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गुरुवार, 31 मई 2012

बोिनहािरन मरनी


बोिनहािरन मरनी

छोट-छीन गाम छतौनी। तीिनये जाितक लोक गाममे। साइये घरक बसितयो। छेहा
बोिनहारक गाम। ओना पास-परोसक गामक लोक छतौनीकँ Ćितिơत गाम निह बुझैत।
िकऐक तँ ओिह गाम सबहक लोकक िवचारे Ćितिơत गाम ओ होइत जिहमे छþीसो
जाितक लोक बसैत। जािहसँ समाजक सभ तरहक जुरतक पूित् गामेमे होइत। मुदा
से छतौनीमे निह। तँ छतौनी जमाबदी ं गाम भऽ सकैत अिछ, Ćितिơत निह। मुदा एिह
िवचारकँ छतौनीक लोक मानै लए तैयारे निह। छतौनीक लोकक कहब जे जिहयासँ
हमर गाम बनल तिहयासँ ने किहयो अपनामे झगड़ा-झझटं भेल आ ने मािर-पीट।
जिहसँ ने किहयो िकयो कोट-कचहरी देखलक आ ने थाना-बहाना। ततबे निह, तीिन
जाितक लोक रिहतहुँ सभ िमिल एकठाम बैिस खेबो-पीबो करै छी आ तीन जाितक
तीनू देवİथानोमे पूजो-पाठ आ परसािदयो खाइ छी। सभ जाितक लोक सगे ं -संग
कमेबो करै छी आ एक-दोसराकँ,  मौका-मुसीबत पड़लापर, सगो ं पूरै छी। आन-आन
गामबला हमरा गामकँ अिह दुआरे गाम नै मानैए जे ओ सभ बहरवैया छी आ हमरा
सबहक पूव्ज अदौसँ रहल अिछ।
छतौनीक वासी सभ िदनसँ बोिनहारे निह रहल अिछ। पिहने ओकरो सभकँ
अपन-अपन खेत-पथार छलै। खेत-पथार गेलै कोना? एिह सबं धमे ं छतौनीक बूढ़-पुरान
लोकक कहब छिन जे हमरा सबहक पूब्ज, रौदीक चलैत, खेतक बाकी मालगु जारी
राज दरभगाकँ ं समएपर निह दऽ सकलिन,  तेिहसँ ओ सभ जमीन िनलाम कऽ
अबिधया, छपिरया हाथे बेिच लेलक। हमरा सबहक जमीनक मिलकाना हक खतम
भऽ गेल। ओ अबिधयो आ छपिरयो राजमे नोकरी करैत छल जे एिह इलाकामे आिब
जमीनो हिथया लेलक आ मुिखयो सरपचं बिन मेनजनी करैत अिछ। मुदा एकटा
चलाकी ओ सभ जुर केलक जे जेना अƇेजं आिब सþा हिथऔलक तेना चिल निह
गेल, बिĪक मुगल जेकँ बिस गेल।
जिहयासँ देश अजाद भेल आ सþाले भोट-भँट शुु भेल, तिहयासँ ने एĸोटा
कोनो पाटŰक नेता भोट मगैले ं एिह गाम आएल आ ने एĸो बेिर गौँआ भोट खसोलक।
िकएक तँ आइ धिर एिह गाममे भोटक बूथ बनबे ने कएल। तँ नेतो िकअए आओत?
गाममे ने चिरपिहया गाड़ी चलैक राİता छै आ ने साव्जिनक जगह İकूल, अİपताल।
जिहठाम भाषण-भु षण हएत। जिह गाममे छतौनीक बूथ बनैत ओिह गामक लोक सभ
छतौिनयोक भोट खसा लैत। छतौनीक लोकक िजनिगयो छोट। ने पढ़ै-िलखैक
झझटं , ने चोर-चहारक झझटं , ने रोग-ĭयािधक झझट। ं िकएक तँ गामक सभ बुझैत
जे जेकरा कपारमे िवńा िलखल रहत ओ डूिबयो-मिर कऽ पिढ़ये लेत। चोर-चहार एबेगामक िजनगी 43
कथीले करत। रोग-िबयािधक लेल पूजो-पाठ आ झाड़ो-फूक अिछये। तहूसँ पैघ बात
जे, जे एिह धरतीपर रहैले आएल अिछ ओ जीबे करत। पािन, पाथर, ठनका ओकर
की िबगािड़ लेतै। आ जे निञ रहैबला अिछ ओकरा फूलोक गाछपर सँप कािट लेतै
आ मिर जाएत। तँ की, छतौनीबलाकँ भगवानपर िबसवास नै छै? जुर छै। जँ से
निञ रिहतै तँ देवİथानमे सालमे एक बेर एþे धुमधामसँ पूजा िकअए करै अए?
