तँ हĦमर िचĠता जुिन कर। रहैले घरो
अिछये। एक घैल पािन इसकूल बला कल परसँ लऽ अबै छी वएह भिर िदन38 जगदीश Ćसाद मěडल
चलैत अिछ। तँ पािनयोक िदĸत निहये अिछ। नहाइले धारो आ पोखिरयो
अिछ। किहयो-काल बरखोमे नहा लै छी। तँ अइ सभले तूँ िचĠता िकए करै
छँ?  अखन खाइ-खेलाइक उमेर छौ। तँ कमा कऽ जे मन फुड़ौ से किरहँ।
अिगला साल धिर अिबहँ, िबआहो कऽ देबउ। असकरे अगनामे ं नीक नै लगैए।
माए, रामसुनिर
साल भिर बीित गेल। जिहना गाममे रामसुनिर अपना काजमे हेरा गेिल तिहना
िदĪलीमे फेकुओ। साले भिरमे फेकुआ कपड़ा िसलाइक कारीगर बिन गेल। अपना
देहक कपड़ा-लþा कीनैत-कीनैत फेकुआक सालो भिरक दरमाहा सिठ गेल। माइक
िजनगी तँ जिहनाक तिहना रहल मुदा फेकुआक िजनगीमे बदलाब आएल। दुĤबर-दानर
फेकुआ फुिट कऽ जुआन भऽ गेल। कपड़ा िसआइक लुिर भे ने आĜमबलो मजबूत
भेलै। मुदा गामक िजनगी आ िदĪलीक िजनगीक बीचक सघष् ं फेकुआक मनमे
चिलतिह रहल।
रिव िदन। रतनो आ फेकुओक छुņी रहै। सुित उिठ दुनू मिमयौत-िपिसयौत
िवचारलक जे साल भिरसँ बगेरी निह खेलहुँ। से निह तँ आइ बगेिरये आनब। तिह
बीच रोडपर देखलक जे पुिलसक गाड़ी इĦहरसँ ओĦहर कऽ रहल छै। दुनू भँइकँ
कोनो भँजे निह लगै। कोठरीसँ िनकिल रतना चाहबलासँ पुछलक। चाहबलासँ भँज
लगलै जे महĪलासँ एकटा जुआन लड़की आ एकटा सेठक बेटाक अपहरण राितमे भऽ
गेलै। समाचार सुिन दुनू भँइ डरा गेल। बगेरीक िवचार छोिड़ गामक गप-सĢप करए
लगल।
रतना बाजल- ‘‘बौआ, तोरा साल लिग गेलह। एक बेर गाम जा सभक भँट केेने
आबह।’’
गामक नाम सु िनतिह फेकुआक मन उिड़ कऽ दोसर दुिनयँ पहुँिच गेलै। मन
पड़लै- िचमनीक ंटा....चापाकल....घरक आगूक चौमास। मन गामक सीमापर अटिक
गेलै। सीमा परसँ अगना ं पहुँचै क साहसे ने होए। िकएक तँ बाटेपर माएकँ ठाढ़ भेल
देखए। की कहैत हएत माए ? साल भिर भऽ गेलै, ने एĸोटा पाइ पठौलक आ ने
एĸो खěड साड़ी। किहयो काल जे अİसक पड़ैत हएत तँ के दवाइयो आिन कऽ
दैत हेतै। पौुकँ जे िचŇी आएल, तइ िदनसँ दोसर िचिŇयो ने आएलहँ। हमहूँ तँ
निहये पठौिलऐ। छु्छे िचिŇये िलखने की हेतै। मने-मन बुिढ़या सरापैत हएत। कहैत
हएत जे छॱड़ा ढ़हलेलक ढ़हलेल रिहये गेल। मुदा हमहॴ की करब ? छु्छे हाथे
गामे जा कऽ की करब ? िटकटो जोकर पाइ निञ अए। िचĠता आ सोगसँ फेकुआक
मन दबा गेल। कोनो बाटे ने सुझैत। मनक भीतर िबरड़ो उिठ गेलै। िबरड़ोक हवामे
फेकुआक मन सॲगक तरसँ िनकिल गेल। मनमे एलै जे गाम तँ गाम छी। जिहठाम
