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गुरुवार, 31 मई 2012

भैँटक लावा

िजनगी 3
 भैँटक लावा
पिछला बािढ़। मोन पिड़तिह देह भुटुिक जाइत अिछ। रोइयँ-रोइयँ ठाढ़ भऽ
जाइत अिछ। बािढ़क िवकराल दृĮय आँिखक आगू नाचए लगैत अिछ। घोड़ोसँ ते ज
गितसँ पािन दौगैत। बािढ़यो छोटकी निह, जुअनकी निह, बुिढ़या। बुिढ़या ुप बना
नृĜय करैत। ककरा कहू बड़की धार आ ककरा कहू छोटकी,  सभ अपन-अपन
िचĠह-पहिचĠह मेटा समुƖ जेकँ बिन गेल। जेĦहर देखू तेĦहर पँक घोराएल पािन,
िनछोहे दिछन मुहँ दौगल जाइत। कतेक गाम-घर पजेबाक निह रहने घर-िवहीन भऽ
गेल। इनार, पोखिर, बोिरगं , चापाकल पािनक तरमे डुबकुिनयँ काटए लगल। एहन
भयकर ं दृĮय देिख लोककँ डरे छने-छन िपयास लगलोपर पीबैक पािन निह भे टैत।
जीवन-मरण आगू मे ठाढ़ भऽ िझĸम-िझĸा करैत बुझाए। घर खसल,  घरक कोठी
खसल, कोठीक अž भसल। जेहने दुरगित घरक तेहने गाइयो-महीिस,  गाछो-िबरीछ
आ खेतो-पथारक।
घरक नूआ-िबİतर आ आनो-आन समानक मोटरी बािĠह माथपर लऽ अपनो डँड़मे
दू भþा खरौआ डोरी बािĠह आ बेटोक डँड़मे बािĠह आगू-आगू मुसना आ पाछू-पाछू
घरवाली जीबछी, बेटी दुखनीकँ कोरामे लऽ कĠहा लगौने पोखिरक ऊँचका महार िदिश
चलल। एखन धिर ओ महार बोन-झाड़ आ पर-पैखानाक जगह छल। जािहमे सँप-
कीड़ा बसेरा बनौने,  बािढ़ ओकरा घरारी बना देलक। जिहना इजोतमे छँह लोकक
सगं निह छोड़ैत, तिहना बरखा बािढ़क सगं छोड़ए लेल तैयार निह। िन्चँ पािनक
तेज गित आ ऊपरसँ बरखाक नमहर बुž। महारपर मुसनाकँ पहुँचैसँ पिहने बीस-
प्चीस गोटे अĢपन-अĢपन िधया-पूता, चीज-बİतु आ माल-जालक सगं पहुँिच चुकल
छल। महारपर पहुँिच मुसना रहैक जगह िहयाबए लगल। शौच करैक ढ़लान लग
खाली जगह देिख मुसना मोटरी रखलक। मोटरी रािख िबसनाइिरक डािढ़ तोिड़
खरड़ा बनौलक। ओिह खरड़ासँ खरड़ए लगल। एक बेर खरिड़ कऽ देखलक तँ
मनमे पड़पन निञ भेलइ।
फेर दोहरा कऽ खरिड़ िचĸन बनौलक। िचĸन जगह देिख दुनू बेकतीक मनमे
चैन भेलै। मोटरी खोिल मुसना एकटा बोरा िनकािल चािरटा बþीक खूँटा गािड़,
खरौआ जौरसँ चाु खूट बािĠह, बþीमे बािĠह कऽ घर बनौलक। दोसर बोरा िन्चँमे
ओछा िधयो-पूतोकँ बैसौलक आ मोटिरयोक समान रखलक। िचĠतासँ दुनू परानीक मूँह
सुखाएल रहै। एक िदिश दुनू ब्चाकँ मुसना देखए आ दोसर िदिश गनगनाइत बािढ़।
माथपर दुनू हाथ दऽ जीबछी मने-मन कोसी-कमला महरानीकँ गिरऐबो करैत आ जान
बचबै लेल िनहोरो करैत। दुनू ब्चो कखनो कऽ बािढ़ देिख हँसैत तँ कखनो जाड़े4 जगदीश Ćसाद मěडल