उपास िकअए करैए?  दसनमो İथान  -देवİथान-  आ अपनो-अपनो घरमे गोसाउिनक
पीड़ी िकअए बनौने अिछ? साले-साल कामौर लऽ कऽ बैजनाथ िकअए जाइए?
सभ अभाव रिहतहुँ छतौनीक लोक हँसी-खुशीसँ जीवन िबतबैत अिछ। अगर जँ
िकयो गाममे मरै त वा सँप-तँप कटैत वा आिग-छाइ लगैत तँ सभ िकयो दासो-दास
भऽ लिग जाइत। पचास बख्क मरनी सेहो तिहमे सँ एक। जे अपना आँिखसँ अपन
पित, बेटा आ पुतोहूकँ गाछक तरमे खून बोकिर कऽ मरैत देखने। आइ बेचारी पँच
बख्क पोता आ आठ बख्क पोतीक बीच आशाक सगं जीिब रहल अिछ। कारी झामर
एक हƂडा देह, ताड़-खजुरपर बनाओल िचड़ैक खॲता जेकँ केश, आगुरं भिर-भिरक
पीअर दँत,  फुटल घैलीक कनखा जेकँ नाक,  गाइयक आँिख जेकँ बड़का-बड़का
आँिख,  साइयो चेफड़ी लागल साड़ी,  दुरगमिनया ं आगी ं फटलाक बाद किहयो देहमे
आगीकं नसीब निह भेल, िबना साया-डेिढ़याक साड़ी पिहरने। यएह छी मरनी।
चािर साल पिहने सुबध,  मनोहर आ तौनकी धान रोपए बाध गेल। जाधिर
तौनकीकँ दोसर सĠतान निह भेल ताधिर मरिनये पित सुबध आ बेटा मनोहरक सगं
काज करए जाइत। धनरोपनी,  धनकटनी,  कमठाउन,  रĤबी-राइ उखारै-काटैले सगे ं
जाइत। पुतोहू  –तौनकी- अगनाक ं काज सĦहारैत। मुदा जखन दूटा पोता-पोती भेलै
तिहयासँ मरनी अगनाक ं काज सĦहारए लागिल। अगनोमे ं कम काज निह। भानस-भात
करब,  पोता-पोती खेलाएब,  खूँटा परक बाछीक सेवा करब। आने पिरवार जे कँ
मरिनयोक पिरवार भरल-पूरल।
दस आँटीक जोड़ा तीन-तीन जोड़ा बीआ उखािड़ सुबध आ मनोहर पटैपर
टगलक ं आ राड़ीक जुžा बना तौनकी बीआक बोझ बािĠह माथपर लऽ कदबा खेत
पहुँचल। कदबा एक िदन पिहने िगरहत करा देने। तँ तीनू गोटेक मनमे खुशी होइत
जे सबेर-सकाल रोिप कऽ चिल जाएब। आन िदन कदबे दुआरे अबेर भऽ जाइ छलै।
मने-मन सुबध सोचैत जे बेु पहर अपनो जे कŇा भिरक खेत अिछ ओहो सभ तूर
िमिल कऽ हाथे-पाथे रोिप लेब। कदबामे बीआ रिख सुबध आिड़पर बैिस,  तमाकुल
चुनबए लगल। मनोहर आ तौनकी खेतमे बीआ पसारए लगल। सौँ से खेत बीओ पसिर
गेलै आ सुवधो तमाकुल खा लेलक। तीनू गोटे एक-एक आँटी खोिल खुĔजा पसािर
एक-एक खुĔजा रोपैले वामा हाथमे रखलक। आिड़क कात पिछमसँ तौनकी बीचमे
मनोहर आ पूबसँ सुवध पािह धेलक। एक पँती रोिप दोसर धेलक आिक पूब िदिश
एक िचड़की मेघ उठैत देखलक। मेघक छोट टुकड़ी देिख ककरो मनमे पािनक शका ं
नै उठलै। कने-कने िसहकी सेहो चलए लगलै। जिहना-जिहना हवा तेज होइत जाइत, 44 जगदीश Ćसाद मěडल
तिहना-तिहना किरया मेघक टुकड़ी सेहो उिधया-उिधया उपर चढ़ए लगलै। उपर चिढ़-
चिढ़ ओ टुकड़ी एक-दोसरमे िमलए लगल। मुदा पिछम िदिश रौद उगलै। किनये
कालक बाद सुुज झपा गेल। हबो तेज हुअए लगलै। िबजलोका चमकए लगलै।
बुĠदा-बुĠदी पािन पड़ए लगलै। जते मेघ सघन होइत जाइत तते पािनयोक बुž जोर