लोक माघक शीतलहरी आिग तािप कऽ कािट लैत अिछ। िबना कĦमल-सीरकक जाड़
िबता लैत अिछ, गाछ तर जेठक रौद कािट लैत अिछ। मुदा िदĪलीमे से हएत ? गामक िजनगी 39
साल भिरक कमाइ साल भिरक मौसमक अनुकूल कपड़ेमे चिल गेल। निह लैतहुँ तँ
सेहो निह बनैत। लेलहुँ तँ गाम छुिट गेल। जिहना घनघोर बादलक फँटसँ सूय्क
रोशनी िछटकैत, तिहना फेकुओक मनमे भेल। रतनाकँ कहलक- ‘‘भैया, एकटा िचŇी
िलिख दएह।’’
लगेमे रतनाकँ सभ कुछ छलै। पोİट-काड् िनकािल िलखैले तैयार भेल। फेकुआ
िलखबए लगल-
िदĪली
ता. ११.०८.२००८
माए,
गोड़ लगै िछऔ।
मनमे बहुत छल हेतौ जे तोरो बेटा िदĪलीमे नोकरी करैत छौ। मुदा सभ
हरा गेल। िसफ् एĸेटा चीज बँचल जे ऐठाम–-िदĪलीसँ, ओइठाम-गाम धिर जीबैक
रİता धरा देत। तँ खुशी अिछ। हाथ खाली अिछ। गाम कोना आएब?
फेकुआ
चािरये िदनमे िचŇी माएक हाथ पहुँचल। िचŇी हाथमे अिबतिह रामसुनिर
िनङहािर-िनङहािर देखए लगलीह। छौँड़ा कतौ अिछ जीबैत तँ अिछ। बेटा धन छी।
कतौ रहह। आब तँ फुिट कऽ जु आन भऽ गेल हएत। जिहना चाह-पान खा-पी बड़का
लोकक धोिध फुिट जाइ छै,  तिहना तँ फेकुओकँ भेल हएत। िकएक तँ ओहो ने
चाह-पान खाइत-पीबैत हएत। गोराइयो गेल हएत। मोछो-दाढ़ी भऽ गेल हेतै। जिहना
भगवान घरसँ पुुख उठा लेलिन, तिहना तँ फेिर दैयो देलिन। जुआन बेटापर नजिर
पहुँचतिह रामसुनिरक मन खुशीसँ नािच उठलै। मने-मन बुदबुदाए लगलीह- दस बख्सँ
घरमे पुुख निञ छल तँ की कोनो पुुखक घरसँ हमर घर अधला चलल। सतोषे ं
गाछमे मेबा फड़ैत छै। परसुका बात मन पड़लै। चाहक दोकानपर परसू पडी ं जी
कहैत रहिथन जे अइ बेर शुुहे अगहनसँ घन-घनौआ लगन अिछ। हमहूँ फेकुआक
िबआह कइये लेब। िबआह मनमे अिबते सोचलक जे बहुत िदनसँ पँच गोटेक अगनामे ं
हाथो नै धुऐलॱ। सेहो कइये लेब। समाजक भोजमे तँ नै सकब मुदा जहँ धिर
सकड़ता हएत, तइमे पाछुओ नै हटब। लोक ई नै बुझै जे मसोमातक बेटाक िबआह
होइ छै। डफरा-बौसली हवागाड़ी सेहो लइये जाएब। अनका जेकँ एक ढ़िकयाक मुँह
नै पसारब। अपना बेटी-जमाएकँ जे देत से देत। हम िकए मंिगऔ। जे आदमी पोिस-
पािल कऽ एकटा मनु्ख देबे करत तेकरासँ फेर की मिगऔं ? िकछु निञ मगबै। ं लुिर
रहत तँ कामधेनु बना कऽ राखब निह तँ मािटक मुुत रहत। एकाएक रामसु निरक
नजिर िचŇीपर पहुँचल। पोİट-काड् िनकािल िहयािस-िहयािस देखए लगलीह। फुटा-
फुटा किरया अषर तँ निह बुझैत मुदा कृįण जे कँ कारी मुुत जुर बुिझ पड़ैत।40 जगदीश Ćसाद मěडल