कनैत।
बािढ़क वेगमे एकटा घर भिसआएल अबैत देिख मुसना बँसक टोन आ कुड़हिर
लऽ दौगल। पािनमे पैिस िहयाबे लगल जे कोन सोझे घर आओत। ठेकना कऽ हँइ-
हँइ पँचटा खुņा ठोकलक। आİते-आİते घर आिब कऽ खुņामे अड़कल,  खूटामे
अड़ल घर देिख घरवालीकँ सोर पािड़ कहलक- ‘‘हँसू नेने आउ। घरक समचा सभ
उिघ-उिघ लऽ जाउ।’’
घरक ऊपरमे एकटा कुकूर सेहो भसैत आएल। ओ लोकक सुन-गुन पािब कूिद
कऽ महारपर चिल गेल। ठाठक बþीमे जहँ मु सना हँसू लगौलक आिक एकटा सँप
लप दऽ हाथेमे हबक मािर देलकै। घरक भार थालमे गरल खुņा निह सĦहािर
सकल। पँचो खुņा पािनमे िगर पड़लै। घर भिस गेलै। खूब जोरसँ मुसना कनबो
करैत आ हĪलो करैत जे हौ लोक सभ,  दौड़ै जाइ जा हौ,  हमरा सँप कािट
लेलक। मुसनाक कानब सुिन घरवाली सेहो बपहािर काटए लागिल। बपहािर कटैत
घरवालीकँ मुसना कहलक- ‘‘हे गए दुखनी माए, नाग डिस लेलकौ। छाती लग िबख
आिब गेल। किनये बाकी अिछ कठं छुबै ले। िधया-पुताकँ सोर पािड़ कनी मूँह देखा
दे। आब नै बचबौ।’’
जीबछी हĪलो करै आ घरबलाक बँिह पकिड़ उपरो करैत। महारक िकनछिरमे
पहुँिच जहँ उपर हुअए लगल आिक दुनू गोटे िपछिड़ कऽ तरे-उपरे िन्चँमे खसल।
दुनू परानी भीजल तँ रहबे करै, आरो नहा गेल। मुदा तइयो ओिरया-ओिरया कऽ उपर
भेल। महारपर आिब जीबछी चू नक कोहीसँ चू न िनकािल दाढ़मे लगौलक। सँपक
िबख झाड़िनहार गाममे एकोटा निह। मुदा रौिदया एिह बेर दसमीमे चनौरा गहबरमे
चाटी िसखने छल। सभ िकयो रौिदयाक खोज करए लगल। ओ रौिदया माछ मारए
लेल सहत लऽ कऽ बाध िदिश गेल छल। एक गोरे ओकरा बजा अनलक। अिबते
रौिदया सहत कातमे रिख हाथ-पएर धोए मुसना लग आिब बाजल- ‘‘हौ भाय, हमर
चाटी िसŀ निह भेल अिछ, िकएक तँ हम एखन धिर गगा ं İनान नै केलहुँहँ। मुदा
तइयो िबसहाराकँ सुमिर देखै िछऐ।’’
मुसनाकँ आगूमे बैसा रौिदया हाथेसँ जगहकँ झािड़ चाटी रखलक। सभ रौिदया
िदिश देखैत। मुदा चाटी चलबे ने कएल। बािढ़क दुआरे आन गामसँ झाड़िनहार आ
चिņवाहकँ बजाएब महाग मोसिकल रहै। सभ िनराश भऽ गेल। छाती पीिट-पीिट
जीबछी कनबो करै आ देवी-देवताकँ कबुलो करै। मुदा ढ़ोढ़ सँप कटने रहए तँ िबख
लगबे ने केलै।
गोसाइ लुक-झुक करए लगल। गामक ढ़ेरबा, बूिढ़ आ जुआन İÿीगण, चगेरीयो ं
आ चगे रोमे ं कँच मािटक िदआरी लऽ पोखिरक घाट लग जमा भऽ कमला महरानीकँ
सँझ दऽ गीत गाबए लागिल। ब्चा सभ जए-जएकार करैत। तिह बीच लुिखया
कमला महरानीकँ पाठी कबुला के लक, सुबधी एक सेर मधुर। दोसिर सँझ धिर गीत-