पकड़ैत। सगे ं िबजलोको बेिसआइल जाइत। घन-घनौआ बरखा हुअए लगल। पािनमे
भीजै दुआरे तीनू गोरे दौिड़ कऽ आमक गाछ लग पहुँचल। खेतसँ बीघे भिर हिट कऽ
आमक गाछ। खूब झमटगर। चािर हाथ उपरे मे दू फंड़ भऽ गेल। सरही आम।
गाछक पँजरेमे पिछमसँ तौनकी बैसिल आ पूबसँ सुवध आ मनोहर। तौनकी साड़ी
ओिढ़ दुनू हाथक मुŇी बािĠह कँखमे लऽ लेलक। मुदा सुवधो आ मनोहरो छुछे देहे।
गमछाक मुरेठा बािĠह लेलक। मुदा तैयो जाड़े दुनू बापूत थर-थर कपैत। नमहर-
नमहर बुž सेहो देहपर खसै। सौँसे देहक ुइयँ भुलिक कऽ ठाढ़ भऽ गेलै। मुदा
की करत? कोनो उपाए निह। पिछमो मेघ पकिड़ बिरसए लगल। जािहसँ दूर-दूर धिर
बरखा हुअए लगलै। रिह-रिह कऽ मेघो गरजै आ िबजलोको चमकै। एक बेर खूब
जोरसँ िबजलोका चमकलै। मुदा आन बेरक चमकलहासँ िबजलोकाक रगं बदलल।
आन बेर िपरॱछ इजोत होइत जखिन िक एिह बेर लाल टुह-टुह। दुरकाल समए देिख
तौनकी मने-मन खॱझा भगवानकँ कोसैत जे कोनो काजक समए होइ छै। अखैन
पािनक कोन काज छै। जिहना तगतगर लोक सिदखन बलउमकी करैत अिछ तिहना
ई िटकजरौना इĠƖो भगवान करैए। अनेरे काजकँ बरदा जाड़े कठुुअबैए। लोक सभ
कहै छै जे देवता-िपतरकँ बड़का-बड़का आँिख होइ छै जे एĸे ठीन बैसल-बैसल सगरे
दुिनयँ देखैए। से आँिख अखैन कतऽ चिल गेलै। देिवयो-देवता गरीबे-गुरबाकँ जान
मारै पाछु लागल रहै अए। जन-बोिनहारक काज करैक दू उखड़ाहा होइए। िभनसुरका
आ दुपहिरया। िभनसुरका उखड़ाहामे जँ एगारहो बजे पािन भेल वा कोनो बाधा भे ल तँ
िगरहत थोड़े बोइन देत। अगर जँ जलखै भऽ गेल रहलै तँ बड़बिढ़या निञ तँ
जलखैइयो पार। यएह तँ ऐठामक चलिन छै। ई िटकजुआ भगवान िगरहतेकँ मदित
करै छै।
जाड़सँ कपैत सु वध मनोहरकँ कहलक- ‘बौआ, सोचै छलॱ जे आन िदन रोपैन
करैमे अबेर भऽ जाइ छलै जइसँ अपन काज निञ सĦहरै छलै मुदा आइ सबेरे-सकाल
रोपैन होइत तँ अपनो बाड़ीक खेत रोिप लइतॱ। से सभ भगिठ ं गेल। कखैन पािन
छुटत कखैन नै सेहो ठीक निह। दुनू बापूत गप-सĢप किरते छल आिक तड़-तड़ा कऽ
ठनका ओिह गाछपर खसल। जइठीनसँ दुनू डािर फुटल छलै तकरा िचड़ैत मािटमे
चिल गेल। िचड़ा कऽ गाछ दुनू भाग खसल। एक फँाकक तरमे तौनकी आ दोसर
फँकक तरमे दुनू बापूत पिड़ गेल।
पािन छुटल। सौँसे गाममे हĪला हुअए लगलै जे बाधमे जे आमक गाछ छलै से
खिस पड़लै। भिरसक ओहीपर ठनका खसलै। एĸे-दुइये लोक देखैले जाइ लगल।
कातेमे ठाढ़ भऽ भऽ लोक देखैत। गाछोपर आ गाछक िन्चोमे जमीनोपर तते घोरन
पसिर गेलै जे लोक गाछक भीर जाइक िहĦमते ने करैत। मुदा जीवठ बािĠह किरयागामक िजनगी 45
गाछक जिड़ देखै बढ़ल। घोरन तँ खूब कटै मुदा तइयो िहĦमत कऽ किरया जिड़
लग पहुँचल। ठनकाक आिगक चेĠह ओिहना दुनू फँकमे छल। जिड़ लग ठाढ़ भऽ
ओ िहया-िहया देखए लगल। देखैत-देखैत मनोहरक टँगपर नजिर पड़लै। टँगपर