िचŇी पढ़ाबै लऽ रामसुनिर िबदा भेिल। अगनासँ ं िनकिलतिह मनमे उठलिन आब की
कोनो पिहलुका जेकँ लोककँ बारह बख् किटया सोĠहबए पड़ै छै। आब तँ साले
भिरमे लोककँ िधया-पूता भऽ जाइत छैक। कहुना भेल तँ हमरो फेकुआ शहरे-बजारक
भेल की ने। एते बात मनमे अिबतिह मुँहसँ हँसी िनकलल। असकरे। तँ कानकँ सुनै
दुआरे तेना रामसुनिर जोरसँ बजैत जेना दोसरकँ कहैत होइ। फुिसओहोक बेटी युग
िजतलक। भाग तँ मुँह-कान नीक निञ छै। निञ तँ युगमे भूर करैत। िबआहक
आठमे मासमे बेटी भऽ गेलै। ई तँ धĠयवाद एिह समाजकँ दी जे एक सूरे सभ बाजल
जे सतमसु आ ब्चा िछऐ। जँ एना िबआहक िवदागरीमे हएत तँ केहे न होएत? मुदा ओ
ब्चा सतमसुआ निह। समाज झूठो बािज ओकरा सतमसुआ ब्चाक पालन-पोसनसँ
बचेलक।
रिवक दरबĔजा लग अिबतिह रामसुनिरक नजिर िचŇीपर पहुँचल। रिव
दरबĔजेपर बैिस िकछु िलखैत छल। रामसुनिरकँ लग अिबतिह रिब उिठ कऽ चौकीपर
बैसबैत पुछलक- ‘‘काकी फेकू भाइक िबआह किहया करबीही ?  हमहूँ बिरआती
जेबउ ?’’
रिवक बात सु िनतिह रामसुनिरक मन बृĠदाबनक रास लीलापर पहुँिच गेलिन।
किनये काल कृįणक रास-लीला देिख घुिर कऽ आिब िचŇी पढ़बो आ िलखबो लेल
रिबकँ कहलक। िचŇी पिढ़ कऽ रिब सुना देलकिन। पÿ िलखैले तैयार होइत
बाजल- ‘‘की सभ िलखब?’’
रामसुनिर िलखबए लागिल-
परमानपुर
ता. १५.०८.२००८
बौआ फेकू।
हम तोरा कमाइक कोनो आशा केने छी, जे पाइ नै छौ तँ गाम कोना ऐमे?
ककरोसँ पंच-खॲइच लऽ कऽ चिल आ। तीन भुरकुरी धान-गहूम रखने छी, वएह
बेिच कऽ दऽ देबै। आब तोहूँ चेतन भेलँ। लोक कलकं जोड़त। हमरो आब
अइ दुिनयामे नीक नै लगैए। तँ सोचए छी जे अपन काज जĪदी पुरा ली।
अगते अगहनमे चिल अिबहँ। ताबे किनयँ ठेमा कऽ रखबौ। अखैन हमहूँ थेहगर
छी मुदा अइ िजनगीक कोन ठेकान छै। आब ई पिरवारो आ दुिनयो तोरे सबहक
ने हेतौ। समएपर चिल अिबहँ, जइसँ काज िबथुत ने होउ।’’
माए ।
माएक पÿ सुिन फेकुआ मने-मन खूब खुशी भेल। मनमे भेलै जे हमरो काज एिह
दुिनयँ, एिह समाजमे छैक। मुदा मनमे खुशी बेसी काल िटकल निह। लगले माघक
कुहेस जेकँ बुिŀ अĠहरा गेलै। कोन मुँह लऽ कऽ गाम जाएब। साल भिरक कमाइ
माइयक हाथमे की देबै। ई बात सĜय जे हमरा भरोसे माए निह जीबैत अिछ। मुदागामक िजनगी 41
हमरा ओकर कोनो दाियĜव निह अिछ, सेहो तँ निह। हे भगवान कोनो गर सु झाबह।
पनरहे िदनक पछाित एकटा घटना घटल। फेकुआक नोकरी छुिट गेल। ओना
नओ गोटेक सगं फेकुआ काज करैत। मुदा आठो गोटे पुरना कारीगर समयानुसर