गािब सभ घुिर कऽ आगनं आएल।
एक रģतारमे बािढ़ पँच िदन रहल। मुदा पोह फिटतिह छठम िदन पािन कमएगामक िजनगी 5
लगल। बािढ़क पािन जिहना हुहुआ कऽ अबैए, तिहना जाइए। बेर झुकैत-झुकैत घर-
अगनाक ं पािन िनकिल गेलै। मुदा थाल-िखचार रहबे करै। सातम िदनसँ लोक घर
ठाढ़ करए लगल। बािढ़ सटिकतिह लोक परदेश िदिश पड़ाए लगल। गाममे ने एĸोटा
धानक गब बँचल आ ने खेत रोपए लेल िबरार। नारक टाल सभ कतए भिस कऽ
गेल तेकर ठेकान निह। गहुमक भुİसी भुसकँरेमे सिड़-सिड़ गोबर बिन गे ल।
मनु्खसँ बेसी िदĸत माल-जालकँ भऽ गेलै। आमक पात, बँसक पात आन-आन गाछ
सबहक पात कािट-कािट माल-जालकँ खुआबए लगल। आन-आन गामसँ नार, भु İसी
कीिन-कीिन अानए लगल। मुदा माल-जाल तइयो अन-धुन मुइलै। जे बँचल रहै, ओहो
सुखा कऽ सठी ं जेकँ भऽ गेलै। तइ परसँ रगं -िबरगकं बीमारी सभ सेहो आिब गे लै।
ककरो खुरहा तँ ककरो पेटझड़्ड़ी। िकछु गोटे अपन सभ मालकँ कुटमैती सभमे दऽ
आएल।
चािरक अमल। िपसुआ भंग पीिब āीकाĠत मैदान िदिशसँ आिब दलानपर बैिस
चाह पीबैत रहिथ। सोगसँ अधमु जेकँ भे ल। मने-मन सोचिथ जे महाजनी तँ
चिलये गेल आब अपनो साल भिर की खाएब? अगते धान सबाइ लगा देलहुँ। बड़
पैघ गलती भेल जे एĸो बखारी पछुआ कऽ निह रखलॱ। मुदा एक बखारी रखनिह
की होइत। के ककरा मदित करत। ठीके कहब छै जे सभकँ अपना भरोसे जीबाक
चाही। भने दुआर परक बखारीक धान सिठ गेल। िकयो दरबĔजापर आओत तँ देखा
देबै। मुदा अपनो तँ जुरत अिछ, से कतए सँ आनब। लऽ दऽ कऽ घरक कोठीमे
चाउर अिछ,  ओतबे अिछ। एĸो धुर धान निञ बँचल अिछ जे अगहनोक आशा
होइत। आब अबाद कएल नै हएत। आगू रĤबीयेक आशा। जे सभ िदन कीिन-बेसािह
कऽ खाइत अिछ ओकरा तँ कोनो नै, मुदा हमरा लोक की कहत? चाह पीिबते-पीिबते
āीकाĠतकँ चौĠह अाबए लगलिन। मन पड़लिन जे बाबा कहने रहिथ जे दरबĔजापर
जँ ्यो दू-सेर वा दू-टका मंगए लेल आबए तँ ओकरा ओिहना निह घुमिबहक।
ओिहसँ लछमी पड़ाइ छिथ। जीबछीकँ अबैत देिख āीकाĠत सोर पाड़लिखन। सालो
भिर जीबछी हुनके कुटाउन कऽ गुजर करैत छिल। चाउर-चूड़ा कुटैमे जीबछी गाममे
सभसँ बेसी लुिरगर। āीकाĠतक लग आिब जीबछी हँसैत कहलकिन- ‘‘एþे िकए
सोगाइल छिथ कĸा, िहनका एþे छिन तखन एते दुख होइ छिन, हमरा तँ िकछु ने
अिछ तँ िक मिर जाएब।’’
जीबछीक बात सुिन भखरल İवरमे āीकाĠत कहलिखन- ‘‘जिहना सभ िकछु
बािढ़मे दहा गेल तिहना जँ अपनो सभ तु र भिस जइतहुँ, से नीक होइत। जाबे परान