नजिर पिड़ते हĪला करए लगल जे एक गोरे तरमे िपचाइल अिछ। दौिड़ कऽ अबै
जाइ जा, एकरा बहार करह? किरयाक बात सु िन चाु भरसँ लोक बढ़ल। देखैत-
देखैत तीनू गोरेपर नजिर पड़लै। हĪला करैत किरया कुड़हिर अनए घरपर दौगल।
तीनू खून बोकिर-बोकिर मरल। मुदा तैयो सभ बचा-बचा कऽ डािर काटए लगल।
डािर कािट सील उनटौलक तँ तीनू थकुचा-थकुचा भेल। पिहने तँ िकयो नै
िचĠहलक, िकऐक तँ तीनू बेदरगं भऽ गेल। मुदा भँज लगौलापर पता चललै जे दुनू
बापूत सुवध कĸा छी आ पुतोहु िछऐ।
अखन धिर मरनी,  अगनेमे ं दुनू ब्चाकँ खेलबैत। गौिरया आिब कऽ कहलकै-
‘दादी तोरे अगनाक ं सभ, गाछक तरमे दिब कऽ मिर गेलौ।’
गौिरयाक बात सु िनतिह मरनी अचेेत भऽ खिस पड़ल। दुनू ब्चा सेहो िचिचयाए
लगलै। मरनीकँ अचेत देिख अलोधनी मुँहपर पािन छीिट िबअिन हौँकए लागिल।
किनये कालक बाद होश भेलै। होशमे अिबतिह मरनी फेर बपहािर कटए लगल।
ब्चाकँ कोरामे लऽ मरनीक सगं अलोधनी देखैले िबदा भेिल। गाछ लग पहुँचते
तीनू गोरेकँ मुइल देिख मरनी ओघरिनयँ ं कटए लागिल। ओघरिनयँ ं कटैत देिख
किरया पिजया कऽ पकिड़ मरनीकँ कात लऽ गेल। मरनीक दशा देिख सभ संĜवना
िदअए लगल। मुदा मरनीक करेज थीरे ने रहै। िविचÿ िİथितमे पड़ल। एक िदिश
पिरवारकँ नाश होइत देखए तँ दोसर िदिश दुनू ब्चाक मुँह देिख कनी-मनी आशा
मनमे जगै।
चािर साल पिहलुका निह, आब नव मरनीक जĠम भेल। जिहना आिगमे तपै सँ
पिहने सोनाक जे रगं रहैत तपलापर जिहना चमिक उठैत तिहना। ओना समाजोक
बेवहार जे पिहलुका छलै अहूमे बदलाव एलै। िकयो खाइक बौस दऽ जाइत तँ िकयो
ब्चो आ मरिनयो लए नुआ-बİतर। जखन ककरो भँजमे कोनो काज अबै तँ ओ
मरिनयोकँ सगं कऽ लैत। जिहना पिरवारमे बूढ़ आ ब्चाक Ćित जे िसनेह होइत,
ओहने िसनेह मरनीक Ćित समाजोक बीच हुअए लगलै। अपनो जीबैक आशा आ
ब्चोक,  मरनीकँ नव İफूित् पैदा केलक। एते िदन मरनीक हाथमे पुरने खे तीक
औजार टा रहै छलै ओ आब बिढ़ कऽ दोबर भऽ गेल। हँसुआ,  खुरपी,  टंगारी,
कोदािरक सगं -सगं हथौरी, गंचा सेहो आिब गेलै।
समए आगू बढ़ल। देशक िवकासक गित सेहो, बहुत तेज निह मुदा िकछु गित
तँ जुर पकड़लक। गाम-गाममे बाĠह-सड़क, पुल-पुिलया, İकूल, अİपताल सेहो बनए
लगल। जािहसँ खेितहर बोिनहारक सेहो काज बढ़ल। मरिनयो िछņामे मािट उघब,
पजेबा उघब,  िगņी फोड़ब,  सुरखी कुटब सीिख लेलक। जािहसँ बेकारी मेटाएल।
रोज कमेनाइ रोज खेनाइ धिर गरीबो पहुँिच गेल। भलेहॴ िजनगीमे बहुत अिधक
उžित निञ एलै मुदा जीबैक आशा जुर जगलै। मुदा ई सभ काज छतौनीमे निह, 46 जगदीश Ćसाद मěडल
पास-पड़ोसक आन-आन गाममे हुअए लगलै। जिहमे छतौिनयोक बोिनहार सभ काज
करए लगल।
छतौिनयोक िदन घुरलै। सात िकलोमीटर पĸी पीच सड़क जे एन.एच.सँ लऽ
कऽ रेलवे İटेशनकँ जोड़ैत, छतौिनये होइत बनैक शुु भेल। जिहयेसँ ‘Ćधानमÿी ं Ƈाम