अपनाकँ बदलैत जाइत, नव-नव िडजािनक कपड़ा िसबैक लूिर िसखैत जाइत। फेकुआ
अनाड़ी,  तँ शुुहसँ िसलाइक काज िसखए पड़लै। साल भिरमे कहुना कऽ पुरना
िदĪलीक कारीगर बनल। मुदा फैशनमे िबहािड़ एने फेकुआ उिड़ कऽ कातमे खसल।
ओना मािलकोक मनमे बेइमानी घोिसआएल रहै । बेइमानीक कारण छल पाइबलाक
चसकल मन। एकटा अŇारह बख्क लड़की कारीगर दू हजार दरमाहामे भँट गेलै।
सवा बख्सँ शहरमे रहैत-रहैत फेकुओक सुतल बुिŀ जिग कऽ करोट िलअए
लगलैक। जिहसँ आĜमबलोक जĠम भऽ चुकल छलैक। मुदा िख्चा। सĸत बिनये
रहल छलैक। जिहना मािलक नोकरीसँ हटैक बात कहलकै तिहना फेकुआ िहसाब
मगलक। ं िहसाब लऽ फेकुआ डेरा िबदा भेल। पाइ रहबे करै। रİतेमे काॅफी पीिब
डेरा आएल। डेरा आिब पखा ं खोिल पलगपर ं ओघरा ं गेल। ओघराइते ं मनमे अबै
लगलै- ई शहर छी, गाम निह। शहरमे जािह तेजीसँ मशीन, फैशन आ जीवन-शैली
बदिल रहल अिछ, ओिहमे हमरा सन-सन मुुखक कोन बात जे पढ़लो-िलखल लोक
ओघरिनयँ ं देत। नवका मशीन पुरना इजीिनयरकँ ं धĸा देत। पुरना बुिŀकँ नवका बुिŀ
धĸा देत। मुदा नीक-अधलाह के बुझत ? सभ भोग-िवलासक िजनगीक पाछु आĠहर
बिन गेल अिछ। बाप रे, ई तँ भुमकमक लषण छी। फेर मनमे एलै, भिरसक हमर
माथ,  नोकरी छु टने तँ ने चिढ़ गेलहँ। ओह,  अनका िवषएमे अनेरे ओझराइ छी।
जेकरा भोगए पड़तै ओकरा सुआस बुिझ पड़ै छै, तँ हमरे की। ठनका ठनकै छै तँ
िकयो अपना माथपर हाथ लऽ साहोर-साहोर करै त अिछ। फेर मनमे एलै जे हमहूँ तँ
जूिड़शीतलक निढ़ये जेकँ भेल छी। एक िदिश चाु भागसँ कुकूर दँतसँ पकिड़-
पकिड़ तीड़ैत अिछ तँ दोसर िदिश िशकारी सभ लाठी बिरसबैत अिछ। गामक लूिर
सीखलहुँ निह, सीिख लेलहुँ शहरक लूिर। तँ आब िलअ। ्वीĠटिलया बोरामे भिर-भिर
रखने जाउ। फेकुआक मन औनाए गेल। दुबिņयेमे हरा गेल। ितनबिटया-चािरबिņया
तँ बँिकये अिछ। माएपर तामस उठलै। बुदबुदाए लगल- ‘‘ई बुिढ़या गछा लेलक जे
शुुहे अगहनमे चिल अिबहँ। किनयँ ठेमा कऽ रखबौ। िबआह कइये देबउ।’’
एक िदिश कँचुआइल किनयँक बदलैत ुप तँ दोसर िदिश माइयक िसनेह।
समुƖक पािन जे कँ फेकुआक मनकँ अिİथर कऽ देलक। सोचए लगल जे माए नीक
छोिड़ किहयो अधलाह निह केलक आ ने किहयो सोचलक, ओकरापर आँिख उठाएब
अनुिचत छी। कािŎये गाम चिल जाएब। िबआहो कइये लेब। दू गोटे पित-पėी ओहन
लोक एकठाम होएब जे िकछु कऽ सकैत अिछ।  ‘दू पाइ’ क आशा हृदएमे समेिट
सौझुका गाड़ी पकिड़, तेसर िदन गाम पहुँिच गेल।

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