छुटैत,  ततबे काल ने दुख होइत। आगू तँ दुख निह काटए पड़ैत।’’  मुİकी दैत
जीबछी बाजिल- ‘‘एĸेटा बािढ़मे एþे िचĠता करै छिथ काका, कनी नीक की कनी
अधलाह, िदन तँ िबतबे करतिन।’’
चीलम पीबैत मु सना ओसारपर बैसल। किस कऽ दम खॴिच मने-मन सोचए
लगल जे दू मास अगहन-पूस मुसहिन खुिन-खुिन गुजर करै छलहुँ। दस सेर जमो
भऽ जाइ छल आ गुजरो कऽ लैत छलहुँ। ओहो चिल गेल। ने एĸो गब कतौ धान6 जगदीश Ćसाद मěडल
बँचल आ ने गाममे एकोटा मूस। दोसर दम खॴिच धूँआकँ घोिटतिह मनमे एलै जे
मूसक तीमन आ धुसरी चाउरक भात जँ जाड़क मासमे भेटए तँ एिहसँ नीक दोसर
की हएत। एहेन खेनाइ तँ रजो-महरजोकँ िसिहĠते लागल रहतिन। ओ-हो-हो, भगवान
गरीबेक सुख छीिन लेलिन।
मुसनाक पिहलुका नाम मकसूदन छल। मुदा मूस आ मुसहिनसँ बेसी िसनेह रहने
लोक ओकरा मुसना कहए लगल। जीबछी आगनक ं चुिŎपर रोटी पकबैत। इनारपर
हाथ-पएर धोय मुसना लोटामे पािन नेने आगनं आिब जलखै करै लऽ बैसल। िटनही
िछपलीमे रोटी-नून जीबछी घरबलाक आगूमे देलक। अगनामे ं दुखबाकँ निह देिख मुसना
जोरसँ शोर पाड़लक। िपताक अवाज सुिनतिह दुखबा दौगल आिब धुराइले हाथे-पएरे
खाइले बैिस रहल। दुनू बापुत खाए लगल। चुिŎये लगसँ मुİकी दैत जीबछी
बाजिल- ‘‘ककरो िकछु होउ, जकरा लूिर रहतै ओ जीबे करत। ऐठाम तँ देखै िछऐ
जे एĸे दहारमे िकदिन बहारक िखİसा अिछ। सभ हाकरोस करैए।’’
मुँहक रोटी मुसना हँइ-हँइ िचबा जीबछी िदिश देिख कऽ बाजल- ‘‘तते ने माछ
भिस-भिस आएल अिछ जे खþा-खुþीमे सह-सह करैए। कने पािन तँ कम होउ।
जखने पािन कम भऽ उपछै जोकर भेल आिक मछबािर शुु कऽ देब। खेबो करब आ
बेचबो करब। सिदखन दू पाइ हाथेमे रहत।’’
अपन निहराक बात मन पिड़तिह जीबछी कहए लागिल- ‘‘हमरा नैहरमे पूबसँ
कोशी आ पिछमसँ गडकक ं बािढ़ सभ साल अबैत छल। एिह बीच जे धार अिछ
ओकर पािन तँ घुमैत-िफरैत रिहते छल। सगरे गाम साउनेसँ जलोदीप भऽ जाइ
छल। टापू जेकँ एकटा परती टा सुखल रहैत छल। ओिहपर सौँसे गामक लोक
बरसाती घर बना कऽ रहैत छल। काितक अबैत-अबैत खेत सभ जागए लगैत छलै।
तकर बाद लोक खेती करैत छल। गिहरका ं खेत आ खािध-खुिधमे भैँटक गाछ सोहरी
लागल जनमै छल। अगहन बीतैत-बीतैत ओ तोड़ै बला हुअए लगैत छल। हम सभ
ओिह भैँटकँ तोिड़-तोिड़ आनी, ओकरे दाना िनकािल सुखा कऽ लावा भूजी। तते लावा
हुअए जे अपनो खाइ आ बेचबो करी। कािŎ िगरहत कĸाक ओिहठाम जाएब आ
कहबिन जे चौरीमे मनसĦफे भैँट जनमल अिछ, ओ हमरा दऽ िदअ।’’
एखन धिर दुनू परानी मुसना, चाउर आ चूड़ाक कुņी करैत छल, सेहो ढ़ेकीमे।