सड़क योजनाक’  छतौनी होइत बनैक चरचा भे ल तिहयेसँ छतौनीक लोकक मनमे
खुशी अबए लगलै। गामक लोकक तँ ओहन दशा निह जे बस, Əक कीनैक िवचार
करैत। मुदा तैयो एते बात जुर एलै जे बरसातमे जे घरसँ बहराएब किठन छलै ओ
आब नै रहतै। िकछु गोटेक मनमे ई बात जुर होइत जे एते िदन िबना जूþो-
चĢपलक काज चलैत छल, से आब नै चलत। आिड़-धुर मािटपर चललासँ, बेसीसँ
बेसी कँट-कुश गरैत छल मुदा पीच भेने शीशाक टुकड़ी, लोहाक टुकड़ी सेहो गरत।
जािहसँ पएरक नोकसान बेसी हएत। मुदा फेर मनमे अबै जे एते िदन कम आमदनी
रहने जुþा-चĢपल नै कीिन पबै छलॱ से आब नै हएत। निञ बेसी तँ एĸो जोड़ा
जुरे कीिन लेब। जैसँ पएरमे बेमाइयो ने फटत।
Ćधानमÿी ं योजनाक सड़क बनए लगल। मुदा जते आशा बोिनहार सभकँ छलै
तते नै भेलै। िकएक तँ मािटक काज शुु होइते रगं -िबरगकं गाड़ी सभ पहुँचए
लगल। जे मािटक काज बोिनहार करैत ओ Əे्टर करए लगल। ओना काजक गित
तेज रहै मुदा बोिनहारक बेकारी बरकरारे रहलै। सड़कपर मािट पिड़ते रौलर आिब
सिरयाबए लगल। खेनाइ-पीनाइ छोिड़ िधयो-पूतो आ जिनजाितयो भिर-भिर िदन देखते
रहैत। ओना बूढ़ो-पुरान देखैत मुदा घरक िचĠता खीिच कऽ काज िदिश लऽ जाइत।
पनरहे िदनमे सातो िकलोमीटर सड़कपर मािटक काज सĦपž भऽ गेलै। एकदम
िचĸन, उĔजड़ धप-धप। घर एते ऊँच सड़क बिन गेल।
मािटक सड़क बिनते बड़का-बड़का Əक िचमनीसँ ईटा खसबए लगल। ऐँह,
अजीब-अजीब Əको सभ। एते िदन छह-पिहये Əक टा गामक लोक देखने मुदा एिह
सड़कक बनने दस पिहयासँ लऽ कऽ अŇारह पिहयाबला Əक सभकँ सेहो देखलक।
तीिनये िदनमे सातो िकलोमीटरक ंटा खसा देलक। मुदा ंटा पसारैक काज तँ इजन ं
निह करत। ओ तँ लोके करत। मुदा ओिहक लेल तँ अनुभवी माने ए्सपट् लोकक
जुरत हएत। जे छतौनीमे निह। तँ बाहरेसँ अनुभवी िमसितरी आओत!  मुदा तेहेन
बड़का ठीकेदार सड़क बनबैत जे अनेको सड़कक काज एक सगं चलबैत। एĸे िदन
तते अनुभवी िमसितरी ंटा पसारै लऽ आएल जे सभकँ बुिझ पड़लै जे दुइये िदनमे
सातो िकलोमीटर ंटा पसािर देत। मुदा ंटा उघैले तँ मजदू र चािहऐ। पिहले िदन
छतौनीक बोिनहारकँ काज भेटलै। ंटा पसरए लगल। धुरझाड़ काज चलए लगल।
छतौनीक सभ बोिनहार खुशीसँ काज करए लगल। तिह बीच ंटापर पसारैले
फुटलाहा ंटा Əकसँ अाबए लगल। दोहरी काज देिख छतौनीक बोिनहारक मन
खुशीसँ नाचए लगल। िकएक तँ िगņी फोड़ैले गामेक बोिनहारकँ काज भेटतै। मुदा
ठीकेदारक मुनसी, अपने खाइ-पीबै दुआरे सİते दरसँ िगņी फोड़ैक रेट लगा देलक।
एक Əे्टर पजेबा फोड़ैक दर सािठये ुपैया दैले तैयार भेल। एक-दू िदन तँ बोिनहारगामक िजनगी 47
लोक िगņी फोड़ब बž केलक मुदा पेटक आिग मजबुरन सभकँ लऽ गेलै। मरनी सेहो
िगņी फोड़ैए लागिल। एक Əे्टर िगņी फोड़ैमे बेचारीकँ चािर िदन लगैत। मुदा की
करैत?