िकएक तँ गाममे एĸोटा छोटको मशीन धनकुिटयाक निह छल। अिधकतर पिरवार
अपन-अपन ढेकी-उखिड़ रखै त छल। मुसना से हो कुņीक दुआरे अपन ढेकी-उखिड़
रखने अिछ। नीक चाउर बनबैमे जीबछीक लोहा सभ मानैए। एिह बेिर तँ धनकुņी
चलत निह। मुदा बािढ़मे आन गामसँ तते भै ँट दहा कऽ चौरीमे आएल जे सापरिपņा
गाछ सौँसे चौरीमे जनिम गेल अिछ। तँ जीबछी मने-मन चपचपाइत। दोसरकँ भैँ टक
भँज बुझले निह छलै।
सभ िदन नहाइ बेिरमे जीबछी चौरी जा भैँट देिख-देिख अबैत छिल। चौरगर-
चकरगर पात सौँसे चौरीकँ छेकने। गोिट-पङरा फूल हुअए लगलै। फू ल देिख
जीबछीक मनमे होइ जे एþेटा फुलवारी इĠƖो भगवानकँ हेतिन की निह। पँचे िदनमेगामक िजनगी 7
सौँसे चौरी फूल फुला गेल। अगता फूलक पþी झिड़-झिड़ खसए लागल,  फूलमे
नुकाएल फड़ िनकलए लगल। गोल-गोल, हिरयर-हिरयर। फड़ देिख जीबछी आमदनी
बुिझ, चौरी कातमे बैिस, नव-नव योजना मने-मन बनबए लागिल। अइ बेर एकटा खूब
िनĦमन महीस कीनब। जँ महीस जोकर आमदनी नै हएत तँ दूटा गाऐ कीिन लेब।
अĢपन तँ सĦपित भऽ जाएत। ओकरे खूब चराएब-बझाएब। ओहीसँ तँ चाु परानीक
गुजर चलत। िजनगी भिर तँ कुटौने करैत रहलहुँ मुदा एिह बेर कमलो महरानी आ
कोिसयो महरानी दुख हेिर लेलिथ। मने-मन जीबछी दुनूकँ गोड़ लगलकिन। अपन
धन हएत, तइ परसँ मेहनत करब तँ कोन दिरदराहा दुख आिब कऽ हĦमर सुख छीिन
लेत? मजगूत घर बाĠहब, बेटा-बेटीक िबआह करब। नाित-पोता हएत, बाबा-दादी बिन
कऽ जते िदन जीबी ओ िक देवलोकसँ कम भेलै। अही लए ने सभ हेरान अिछ।
कएलासँ सभ िकछु होइ छै, िबनु केने पतरो फुिस।
घनगर गाछ देिख जीबछीक मनमे अएलै जे बीच-बीचमे सँ जँ गाछ उखािर देबै
तँ सौरिखयो करहर भऽ जाएत आ छेहर गाछ रहने फड़ो नमहर हएत। जइसँ दानो
नीक हएत। एखनेसँ आमदनी शुु भऽ जाएत। उĜसािहत भऽ जीबछी कमठौन शुु
केलक। मुदा करहर उखारैमे तते डँड़ दुखाइ जे हूबा किम गेलै। कमठौन छोिड़
देलक। देखते-देखते फड़मे लाली पकड़ए लगलै।
अगता फूल अगता फड़ भेल। नमहर-नमहर,  पोछल-पोछल,  गोल-गोल पुƠ।
रगलं फड़ देिख जीबछी बुिझ गे ल जे आब ई तोड़ैबला भऽ गेल। दोसर िदनसँ फड़
तोड़ैक िवचार जीबछी मने-मन कऽ लेलक।
दोसर िदन भोरे जीबछी रोटी पका,  दुनू ब्चो आ अपनो दुनू परानी
खा Ģलािİटकक बोरा लऽ फड़ तोड़ैले िबदा हुअए लगल आिक धक दऽ मन पड़लै
जे बोरामे तँ फड़ राखब,  मु दा पािनमे तोिड़-तोिड़ कतए राखब। फड़ तोड़ैले
तँ झोराक जुरत हएत। झोरा तँ अपना अिछ निह!  आब की करब?  लगले
जीबछी पुरना साड़ीकँ फािड़ दूटा झोरा सीलक। झोरा सीिब बोरो आ झोरोकँ
चौपेत एकटा झोरामे रािख,  दुनू ब्चो आ दुनू गोटे अपनो चौर िदिश िबदा
भेल।
फड़क ुप-रगसँ ं जीबछीक मन गद-गद। मुदा अनभुआर काज बुिझ मुसना तक्-
िवतक् करैत। चौरक कात पहुँिच उपरका खेत जे सुखाएल छल मे दुनू ब्चो, बोरो
आ रोटी-पािनकँ रिख दुनू परानी भैँट तोडै़ले पािनमे पैसल। पािनमे पैिसतिह जीबछीक
नजिर भैँटक फड़क उपरे-ऊपर नाचए लगल। जिहना ककरो ुपैआक थैली भेटलासँ
खुशी होइ छै, तिहना जीबछीक मनमे भेलै। एक टकसँ देिख जीबछी दुनू हाथे हँइ-
हँइ फड़ तोड़ए लागिल। िख्चा फड़ देिख जीबछी पितकँ कहलक- ‘‘जुएलके फड़
टा तोड़ब। अजोहा एखन छोिड़ िदयौ। पछाित तोड़ब।’’
भिरते जीबछी ऊपर आिब-आिब बोरामे रखैत। मुसनो सएह करैत। दुनू बोरा भिर
गेल। ऊपर आिब जीबछी पितकँ कहलक- ‘‘कनी काल सुİता िलअ। पािनमे
िनहुड़ल-िनहुड़ल डँड़ो दुखा गेल हैत। अहँ एþै रहू,  हम एक बेर अगनासँ ं रखने8 जगदीश Ćसाद मěडल
अबै छी।’’
जीबछी एकटा बोरा उठा आगनं िबदा भेिल। एक तँ पािनक भीजल,  दोसर
ओजनगर बİतु। मुदा जीबछी भारी बुझबे ने करए। िकएक तँ सĦपिþक मोटरी रहै
िकने। आगनं आिब ओसारपर बोरा रिख पुनः जीबछी चौर िदिश रमकल िवदा भेिल।
चौर पहुँिच पितकँ कहलक- ‘‘हम बोरा लै छी, अहँ दुनू ब्चो आ डोलोकँ सĦहारने
चलू।’’
गू-आगू मुसना बेटीकँ कोरामे दोसर हाथमे डोल आ बेटाकँ लऽ चलल। पाछू-
पाछू जीबछी माथपर बोरा लेने। थोड़े दूर बढ़लापर जीबछी पितकँ कहलक- ‘‘भगवान
दुःख हेिर लेलिन।’’
मुदा İÿीक बात सुिन मुसनाकँ ओ खुशी निञ एलै जे जीबछीकँ रहै।
आगनं आिब जीबछी पिहलुके बोरा लग दोसरो बोरा रिख भानसक ओिरयान करै
लागिल।
चािरम िदन पिहलुके खेप भैँट तोड़ै काल मुसनाकँ एकटा ठंगी बँिहमे पकिड़
लेलकै। जे ओ देखबे ने केलक। मुदा जखन ठंगी भिर पोख खून पीिब भिरया गे लै,
तखन मुसनाक नजिर पड़लै। ठंगीकँ देिखतिह ओकर परान उिड़ गेलै। थर-थर
कापए लगल। खूब जोरसँ घरवालीकँ कहलक- ‘‘बाप रे बाप! देहक सभटा खून ठंगी
पीिब लेलक। कोन पाप लागल जे अइ मौिगयाक भँजमे पड़लॱ। एक तँ बािढ़क
मारल छी जे भिर पोख अž नै होइए। सुखा कऽ सठी ं भेल छी। तइपर जेहो खून
देहमे छलए सेहो ठंिगये पीिब गेल। झब दे आउ ने तँ हम पािनये मे खिस पड़ब।’’
मुसनाक बातकँ अनठबैत जीबछी हँइ-हँइ फड़ो तोड़ैत आ मने-मन बजबो करैत-
‘‘जना नाग डिस नेने होइ, तिहना अड़राइए। भभटपन ने देखू। एहने-एहने पुुख बुते
पिरवार चलत?’’