एिह सड़कसँ पिहने जे सड़क बनै ओ िरआइत-िखआइत रिह जाइ। मािटक काज
भेलापर साल-दू साल ंटा बैसैमे लगै। जािहसँ मािट ढ़िह-ढ़ूिह कऽ उबड़-खाबड़ बिन
जाए। बड़का-बड़का खािध सड़कपर बिन जाइ। तहूमे तीन नंबर पजेबा फुिट-भँिग
कऽ गरदा बिन जाइत। गामक िधयो-पूतो उठा-उठा खेत-पथारमे फेिक दैत। कोठीक
गोरा बनबैले İÿीगण सभ िनकहा ंटा उठा-उठा लऽ जाइत। मुदा अइ बेर से नै
हएत। दुइये मासमे सड़क बनबैक शत् ठीकेदारकँ अिछ। जाबे बरखा खसत-खसत
ताबे सड़क बिन जएबाक छैक। पचास बख्क मरनी जे देखैमे झुनकुट बूिढ़ बूिझ
पड़ैत। सौँसे देहक हƂडी झक-झक करैत। खपटा जेकँ मुँह। खैनी खाइत-खाइत
अिगला चाु दँत टूटल। गंगी-जमुनी केश हवामे फहराइत। तहूमे सड़कक गरदासँ
सभ िदन नहाइत। मुदा तइओ मरनी अपन आँिख बचैने रहैत। जखन पुरबा हवा बहै
तँ पिछम मुँहे घुिर कऽ िगņी फोड़ैए लगैत आ जखन पछवा बहए लगैत तँ पूब मुँहे
घुिर जाइत। बीच-बीचमे सुसताइयो लैत आ खैिनयो खा लैत। मुदा तैयो ओकर मुँह
कखनो मिलन नै होए। िकएक तँ हृदएमे अदĦय साहस आ मनमे असीम िबसवास
सिदखन बनल रहै त। तँ सिदखन हँिसते रहए।
िभनसुरके उखड़ाहा। करीब नअ बजैत। पूब मुँहे घुिर मरनी िगņी फोडै़त। तिह
बीच प्चीस-तीस बख्क सुिगया माथ उघारने, छपुआ बनारसी साड़ी आ ओही रगकं
आगी ं पिहरने,  घुमौआ केश सीिट जुņी लटकौने,  ऐँड़ीदार चमड़ौ-चĢपल आ मोजा
लगौने,  मुँहमे सौ नĦबर पþी देल पान खेने,  डोलचीमे नूनक पौकेट,  कड़ू तेलक
शीशी, मसĪलाक पुिड़या आ साबुन रिख हाथमे लटकौने आिब कऽ मरनीक लग ठाढ़
भऽ गेल। मरनीक मेहनत आ बगए देिख िदल खोिल मने-मन हँसए लागल। मरनी
िगņी फोड़ैमे मİत। िकएक िकĦहरो ताकत!  सुिगयाक हृदएक खुशी मुँहसँ हँसी
होइत िनकलए चाहैत। मुदा मुँहक पानक पीत ठोरक फाटककँ बž केने। तँ पानक
पीत फेकब सुिगयाकँ जुरी भे लै। जइ पजेबाक ढ़ेरीपर बैिस मरनी िगņी बनबैत
ओिह ढ़ेरीपर सुिगया भिर मुँहक पीत फेिक देलक। पीतक दू-चािर बुž मरनीक
देहोपर पड़लै। देहपर पिड़ते ओ उनिट कऽ तकलक। टटका पीत चक-चक
करैत। कनडेिरये आँिखये मरनी सुिगयाक मुँ ह िदिश तकलक। सुिगयाकँ पान
िचबबैत देिख मरनीक मनमे आिग पजिड़ गेलै। पजेबाक ढ़ेरी देखलक। सौँसे थूक
पड़ल। मने-मन सोचलक जे आब केना िगņी फोरब। ढ़ेिरयो आ देहो अँइठ कऽ
देलक।
आँिख गुड़ािर कऽ मरनी सुिगयाकँ कहलक- ‘गै रनिडया,  तोरा सुझलौ नै जे
ढेरीपर थूक फेकलँ?’
गरीब मरनीक कटाह बात सुिन सुिगया तमिक कऽ उþर देलक- ‘तोरे बाĠह
िछऔ जे हम थूक नै फेकब।’ 48 जगदीश Ćसाद मěडल
सुिगयाक बोलकँ दबैत मरनी बाजिल- ‘एतेटा बाĠह छै,  तइमे तोरा कतौ थूक
फेकैक जगह नै भेिटलौ जे ऐठाम फेकलँ।’
सुिगया- ‘जदी एतै फेकिलऐ तँ तू हमर की करमे?’
मरनी- ‘की करबौ। आँइ गै िनरलĔजी, तोरा लाज होइ छौ जे सात पुरखाकँ
नाक-कान कटौलही। जेहने कुल-खनदान रहतौ तेहने ने चाइल चलमे।’
सुिगया- ‘अपन देह-दशा नै देखै छीही?’