दुन झोरा भिरते जीबछी मुसना लग आिब हाथेसँ ठंगी पकिड़ एकटा िचचोरमे
बािĠह देलक। मुदा जइ ठाम ठंगी पकड़ने रहै तइ ठामसँ छड़-छड़ खून बहैत। अपन
दिहना औठासँ ं जीबछी दािब देलक। किनये कालक बाद खून बž भऽ गेलै। जीबछी
फेर फड़ तोड़ैले पािनमे पैसल। तोिड़ कने काल बाद जीबछी कहलक- ‘‘आउ ने,
आब िकछु ने हएत।’’
जीबछीक बात सुिन मुसना आँिख गुड़िर कऽ बाजल- ‘‘ई मौिगया जान मारैपर
लगल अिछ। जे कहुना मिर जाए। हमरा की दुिनयामे सैँएक कमी छै? दोसर कऽ
लेब। दुनू ब्चा िदिश देखैत बाजल- मुदा अइ टेŎुक सभक की हेतै? िबलिट कऽ
मरत की निह?’’  पित िदिश देिख पėी मुİकी दैत बाजिल- ‘‘निञ तोड़ब तँ निञ
तोु। ओतै बैिस ब्चा सभकँ खेलाउ।’’
दुनू बोरा भिर जीबछी आगनं अनलक। सभकँ सĦहारने मुसना सेहो आएल।
आगनं आिब जीबछी चुिŎ पजािर,  भानस कऽ दुनू ब्चो आ अपनो दुनू परानी
खेलक। खा कऽ जीबछी हँसू लऽ भैँटक फड़ चीिर-चीिर दाना िनकालए लागिल।
लाल-लाल, गोल-गोल। मुसना सेहो दाना िनकालए लगल। दुनू ब्चा दुनू भाग बैिसगामक िजनगी 9
दूटा फड़कँ गुड़कबैत। दानाकँ एकटा चटकुžीपर थोिप-थोिप रखैत जाए। मुदा
किनये काल बाद मुसनाकँ चीलम पीबैक मन भेलै। ओ उिठ कऽ चुिŎ लग जा
आिगयो तपए लगल आ चीलमो पीबए लगल। दानाक ढ़ेरी देिख जीबछी गर अँटबए
लागिल जे एþे कþऽ कऽ राखब। गुनधुन करैत। एकाएक नैहरक बात मन पड़लै।
मन पिड़ते मूहसँ हँसी फुटलै। जीबछीकँ हँसैत देिख मुसना अƪािदत भऽ कहलक-
‘‘ऐँ गै, कोन सोनाक तमघैल तोरा भेिट गेलौहँ जे एना िखिखआइ छँ।’’
मुदा पाशा बदलै त जीबछी बाजिल- ‘‘एखैन तँ अĠहार भऽ गेलै, कािŎ भोरे एकटा
खािध टाटक कात अगनेमे ं खुिन देबै।’’
भोरे मुसना ढ़क जेकँ गोल-मोल खािध खुनलक। जीबछी दू-लेब कऽ कऽ लेिब,
सुखौलक। ओिहमे भैँटक दाना सुखा-सुखा रखैत गेल। ऊपरसँ टाटक झँपना बना
मुसना दऽ देलक।
मास िदनक मेहनितसँ जीबछीक आगनं भैँटक दानासँ भिर गेल। अनभुआर चीज
तँ चोरी-चपाटीक डरे निह। भरल आगनं देिख जीबछीक मनमे समुƖक लहिर जेकँ
खुशी िहलकोर मारए लगलै। कनडेिरये आँिखये मुसना िदिश देिख जीबछी मुिİकया
देलक। घरवालीक मुİकी देिख मुसना िखिसया कऽ बाजल- ‘हमरा देिख-देिख तोरा
हँसी लगै छौ। हँिस ले, जते हँसमे से हँिस ले। जाबे जीबै िछयौ ताबे। भगवान
केलखुन आ मरिलयौ तखैन तोहर हँसी नगरक लोक देखतौ।’’
मुदा जीबछीक लेल धैन-सन। िकएक तँ खुशीसँ मन एते भरल रहै जे घरबलाक
बात ओिहमे पैिसबे ने केलै। मने-मन जीबछी लावा भुजैक िवचार करए लागिल। लावा
भुजै लेल एकटा नĦहर खापिड़ चाही। बालु रखै लेल एकटा कोहा चाही। लारिन तँ
अपनो खरहीसँ बना लेब। बाउलो नदी कातसँ लऽ आनब। जखन कुĦहिन ओिहठाम
जाएब तँ कचकुह तािक कऽ एकटा नमहर तौला लऽ लेब। ओकरे खापिड़ बना
लेब। बालु िधपबैले मझोलको कोहासँ काज चिल जाएत। एकटा सरबाक काज सेहो
पड़त। िकएक तँ बालु जे देबै से तँ हाथसँ निञ हएत। ओइमे एकटा बþीक डँट
लगबए पड़त। लगा लेब। मुसनाकँ कहलक- ‘‘लाबा भुजै लेल जारनक ओिरयान
करए पड़त।’’
लावाक नाम सुिन मुसनाक मनमे खुशी भेलै। मु İकुराइत उþर देलक- ‘‘एखन
टंगारी सु िढ़या लै छी। बेु पहर िगरहत कĸाक गाछीसँ बँिझयो आ सुखल ठौहिरयो
सभ आिन देब।’’
भिर िदनमे दुनू परानी जीबछी सभ कथूक ओिरयान कऽ लेलक।
लावा भुजब जीबछी शुु केलक। दू चुिŎया चुिŎ। एक मूहमे खापिड़, दोसरमे
कोहा। खापिड़मे भैँटक दाना भुजैत आ कोहामे बालु िधपैत। पिहल घानी भुिज
जीबछी एक चुटकी चुिŎमे दऽ दोसर घानी भुजब शुु केलक। दोसर घानीक लावा
देिख जीबछीक मन तर-उपर करए लागल। पिहलुका घानीक लावा चगेरीमे ं लऽ दुनू
ब्चो आ घरोबलाकँ आगूमे देलक। आगूमे लावा देिख मुसना मने-मन सोचए लगल जे
ई मौिगया बड़ लुिरगर अिछ। एहन İÿी भगवान सभकँ देथुन। कहू जे एखैन तक10 जगदीश Ćसाद मěडल
हम जे बुिझतो ने छलॱ से आइ खाइ छी। िधया-पुताकँ पोसब कोन बड़का भारी बात
िछऐ, समाजो लेल लोक बहुत िकछु कऽ सकैत अिछ।
लावाक गमक पुरबा हवामे िमिल गामकँ सुगंिधत कऽ देलक। सुगधं पािब टोलोक
आ गामोक İÿीगण सभ लावा कीनैक लेल एĸे-दुइये जीबछीक आंगन अाबए लगल।
मुदा एĸेटा जबाब जीबछी सभकँ दैत- ‘पिहने िगरहत कĸाकँ खुएबिन, तखन ककरो
देब। भिर दुपहर जीबछी लाबा भुजलक। दू िछņा। दुनू िछņा लावा घरमे रिख
ओिहमे सँ एक मुजेला लऽ साड़ीसँ झँिप जीबछी मुसनाकँ कहलक- ‘‘हम िगरहत
कĸा ओिहठाम जाइ छी। अहँ अगनेमे ं रहब।’’  किह जीबछी माथपर मु जेला लेने
āीकाĠत ऐठाम िबदा भेल।
जीबछीक माथपर मुजेला āीकाĠत गौरसँ देिख मुİकुराइत कहलिखन- ‘‘बड़ खुशी
देखै छी लछमी महरानी। मुजेलामे की चोराकऽ अनलहुँहँ। कने हमरो देखए िदअ?’’
अनसुनी करैत जीबछी मुİकी दैत आगनं जा िगरहतनीक आगू मे मुजेला रिख
कहलकिन- ‘‘काकी, थोड़े कऽ लाइ बना िलहिथ। अखन थोड़े नोन-मरीच-तेल िमला
कऽ देथु। जे कĸाकँ दऽ अबै िछएिन।’’
िछपलीमे लावा नेने जीबछी दरबĔजापर जा āीकाĠतक आगूमे देलकिन। ओ
िछपलीमे उĔजर-उĔजर रमदानाक लावा जेकँ लावाकँ िनहािर-िनहािर देखए लगलाह।
जीबछी कहलकिन- ‘‘काका,  की िनङहारै छिथन,  पिहने एक मुŇी मुँहमे दऽ कऽ
देखथुन ने। भैँटक लावा िछऐ।’’
एक मुŇी उठा āीकाĠत मुँहमे देलिखन। लावाक कोमलता आ सुआद बुिझ
āीकाĠत पėीकँ सोर पािड़ कहलिखन- ‘‘एþे सुžर वİतुकँ एखन धिर जिनतहुँ निह
छलहुँ। धĠय अिछ जीबछीक ञान आ लूिर जे एहेन सुžर हराएल बİतुकँ ऊपर
केलक। साषात् देवी छी जीबछी। जाउ,  सĠदुकमे सँ एक जोड़ साड़ी आ आगी ं
िनकालने आउ। जीबछीकँ अपना ऐठामसँ पिहरा कऽ िबदा करब। गरीब-दुिखयाक देवी
छी जीबछी।’’
सभ िदन जीबछी लावा भुजैत छिल आ अगनेसँ ं लोक सभ कीिन-कीिन लऽ
जाइत। पनरह िदनक जमा कएल ुपैयो आ फुटकुिरयो जीबछी मुसनाकँ गनै लेल
आगूमे देलक। पाइ देिख मुसनाक मन उिड़ गे ल। मूहसँ ठहाका िनकलल। एक
टकसँ मुसना जीबछी िदिश देिख, कैँचा गनए लगल।

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