मरनी- ‘की देखबै। ई देह बोिनहारिनक िछऐ। तोरा जेकँ की हम किहयो
बमैबला छौँड़ा सेने तँ किहयो िडĪलीबला छौँड़ा सेने बौआइ छी। एक चुुक पािनमे
डूिम कऽ मिर जो। तीमन िच्खी निहतन। जिहना सात घरक तीमन िच्खै छैँ
तिहना सातटा मुनसा देखै छैँ। हमर पड़तर सातो िजनगीमे हेतौ। जेकरा सगे ं बाप
हाथ पकड़ा देलक, सिह-मिर कऽ तै घरमे छी। छुछुनिर कहॴ कऽ। आिग लगा ले
अइ फुललाहा देहमे।’
मरनीक बातसँ सुिगया सहिम गे िल। मनमे डर पैिस गेलै जे हो न हो कहॴ
मारबो ने कराए। मुँह सकुचबैत, मूड़ी गोित िबदा भेिल। सुिगयाकँ जाइत देिख मरनी
साड़ीक खूँटसँ तमाकुल-चून िनकािल चुनबए लागिल। मुदा तैयो मन असिथर निञ
भेलै। मूड़ी उठा-उठा सुिगयो िदिश देखै आ मने-मन बजबो करए  ‘देह केहेन सीटने
अिछ, उढ़ढ़ी। जेना रजा-महराजाक बोहू हुअए। हाथ-पएरमे लुलही पकड़ने छिन जे
कमा कऽ खेतीह। जेहने छुछुनिर छौरा सभ तेहने छौरी सभ।’
तमाकू खा मरनी ंटा फोडै़ले घु मल आिक दादी-दादी करैत पोता दौगल आिब
दुनू हाथे दुनू जँघ पकिड़ ठाढ़ भऽ गेल। पाछूसँ पोितयो एलै। पोताकँ कोरामे उठा
मुँहमे चुĦमा लऽ पोतीकँ कहलक- ‘दाइ, बौआकँ रोटी नै देलही। दुनू गोरे चिल जाउ,
मोरामे रोटी रखने छी, लऽ कऽ दुनू गोरे खाए लेब। हम अखैन काज करै छी।
कनीकालमे आिब कऽ भानस करब।’
पोता-पोती,  आगनं िदिश िबदा भेल। पूब मुँहे घुिर कऽ मरनी िगņी फोड़ए
लगल। चािरटा बĠदूकधारी बƂडी-गाड्क सगं सड़कक ठीकेदार उþरसँ दिछन मुँहे
सड़क देखैत जाइत। आगू-आगू ठीकेदार पाछु-पाछु बĠदू कधारी। िठकेदारक नजिर
मरनीपर पड़ल। मरनीपर नजिर पिड़ते िठकेदारक डेग छोट-छोट हुअए लगल।
िठकेदारक आँ िख मरनीपर अटिक गेल। डेग तँ आगू मुँहे बढ़बैत मुदा आँिखक
Ĕयोित हृदएमे ढुिक कऽ हृदएकँ हड़बड़बै लगलै। मनमे अĠहर-तूफान उठए लगलै।
जािहसँ मने-मन िवचारए लगल जे जेकरा कमाइपर हमरा चािरटा बƂडी गाड् अिछ,
करोड़ो-अरबोक आमदनी अिछ, तेकर ई दशा छै क। ओ तँ हमर ओहन समंग अिछ
जे कमासुत अिछ,  ओहन तँ निह जे ऐश-मौजक िजनगी बना कमेलहे सĦपिþकँ
भोगैत अिछ। मु दा अँटकल निह। आगू मुँहे बिढ़ते रहल। िकछु दूर आगू बढ़लापर
जेना मरनीक आĜमा आगूसँ रोिक देलकै। िबचिह सड़कपर ओ ठीकेदार ठाढ़ भऽ
गेल। ठाढ़ भऽ एकटा िसपाहीकँ कहलक- ‘ओइ िगņी फोिड़िनहािरकँ कने बजौने
आउ?’ गामक िजनगी 49
ठीकेदारक बात सुिन एकटा िसपाही मरनी िदिश बढ़ल। मरनी लग जा ओिह
िसपाहीकँ कहलक- ‘मािलक बजबै छथुन। से कने चल?’
िगņी फोड़ब छोिड़ मरनी उनिट कऽ िसपाही िदिश तकलक। िसपाहीकँ देिख
मने-मन सोचै लगल जे ने हम कोनो मेमलामे फँसल छी आ ने कोनो बंकक करजा
नेने िछऐ, तखैन िकअए हमरा िसपाही बजबए आएल। मन सĸत कऽ कऽ कहलक-
‘तूँ नै देखै छहक जे अखैन हम काज करै छी। जेकर बोइन लेबै ओकर काज नै
करबै। अखैन जा। काजक बेिर उनिह जेतै तब ऐबह।’
मरनीक बात ठीकेदारो आ िसपािहयो सुनैत। एक-दोसरकँ देिख आँिख िन्चँ कऽ
िलअए। मुदा ठीकेदारक मन पीपरक पात जेकँ डोलैत। कखनो मरनीक इमानदारीपर
मन नचैत तँ कखनो ओकर अवİथापर। जिह देशक āिमक एते āममे िबसवास
करैत अिछ ओिह देशक िवकास जँ बािधत अिछ तँ जुर कतौ नै कतौ
सचालनकतŭक ं बेइमानी छैक। ई बात मनमे अिबते ठीकेदार अपना िदिश घुिर कऽ
तकलक, तँ अपन दोख सामने आिब ठाढ़ भऽ गे लै।
िसपाही कड़िक कऽ मरनीकँ कहलक- ‘निञ जेबही तँ पकिड़ कऽ लऽ
जेबौ?’
िसपाहीक गम् बोली सुिन मरनी कहलक- ‘तोहर हम कोनो करजा खेने िछअह जे
पकिड़कँ लऽ जेबह। अपन सुखलो हƂडीकँ धुनै छी, खाइ छी।’
मरनीक बात सु िन िसपािहयोक मन उनटए-पुनटए लगलै। एक िदिश मािलकक
आदेश दोसर िदिश मरनीक िवचार। आिखर, एहेन लोकक बीच एहेन सĸत िवचार
अबैक कारण की छै? अनका देखै िछऐ जे िसफ् िसपाहीक बरदी देिख डरा जाइत
अिछ, भलेहॴ ओ सरकारक िसपाही निहयो रहए। मुदा हमरा तँ सभ कुछ अिछ तैयो
अइ बुिढ़याकँ डर नै होइ छै। फेर मनमे एलै जे हम िकछु छी तँ नोकर छी मुदा ई
िकछु अिछ तँ İवतÿं बोिनहािरन। İवतÿं देशक İवतÿं āिमक। जे देशक आधार
छी। आिखर देश तँ एकरो सबहक िछऐ।
िसपाहीकँ ठाढ़ देिख ठीकेदारे पाछू ससिर कऽ मरनी लग आएल। मरिनयो सभकँ
देखैत आ मरिनयोकँ सभ। ठीकेदार मरनीक आँिख देखैत। आँिखमे सुुजक रोशनी
जेकँ Ćखर Ĕयोित। ललाटसँ आĜम-िवĂास िछटकैत। मधुर İवरमे ठीकेदार पुछलक-
‘चाची, अहँक पिरवारमे के सभ छिथ?’
िठकेदारक Ćķ सुिन मरनीक आँ िखमे नोर अबए लगलै। मन पिड़ गेलै अपन
पित,  बेटा आ पुतोहुक मृĜयु। टघरैत नोरकँ आँचरसँ पोिछ बाजिल- ‘बौआ,  हमर
घरबला, बेटा आ पुतोहु ठनकामे मिर गेल। अपने छी आ िपलुआ जेकँ दूटा पोता-
पोती अिछ।’
िठकेदार- ‘ब्चा सभ İकूलो जाइए?’
नै। एक तँ गाममे इİकूल नै छै। तहूमे पिहने गरीब लोकक िधया-पूताकँ पेट
भरतै तब ने जाएत। ने भिर पेट अž होइ छै आ ने भिर देह वİÿ, ने रहैक घर
छै, तखन इİकूल कना जाएत।’ 50 जगदीश Ćसाद मěडल
मरनीक बात सुिन ठीकेदार सहिम गेल। मने-मन सोचए लगल जे आँिखक
सोझमे देखै िछऐ ओ झूठ कोना भऽ सकैत अिछ। एþे भारी काज केिनहारक देहपर
कारी खट-खट कपड़ा छै, तोहूमे सइयो चेफड़ी लागल छै, काज करै जोकर उमे र नै
छै,  तैपर एते भारी हथौरी पजेबापर पटकैत अिछ। िठकेदारक मन दहिल गेलै।
जिहना अकास आ पृĝवीक बीच िषितज अिछ, जािह ठाम जा िचड़ै-चुनमुनी लसिक
जाइत अिछ, तिहना ठीकेदारक मन सुख-दुखक बीच लसिक गेल। जेना सभ कुछ
मनक हरा गेलै। शूž भऽ गेलै। ने आगूक बाट सूझै आ ने पाछुक। मरनीसँ आगू
की पूछब से मनमे रहबे ने के लै। साहस बटोिर पुछलक- ‘भिर िदनमे कते ुपैया
कमाइ छी?’ िठकेदारक Ćķ सुिन मरनीक मनमे झड़क उठलै। बाजिल- ‘कते कमाएब
! जेहने बैमान सरकार अिछ तेहने ओकर मनसी छै। चािर िदनमे एकटा पजेबाक ढ़ेरी
फोड़ै छी तँ तीन-बीस ुपैया दैए। अइसँ तीन तूरक पेट भरत?  भिर िदन ंटा
फोड़ैत-फोडै़त देह-हाथ दुखाइत रहैए मुदा एकटा गोिटयो कीनब से पाइ नै बँचैए।
िठकेदारक आँ िखमे नोर आिब गे लै। मनुįयता जािग गेलै। मुदा ई मनु įयता कते
काल िजनगीमे अँटकतै? िजनगी तँ उनटल छै। जािहमे मनु įयता नामक कोनो दरस
निह छैक।

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